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World Poetry Day: जब आवाजें दबती हैं, तब कविता बोलती है… डॉ. अजय पाठक का युवाओं के लिए संदेश, सोशल मीडिया पर खुलकर रखी राय

World Poetry Day: वल्र्ड कविता दिवस (World Poetry Day) के अवसर पर जब दुनिया कविता की संवेदनशीलता और शक्ति को याद कर रही है, ऐसे समय में शहर के प्रतिष्ठित कवि डॉ. अजय पाठक से बातचीत कविता के वर्तमान और भविष्य को समझने का अवसर देती है।

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कवि डॉ. अजय पाठक (फोटो सोर्स- पत्रिका)

कवि डॉ. अजय पाठक (फोटो सोर्स- पत्रिका)

World Poetry Day: वल्र्ड कविता दिवस (World Poetry Day) के अवसर पर जब दुनिया कविता की संवेदनशीलता और शक्ति को याद कर रही है, ऐसे समय में शहर के प्रतिष्ठित कवि डॉ. अजय पाठक से बातचीत कविता के वर्तमान और भविष्य को समझने का अवसर देती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कविता "मनुष्यता की मातृभाषा" है, जो हर युग में समाज की आवाज रही है और आगे भी रहेगी।

डॉ. पाठक मानते हैं कि जब समाज में भय या दबाव के कारण आवाज दब जाती हैं, तब कवि ही होता है जो निर्भीक होकर सच कहता है। उनके अनुसार, कविता का जन्म ही करुणा से हुआ है और यह हमेशा वंचित और शोषित वर्ग की अभिव्यक्ति का माध्यम बनी रहेगी।

युवा पीढ़ी: संभावना व कमी

युवाओं में उत्साह को उन्होंने सकारात्मक बताया, लेकिन गहन अध्ययन की कमी को सबसे बड़ी कमजोरी माना। उनके अनुसार, संवेदना, भाषा की पकड़ और व्यापक ज्ञान के बिना सार्थक कविता संभव नहीं।

वर्तमान हिंदी कविता: तेज हुई धार

उन्होंने कहा कि आज कविता की धार पहले से अधिक तेज है, लेकिन समस्या यह है कि लोग गंभीर कविता पढ़ नहीं रहे। मंचीय कविता को उन्होंने "अल्पकालिक मनोरंजन" बताया, जबकि नरेश सक्सेना, मंगेश डबराल और उदय प्रकाश जैसे कवियों की रचनाओं में आज भी आम आदमी की पीड़ा झलकती है।

समाज में पीड़ा, तब तक कविता जिंदा

डॉ. पाठक का मानना है कि जब तक समाज में पीड़ा और असमानता रहेगी, कविता जीवित रहेगी। उन्होंने नई पीढ़ी को संदेश दिया कि वे इतिहास, संस्कृति और आम जीवन का गहरा अध्ययन करें और नैतिक साहस के साथ लिखें, तभी कविता समाज में वास्तविक बदलाव का माध्यम बन सकेगी।

सोशल मीडिया और कविता का बदलता स्वरूप

सोशल मीडिया के प्रभाव पर उन्होंने दो टूक कहा कि इससे कविता का विस्तार तो हुआ है, लेकिन उसकी गंभीरता प्रभावित भी हुई है। बिना अध्ययन और साधना के लोग कविता लिखने लगे हैं, जिससे स्तर गिरा है। उन्होंने एआई और कॉपी-पेस्ट प्रवृत्ति को भी चिंता का विषय बताया।

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