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सौ साल बाद अक्टूबर में हो रहा तुलसी विवाह, जागेंगे श्रीहरि

विवाह का सिलसिला 19 नवंबर से शुरू होगा।
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बिलासपुर

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Anil Kumar Srivas

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Updated: 24 Oct 2017, 12:39 PM IST

tulsi vivah

बिलासपुर . देवउठनी एकादशी का पर्व इस वर्ष नवबंर के बजाए अक्टूबर माह में मनाया जा रहा है। 31 अक्टूबर को इस वर्ष तुलसी विवाह का कार्यक्रम देवउठनी एकादशी को सम्पन्न होगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक एेसा एक शताब्दी बाद हो रहा, जब अक्टूबर में देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। तुलसी विवाह का पर्व अक्सर नवंबर में ही सम्पन्न होता आया है। लेकिन इस वर्ष अक्टूबर में ही तुलसी विवाह के साथ भगवान विष्णु जागेंगे। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद डॉ. दीपक शर्मा ने बताया कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी की तिथि को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष इस साल ३१ अक्टूबर को मनाया जाएगा। वैसे तो देवउठनी एकादशी की तिथि नवंबर में ही आती है लेकिन इस वर्ष अक्टूबर में यह पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार 100 वर्षों बाद ऐसा हो रहा है। हालांकि विवाह के कारक ग्रह शुक्र के अस्त होने से तुलसी विवाह के दिन विवाह के मुहूर्त नहीं होंगे। विवाह का सिलसिला 19 नवंबर से शुरू होगा।

तुलसी और शालिग्राम विवाह की कथा : श्री पद्यमपुराण कथा के अनुसार तुलसी को पूर्व में जालंधर नामक दैत्य की पत्नी बताया गया है। जालंधर के अत्याचारों से त्रस्त होकर भगवान विष्णु ने अपनी योग माया से जालंधर का वध किया था। पति जालंधर की मृत्यु से पीडि़त तुलसी पति वियोग में तड़पती हुई सती हो गई। तुलसी के सती होने पर जो भस्म निर्मित हुई उसी भस्म से तुलसी के पौधे का जन्म हुआ। तुलसी की पतिव्रता एवं त्याग से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने तुलसी को अपनी पत्नी के रूप में अंगिकार किया और यह वरदान दिया कि जो मनुष्य तुम्हारा विवाह मेरे साथ कराएगा। वह परमधाम को प्राप्त होगा। उसके समस्त पाप नष्ट हो जाएंगे। इसलिए देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का प्रचलन है।
तुलसी विवाह का महत्व : देवउठनी एकादशी के दिन व्रत करने पर हजारों अश्वमेघ यज्ञ एवं राजसी यज्ञ के फल की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत का पालन करने से यशस्वी पुत्र की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से बैकुंठ या स्वर्ग की प्राप्ति होती है। देवउठनी एकादशी की रात्रि को जागरण कर ईश्वर का ध्यान करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। जिन कन्याओं का विवाह नहीं हो रहा या विवाह में बाधा उत्पन्न हो रही हो उनके द्वारा तुलसी व शालिग्राम का विवाह कराने से विवाह में उत्पन्न हो रही बाधा दूर होती है।