
बिलासपुर . केक, दही, पानी पाउच, फ्राइड राइस जांच में सेहत के लिए नुकसानदायक पाया गया। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने पिछले माह एक दर्जन खाद्य सामग्रियों के सैंपल लेकर जांच के लिए रायपुर भेजा गया था। ये सभी सैंपल जांच में फेल हो गए हैं। इन संस्थानों के संचालकों के खिलाफ अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी केडी कुंजाम के न्यायालय में प्रकरण पेश किया गया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने अनेक संस्थानों में खाद्य व पेय पदार्थों की सैंपलिंग की थी। सभी को जांच के लिए राज्य सरकार के प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया। इसकी जांच रिपोर्ट आ गई। इसमें ज्यादातर सैंपल जांच में अवमानक और मिथ्याछाप पाए गए हैं।
इन संस्थानों के सामान जांच में फेल हुए: जांच में अग्रसेन चौक स्थित विशाल मेगा मार्ट का मसूर दाल अवमानक पाया गया है। इसके संचालक आदित्य शर्मा हैं। मोपका के एवन रेस्टोरेंट का फ्राइड राइस अवमानक पाया गया। इसके संचालक टीकाराम साहू हैं। शनिचरी बाजार में गोरेलाल गुप्ता के महामाया किराना स्टोर का पीसी हल्दी मिथ्याछाप व अवमानक पाया गया। सिद्धार्थ शुक्ला के जगमल चौक स्थित गोपाल डेयरी का सपे्रटा दही दूध पावडर से बना हुआ पाया गया।
शनिचरी बाजार में सच्चानंद मोटवानी के पूनम प्रॉविजन स्टोर की पिसी धनिया अवमानक स्तर की मिली। मंजीत मेहरचंदानी की रघुराज स्टेडियम काम्ॅपलेक्स स्थित पेस्ट्री क्लब का केक मिथ्याछाप पाया गया। सिरगिट्टी के खालसा बेवरेजेस जेबी पानी पाउच मिसब्रांड व अवमानक पाया गया। इसके संचालक जगपाल सिंह खनूजा हैं। सिरगिट्टी के न्यू लक्ष्मी टी सेंटर की पैक्ड असम चायपत्ती मिसब्रांड मिला है। इसके संचालक शैलेष लालचंदानी हैं। रघुराज सिंह स्टेडियम के कॉम्पलेक्स स्थित केजी बे्रकर्स का पैक्ड शक्ति काजू टोस्ट मिसब्रांड पाया गया। इसके संचालक जयकिशन नागदेव हैं। कोटा के केदार होटल का खोवा बरफी अवमानक पाया गया। इसके संचालक चमन गुप्ता हैं। गनियारी के सोनी जलपान गृह का बूंदी लड्डू अवमानक पाया गया। इसके संचालक नितेश सोनी हैं। ग्राम जाली के मोतेश्वरी स्व-सहायता समूह द्वारा रेडी टू ईंट के तहत बनाए गए दलिया खाने योग्य नहीं पाया गया है। इस समूह की अध्यक्ष बचन बाई हैं।
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इन धाराओं के तहत प्रकरण : धारा 51 अवमानक खाद्य सामाग्रियों के लिए बनाया गया है। इस धारा में दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को अधिकतम 5 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। वहीं धारा 52 मिथ्याछाप के लिए बनाया गया है। इस धारा के अतंगर्त दोषी व्यक्ति को अधिकतम 3 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है।
पत्रिका व्यू : प्रक्रिया है अव्यावहारिक - विभाग की सैंपलिंग व जांच प्रक्रिया बेहद अव्यावहारिक है। जब तक जांच रिपोर्ट आती है, पूरा शहर मिलावटी व जहरीला खाद्य सामग्री खा चुका होता है। जो नुकसान होना था, हो चुका होता है। जांच रिपोर्ट व कार्रवाई औपचारिकता मात्र रह जाती है। बेहतर है कि जिले में ही लैब स्थापित किया जाए। समय रहते जांच व कार्रवाई की जाए।
मामले की जांच की जा रही : जिन संस्थानों के खाद्य सामाग्रियां अवमानक एवं मिथ्याछाप पाई गई हैं। उन संस्थानों के संचालकों के खिलाफ अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी के न्यायालय में प्रकरण पेश किया गया है।
देवेंद्र विंध्यराज, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, बिलासपुर
Published on:
30 Nov 2017 11:15 am
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