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हाईकोर्ट ने शासन से पूछा, क्यों ना याचिका में दिए नामों को पक्षकार बनाया जाए

बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान करीब 7 हजार अभिकर्ताओं की भीड़ हाईकोर्ट में उमड़ पड़ी।

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बिलासपुर . निवेशकों के लगभग एक लाख करोड़ रुपए लेकर फरार चिटफंड कंपनियों के खिलाफ मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आरसीएस सामंत की एकलपीठ ने बुधवार को राज्य शासन से पूछा है कि क्यों ना याचिका में उल्लिखित नामों को पक्षकार बनाया जाए। कोर्ट ने कहा, जब केंद्र सरकार द्वारा चिटफंड कंपनियों को बंद करने के निर्देश दिए गए थे, तो आखिर किसके इशारे पर इन कंपनियों को प्रदेश में कारोबार करने की अनुमति दी गई। कोर्ट के इस सख्त टिप्पणी पर राज्य शासन ने जवाब के लिए 4 सप्ताह की मोहलत मांगी है। मामले की आगामी सुनवाई 26 फरवरी को होगी। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान करीब 7 हजार अभिकर्ताओं की भीड़ हाईकोर्ट में उमड़ पड़ी। चिटफंड कंपनियों के शिकार लोगों की संख्या एक लाख से अधिक बताई जा रही है। बुधवार तक 7 हजार अभिकर्ताओं की ओर से शपथपत्र दायर किए गए हैं। अभिकर्ता संघ की ओर से मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर का कहना है कि आगामी सुननाई तक करीब 25 हजार शपथपत्र और डाले जाएंगे। याचिका में कहा गया है, कि चिटफंड मामले के तार राज्य के सीएम, मंत्रियों एवं कई वरिष्ठ नौकरशाहों से जुड़े हैं। उन्हें आरोपी बनाने और मामले की जांच सीबीआई या किसी अन्य उच्च स्तरीय जांच संस्था से कराए जाने की मांग की गई है।
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सीएम की पत्नी वीणा समेत कई मंत्री प्रमोशनल इवेंट्स में हुए थे शामिल : ज्ञात हो कि इस मामले में 5 नवंबर को याचिका दायर कर मांग की गई है कि चिटफंड कंपनियों के प्रमोशनल इवेंट्स में राज्य के सीएम रमन सिंह की पत्नी वीणा सिंह, पुत्र अभिषेक, धरम लाल कौशिक समेत कई कैबिनेट मंत्री, आईएएस, आईपीएस एवं वरिष्ठ नौकरशाह शामिल हुए थे। इनके प्रमोशन का ही परिणाम था कि लोगों का विश्वास इन कंपनियों पर बढ़ा, जिसके कारण हजारों लोगों ने अपनी एफडी तुड़वाकर गाढ़े पसीने की कमाई इन कंपनियों में निवेश कर दी। बता दें कि प्रदेश भर में चल रही चिटफंड कंपनियां बोरिया-बिस्तरा समेटकर फरार हो गई हैं। कंपनी में कार्यरत एजेंटों ने ही लोगों का पैसा लेकर कंपनी में जमा कराया था। कंपनी के फरार होने के बाद लोगों का गुस्सा और कानूनी कार्रवाई की गाज इन एजेंटों पर गिर पड़ी। पुलिस ने भी बड़े खिलाडिय़ों को छोड़ इन एजेंटों पर कार्रवाई शुरू कर दी। याचिका में ये आरोप भी लगाया गया है कि सरकार ओर पुलिस के आला अधिकारी चिटफंड कंपनी के निदेशकों एवं मालिकों को छोड़ एजेंटों को धरपकड़ कर कार्रवाई कर रही है। पुलिस के खौफ के कारण कई एजेंट आत्महत्या कर चुके हैं, परिजनों ने पुलिस पर सुसाइड नोट गायब करने का आरोप भी लगाया है।

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