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Asha Bhosle Death Reason: आशा भोसले की मौत का कारण आया सामने, डॉक्टर ने बताया कैसी हो गई थी हालत

Asha Bhosle Death Reason: बॉलीवुड की दिग्गज गायिका आशा भोसले का निधन हो गया है। उन्होंने 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है। ऐसे में उनकी मौत का कारण भी सामने आ गया है। डॉक्टर ने उनकी आखिरी समय में हालत पर भी बड़ी जानकारी दी है। जिसे सुनकर उनके फैंस भी इमोशनल हो रहे हैं।

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Asha Bhosle Death Reason is Multiple-Organ Failure at 92 due to hospitalized doctor confirm

आशा भोसले का हुआ निधन

Asha Bhosle Death Reason: भारतीय संगीत जगत से आज एक ऐसी दुखद खबर सामने आई है जिसने करोड़ों संगीत प्रेमियों का दिल तोड़ दिया है। अपनी जादुई आवाज से सात दशकों तक दुनिया पर राज करने वाली महान गायिका आशा भोसले का निधन हो गया है। उन्होंने 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है। उन्हें बीते दिन 11 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहां उन्होंने आखिरी सांस ली, उनके निधन की खबर फैलते ही देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। ऐसे में उनकी मौत का बड़ा कारण भी सामने आ गया है। डॉक्टर ने बताया कि उनकी हालत कैसी हो गई थी।

आशा भोसले की मौत मल्टी-ऑर्गन फेलियर की वजह से हुई (Asha Bhosle Death Reason)

अस्पताल के डॉक्टर प्रतीत समदानी ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी कि आशा जी का निधन 'मल्टी-ऑर्गन फेलियर' यानी कई अंगों के काम करना बंद कर देने की वजह से हुआ है। उनके बेटे आनंद भोसले ने भी इस दुखद खबर की पुष्टि की है। हालांकि डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर उनका शरीर साथ छोड़ गया और उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

पीएम मोदी ने भी की थी प्रार्थना (PM Modi Tweet On Asha Bhosle)

आशा ताई के निधन से कुछ ही घंटे पहले तक पूरा देश उनके ठीक होने की दुआएं मांग रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया पर उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अब वही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स दिग्गज गायिका को दी जा रही भावभीनी श्रद्धांजलियों से भरे पड़े हैं। नेता हों, अभिनेता हों या आम प्रशंसक, हर कोई इस अपूरणीय क्षति से मर्माहत है।

सात दशकों का जादुई सफर (Asha Bhosle Career)

आशा भोसले महज एक गायिका नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की पहचान थीं। उन्होंने अपने करियर में हजारों गाने गाए और हर पीढ़ी के दिलों में अपनी जगह बनाई। 'पिया तू अब तो आजा' की मस्ती हो, 'दम मारो दम' का बेफिक्र अंदाज या 'इन आंखों की मस्ती' की गहराई—आशा जी की आवाज में वो विविधता थी जो शायद ही किसी और में देखने को मिले। 'मेरा कुछ सामान' जैसे गानों के जरिए उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ चुलबुले गानों की मलिका नहीं, बल्कि गंभीर और शास्त्रीय संगीत की भी उतनी ही बड़ी जानकार थीं।

पुरस्कारों से कहीं बड़ा था उनका व्यक्तित्व

उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' सहित अनगिनत राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार उनके प्रशंसकों का वो प्यार था, जो उन्हें 90 की उम्र के बाद भी स्टेज पर परफॉर्म करते देख मिलता था। अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के जाने के बाद वह भारतीय संगीत का सबसे मजबूत स्तंभ थीं।

परिवार की ओर से जल्द ही उनके अंतिम संस्कार और अंतिम दर्शनों से जुड़ी जानकारी साझा की जाएगी। आज भले ही आशा ताई शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज की 'आशा' हर उस महफिल में जिंदा रहेगी जहां संगीत की बात होगी।