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अटैचमेंट का खेल: नियमों की अनदेखी कर शिक्षिका को बनाया हॉस्टल अधीक्षिका, बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा असर

Bilaspur News: एक तरफ राज्य सरकार स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए युक्तियुक्तकरण और अटैचमेंट समाप्त करने जैसे बड़े कदम उठा रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ अधिकारी शासन की मंशा पर पानी फेर रहे हैं।

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Teacher (Image-Freepik)

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CG News: एक तरफ राज्य सरकार स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए युक्तियुक्तकरण और अटैचमेंट समाप्त करने जैसे बड़े कदम उठा रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ अधिकारी शासन की मंशा पर पानी फेर रहे हैं।

बिलासपुर जिले में आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने एक शिक्षिका को हॉस्टल अधीक्षिका पद पर अटैच कर दिया। विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने इसके लिए एनओसी भी जारी कर दी। तखतपुर ब्लॉक की शिक्षिका सुशीला काठले को बिल्हा ब्लॉक स्थित अनुसूचित जाति प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास में अधीक्षिका बनाकर पदस्थ कर दिया गया। दूरी अधिक होने के कारण वह स्कूल में दो पीरियड पढ़ाने की शर्त पूरी नहीं कर सकेंगी। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। ऐसे में शासन के नियमों को ताक पर रख एक बार फिर जिले के अधिकारी अटैचमेंट करने लगे हैं।

17 जून को शासन ने यह दिया था आदेश

शासन ने आदेश में स्पष्ट किया था कि किसी भी शिक्षक को शैक्षणिक कार्य के अलावा अन्य विभाग या कार्यालय में अटैचमेंट नहीं दिया जाएगा। साथ ही 17 जून 2025 को आदिम जाति विकास विभाग ने यह निर्देश भी जारी किया था कि छात्रावास अधीक्षक का प्रभार केवल उन्हीं शिक्षकों को दिया जाए, जिनका स्कूल हॉस्टल के निकट हो। ताकि स्कूल के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और शिक्षक प्रतिदिन कम से कम दो पीरियड पढ़ा सकें।

छात्रावासों में अधीक्षिका की कमी के कारण शिक्षकों को अटैच किया जा रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था है। बिल्हा में कन्या छात्रावास है ऐसे में महिला शिक्षिका को अटैच किया गया है। जब तक शासन से निर्देश नहीं मिलते तब तक शिक्षिका को ही अधीक्षिका की जिम्मेदारी दी जा रही है। - प्रकाश लहरे, सहायक आयुक्त, आदिवासी विभाग बिलासपुर।

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