
बिलासपुर . फेसबुक, वॉट्सएप के शौक ने लड़कपन में लापता होकर पंजाब के ढाबे में वेटर का काम कर रहे युवा को 6 साल बाद उसके परिवार से मिला दिया। सीपत थाना प्रभारी ने ढाबा संचालक से चर्चा कर उसे वापस बुलवाकर उसके परिजनों से मिलाया। जवान बेटे को सामने देखकर कृषक पिता ने उसे सीने से लगा लिया। पुलिस के मुताबिक, सीपत क्षेत्र के ग्राम ऊनी में रहने वाले कृषक रामकुमार केंवट का 15 वर्षीय पुत्र उमेश उर्फ ओम केंवट 25 अगस्त 2012 को घर से स्कूल जाने के लिए निकला फिर वापस नहीं आया। चिंतित परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन पता नहीं चला। चचेरे भाई संतोष पिता श्यामलाल केंवट (35) ने उसके गुम होने की सूचना सीपत थाने में दर्ज कराई। सुप्रीम कोर्ट ने जब गुम बालक- बालिकाओं की पतासाजी कर अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए, तब ऑपरेशन मुस्कान के तहत 21 जून 2013 को सीपत पुलिस ने धारा 363 के तहत अपराध दर्ज कर उसकी पतासाजी के लिए दिल्ली से लेकर गाजियाबाद तक टीम भेजकर तस्दीक कराई लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल सका।
पुलिस अधीक्षक ने उसके संबंध में जानकारी देने वालों पर 1000 रुपए इनाम घोषित किया।
इसी दौरान उमेश ने अपने थाना क्षेत्र के ग्राम खम्हरिया के एक व्यक्ति को फेसबुक पर अपने संबंध में जानकारी दी। ग्राम ऊनी के लड़के के गुमशुदा के बारे में सीपत थाना प्रभारी अनिल अग्रवाल को बताया, वह पंजाब प्रांत के ढाबे में काम कर रहा है। थाना प्रभारी ने उससे नंबर लेकर अपने मोबाइल से उसे जोड़ा और वाट्सएप पर चैट के जरिए उससे चर्चा कर अपने ढाबा संचालक से बात कराने के
लिए कहा।
बेटे को देखभर आईं पिता की आंखें : पंजाब के अटारी बार्डर के ढाबा संचालक गोल्डी से थाना प्रभारी ने चर्चा की और गुमशुदा को हीराकुंड एक्सप्रेस से बिलासपुर भेजने की बात कही। ढाबा संचालक ने उसे हीराकुंड एक्सप्रेस से बिलासपुर रवाना किया। यहां सीपत पुलिस के साथ उमेश को लेने के लिए रेलवे स्टेशन में उसके पिता रामकुमार केंवट, भाई और जीजा पहुंचे। 6 साल बाद अपने 21 साल के जवान बेटे को सामने देखकर पिता और भाई की आंखे भर आई दोनों ने उमेश को अपने सीने से लगा लिया। सीपत थाना प्रभारी ने कागजी कार्रवाई के बाद उमेश को उसके पिता के सुपुर्द कर दिया।
Published on:
29 Nov 2017, 2:34 PM IST
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