
बिलासपुर . पत्रिका डॉट कॉम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे कार्यक्रम में शनिवार को पत्रिका कार्यालय में बिलासा वरिष्ठ नागरिक मंच बिलासपुर के राजेन्द्र श्रीवास्तव सचिव उपस्थित हुए। उन्होने वृद्धजनो को लेकर समाज में उनके साथ हो रहे भेदभाव को लेकर कई सवाल उठाये। उन्होने आज समाज में वृद्धजनों जिस दौर से गुजर रहे है उसमें विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि जनरेशन गेप के कारण परिवार और समाज में वृद्धजनों का सम्मान घटा है आज का युवा और परिवार वृद्धो को बोझ समझता है। वह सोचता है कि वृद्ध किसी काम के नही है एक अस्सी साल का वृद्ध नये तरीके से शुरूवात भी नही कर सकता यह सबसे बड़ी विड़म्बना है।
जब उससे पूछा गया की जगह जगह पर परिवार में बिखराव की स्थिति है वृद्धा आश्रम और डे सेन्टर बढ़े है। उन्होने कहा परिवार के बिखराव का सबसे बड़ा कारण है परिवार में वृद्धजनों का सम्मान कम होना भारतीय परम्परा में बुजुग ही एक ऐसी कडी है जो परिवार को सहेज कर सखता है जब उसी की उपेक्षा होने लगे तो वह परिवार को कैसे एकजुट रख सकता है वह आज के परिवेश में वृद्धाआश्रम में और डे सेन्टरों में रह रहा है जब वही घर में नही है तो परिवार में बिखराव की स्थिति आना स्वाभाविक है। उन्होने बताया कि बुजुर्गो के लिए शासन की कई योजनाएं काम कर रही है इसका लाभ मिल रहा है लेकिन यह कहना भी सही नही है कि योजना के बुजुर्गो को कल्याण हो रहा है गोवा या फिर साउथ के कुछ ऐसे जिले है जहां बुजुर्गों को इज्जत दी जाती है उनके एकाउंट में हजार पन्द्रह सौ जरूरत के अनुसार डाल दिया जाता है लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की दलील रहती है कि वह दो रुपये किला चावल दे रही है इस कारण वृद्धा पेंशन तीन सौ पच्चास रुपये दिया जाता है जो आग की मंहगाई में काफी नही है। शासन को वृद्धो की अवश्यकताओं को देखते हुए इसे बढ़ाने की जरूरत है। अकले पन को लेकर उन्होने कहा पति या पत्नी की मृत्यु के बाद स्वाभिाविक है अकेलापन आना और इस अकेले पन को दूर करने के लिए ही शासन स्तर पर मनोरंजन के लिए ही डे सेन्टरों के संचालक की अवश्यकता है।
Published on:
20 Jan 2018 01:46 pm
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