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महिलाओं ने सुनाई सफर की आपबीती, ट्रेनों में पुरुषों की घूरती निगाहें… हमेशा लगता है डर

Patrika Mahila Suraksha: पत्रिका ने ट्रेन में सफर कर यह जानने की कोशिक की है कि ट्रेन में सफर करते समय महिलाएं क्या महसूस करती हैं। उन्हें किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

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महिलाओं ने सुनाई सफर की आपबीती, ट्रेनों में पुरुषों की घूरती निगाहें... हमेशा लगता है डर

Patrika Mahila Suraksha: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से एक खबर आ रही है जहा ट्रेनों में महिलाओं के साथ छेड़खानी करने का आरोपी आया है। वैसे तो बोला जाता है की आज महिला और पुरुष की बराबरी की बात जरूर होती है, तब सवाल यह उठता है कि महिलाएं लगभग हर जगह खुद को असुरक्षा की भावना से घिरी हुई क्यों पाती हैं।

यहां तक कि ट्रेन व बस में सफर करते समय असहज महसूस करती हैं। पत्रिका ने ट्रेन में सफर कर यह जानने की कोशिक की है कि ट्रेन में सफर करते समय महिलाएं क्या महसूस करती हैं। उन्हें किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

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Patrika Mahila Suraksha: हमेशा लगता है डर

खुशी साहू ने कहा कि डर डर के हम लोगों को ट्रेवल करना पड़ता है। स्कार्फ लगाकर भी रखते रहते हैं। कई बार चीजों के इग्नोर भी करते हैं। सरोजनी ने बताया कि सुरक्षित तो कहीं भी नहीं है। पर क्या करें, ऐसा तो नहीं है कि घर पर ही बैठ जाएं। काम से तो बाहर जाना ही पड़ेगा। शालीमार एलटीटी एक्सप्रेस में सफर कर रही पुष्पा ने बताया कि वह रायपुर से जयरामनगर तक ट्रेन अप-डाउन करती हैं। ट्रेन में घूरने और छींटाकशी की समस्या आम हो गई है।

हमेशा…

रायपुर से रायगढ़ सफर कर रही आरती ने बताया कि सामान्य डिब्बों में सफर करना महिलाओं के लिए बेहद मुश्किल है। कई बार पुरुष महिलाओं के बहुत करीब आकर खड़े हो जाते हैं।

ड्रिंक किए हुए लोग चढ़कर परेशान करते है

एम्स रायपुर में काम करने वाली प्रीती ने कहा, हम बिल्कुल भी सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं। कुछ ही दिन पहले की बात एक बार जब मैं सरोना से ट्रेन पकड़ी थी, तो एक ड्रिंक किया हुआ व्यक्ति बोगी में चढ़ गया। वह अजीब नजरों से घूरने लगा। धीरे से पास आया और अजीब सी हरकत करने लगा। मैं डर गई थी।

आसपास के लोग देख रहे थे पर किसी ने कुछ नहीं कहा। महिला सुरक्षा को लेकर टोल फ्री नंबर भी नहीं दिखा। जैसे तैसे दुर्ग स्टेशन पहुंची और तुरंत उतर गई। उन्होंने कहा कि ऐसी बातों को घर पर भी बता नहीं पाती। सफर में इस तरह की परिस्थितियों को चुपचाप झेलना पड़ता है।

पावर हाउस स्टेशन

समय : दोपहर 12.50 बजे

स्टेशन पर यात्री ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं। दोपहर 1.07 बजे दुर्ग की ओर जाने वाली ट्रेन क्रमांक 68707 आने वाली थी। गाड़ी देरी से 1. 41 बजे स्टेशन पहुंची। जैसे ही ट्रेन पर चढ़े तो कहीं महिलाएं Rajasthan: घूंघट से बाहर निकल रहीं महिलाएं, अब भर रहीं फर्राटाग्रुप में बैठी हुई थी, तो कहीं अलग से सीट पर। उनके आस-पास बहुत से पुरुष थे। अधिकांश लोगों की निगाहें महिलाओं को घूर रही थी। ट्रेन रवाना हुई तो यात्री महिलाओं से उनकी सुरक्षा को लेकर बातचीत की।

बिलासपुर स्टेशन

समय : शाह 5.40 बजे

ट्रेन संख्या 12905 में बिलासपुर से रायगढ़ सफर रही सुनीता (काल्पनिक) ने बताया कि वह बिलासपुर के एक सरकारी दफ्तर में कार्यरत हैं। रोज़ाना रायगढ़ से बिलासपुर ट्रेन से अप-डाउन करती हैं। उनका कहना है कि सफर आसान नहीं होता। स्टेशन पर कदम रखते ही कुछ लोग घूरना शुरू कर देते हैं, जिससे असहजता महसूस होती है।