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न कोई गॉडफादर, न कोई PR स्टंट! 20 की उम्र में आफताब शिवदासानी ने हासिल किया था वो मुकाम जिसके लिए तरसते हैं स्टार्स

Aftab Shivdasani: अभिनेता आफताब शिवदासानी बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड और पीआर स्टंट के महज 20 साल की उम्र में अपनी पहली ही फिल्म 'मस्त' से वो मुकाम हासिल किया था, जो आज के स्टार्स के लिए एक सपना है। उन्होंने एक उस मिथ को भी गलत साबित कर दिया था, जिसमें कहा जाता है कि चाइल्ट आर्टिस्ट बड़े होकर सफल नहीं हो पाते।
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Aftab Shivdasani Superhit career at 20 without godfather or pr stunts stardom become a sensation in bollywood

आफताब शिवदासानी आज मना रहे हैं अपना बर्थडे

Aftab Shivdasani Birthday: आज के दौर में जब किसी नए कलाकार को बॉलीवुड में पैर जमाने होते हैं, तो उसे किसी बड़े फिल्मी खानदान (नेपोटिज़्म) का सहारा चाहिए होता है, या फिर दिन-रात सुर्खियों में बने रहने के लिए महंगे पीआर स्टंट (PR Stunts) और सोशल मीडिया ड्रामा करना पड़ता है, लेकिन बॉलीवुड के इतिहास में एक ऐसा 'चॉकलेटी बॉय' भी आया, जिसने न तो कभी किसी गॉडफादर का हाथ थामा और न ही कभी विवादों का सहारा लिया। हम बात कर रहे हैं अभिनेता आफताब शिवदासानी (Aftab Shivdasani) की। आज उनके 48वें जन्मदिन के मौके पर हर कोई उनके शांत स्वभाव की तारीफ कर रहा है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि महज 20 साल की उम्र में आफताब ने वो ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया था, जिसके लिए बड़े-बड़े सितारे सालों-साल तरसते हैं।

आफताब शिवदासानी ने 20 की उम्र में की सफलता हासिल

एक साधारण सिंधी-पारसी परिवार से आने वाले आफताब शिवदासानी ने भले ही बचपन में 'मिस्टर इंडिया' और 'चालबाज' जैसी फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम किया था, लेकिन बतौर मुख्य अभिनेता उनकी शुरुआत किसी सपने जैसी थी। साल 1999 में जब वह सिर्फ 20 साल के थे, तब दिग्गज निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने उन्हें अपनी संगीतमय रोमांटिक फिल्म 'मस्त' में उर्मिला मातोंडकर के अपोजिट कास्ट किया था।

पहली ही फिल्म से 20 साल के इस लड़के ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तहलका मचाया कि वह रातों-रात देश के नेशनल क्रश बन गए। उस दौर में थिएटर्स के बाहर उनके पोस्टर्स के लिए लाइनें लगती थीं। इस फिल्म के लिए उन्हें 'बेस्ट मेल डेब्यू' के कई अवॉर्ड्स भी मिले। यह वो दौर था जब उनके साथ के कई स्टार किड्स भी ऐसा स्टारडम पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

एक झटके में तोड़ा था बॉलीवुड का सबसे बड़ा 'शाप'

आफताब की यह कामयाबी इसलिए भी ऐतिहासिक थी क्योंकि उन्होंने बॉलीवुड के एक बहुत पुराने और कड़वे 'मिथक' को तोड़ दिया था। हिंदी सिनेमा में यह माना जाता था कि जो बाल कलाकार (Child Artists) बचपन में बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो जाते हैं, वह बड़े होकर बतौर लीड हीरो हमेशा फ्लॉप होते हैं। सचिन पिलगांवकर से लेकर जूनियर महमूद तक, इसके कई उदाहरण थे। लेकिन आफताब ने महज 20 साल की उम्र में 'मस्त' को सुपरहिट कराकर इस 'चाइल्ड आर्टिस्ट कर्स' (शाप) को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। इसके तुरंत बाद उन्होंने फिल्म 'कसूर' में एक साइको विलेन का किरदार निभाकर यह भी साबित कर दिया कि उनमें सिर्फ शक्ल नहीं, बल्कि बेहतरीन अदाकारी का हुनर भी है।

कैंप पॉलिटिक्स से दूर, अपनी शर्तों पर जिए जिंदगी

आफताब के करियर का सबसे खूबसूरत पहलू यह रहा कि इतनी कम उम्र में इतना बड़ा मुकाम पाने के बाद भी उनके पैर हमेशा जमीन पर रहे। उन्होंने कभी किसी 'कैंप' यानी गुटबाजी का हिस्सा बनना स्वीकार नहीं किया। जब फिल्में कम हुईं, तो वह कड़वाहट पालने या विवादित बयान देकर खबरों में आने के बजाय बेहद शालीनता से पीछे हट गए और खुद को एक सफल प्रोड्यूसर और स्पोर्ट्स आंत्रप्रेन्योर के रूप में स्थापित किया। आज जब वह साउथ सिनेमा और ओटीटी पर अपनी नई पारी खेल रहे हैं, तो यह साफ है कि आफताब भले ही क्रेडिट की रेस में पीछे छूट गए हों, लेकिन गरिमा और साख के मामले में वे आज भी बॉलीवुड के सबसे अमीर स्टार्स में से एक हैं।

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