
जावेद अख्तर ने जैकी श्रॉफ और स्मिता पाटिल की तुलना की (Photo Source- Twitter/ANI/apnabhidu)
Javed Akhtar compare jackie shroff and Smita Patil: हिन्दी सिनेमा के दिग्गज गीतकार और स्क्रीन राइटर जावेद अख्तर अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में एक उन्होंने 'जग्गू दादा' यानी जैकी श्रॉफ के स्क्रीन प्रेजेंस पर खुलकर बात की। इस दौरान जावेद अख्तर ने उनकी तुलना स्मिता पाटिल से की। उन्होंने कहा कि मैं इंडस्ट्री के मेकर्स और राइटर से काफी नाराज हूं, इस दौरान उन्होंने खुद का भी नाम लिया। उन्होंने कहा कि कोई भी जैकी श्रॉफ के अंदर छिपे रहस्यमय और गहरे एक्टिंग गुण का पूरा फायदा नहीं उठा पाया। वहीं, कुछ समय पहले जैकी श्रॉफ ने अपनी इंडस्ट्री में एंट्री को लेकर एक शो में बात की थी।
जावेद अख्तर ने इंडिया टुडे से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने जैकी श्रॉफ के व्यक्तित्व के बारे में बताया कि स्क्रीन पर जैकी का शांत रहना भी अपने आप में बहुत कुछ कह जाता है। उन्होंने कहा, "मैं लेखकों और निर्देशकों से बेहद निराश हूं क्योंकि उन्होंने जैकी की इस खूबी का कभी सही और पूरा इस्तेमाल नहीं किया। इसमें मैं खुद को भी शामिल करता हूं।”
जावेद अख्तर ने आगे कहा, “ जैकी श्रॉफ के व्यक्तित्व में कुछ खास बात है। वह शांत रहने पर भी कभी खाली दिमाग वाले नहीं लगते। उनके चेहरे को देखकर हमेशा लगता है कि उनके अंदर कुछ बहुत गहरा चल रहा है, जिसे हम पूरी तरह समझ नहीं पा रहे हैं।"
81 साल के जावेद अख्तर ने जैकी के इस अनूठे गुण की तुलना दिवंगत अभिनेत्री स्मिता पाटिल से कर डाली। जावेद अख्तर ने कहा कि जैसे स्मिता पाटिल के क्लोज-अप शॉट्स बिना किसी डायलॉग के भी दर्शकों पर गहरा असर छोड़ते थे, ठीक वही ताकत जैकी श्रॉफ में भी मौजूद है।
उन्होंने आगे कहा, "जैकी के चेहरे का अगर आप बिना आवाज वाला कोई क्लोज-अप शॉट लें, तो चेहरे पर भले ही कोई बनावटी भाव न हो, फिर भी लगेगा कि जो दिख रहा है, बात उससे कहीं ज्यादा गहरी है। यही सहज और रहस्यमय गुण स्मिता पाटिल में भी हुआ करता था।"
इस बातचीत के दौरान जावेद अख्तर ने अचानक मिली सफलता और लंबे समय तक टिकने वाली सफलता के अंतर को भी साफ तरीके से बताया। उनका मानना है कि किसी दौर में कोई फिल्म या कलाकार कितना सफल हुआ, इससे उसकी अंतिम महानता तय नहीं होती।
उदाहरण देते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि 'वॉर एंड पीस' जैसी महान किताब के पहले संस्करण के आते ही लोगों ने उसे क्लासिक नहीं माना था। समय ही सबसे बड़ा निर्णायक होता है। कई फिल्में अपने समय में भारी ब्लॉकबस्टर साबित होती हैं, लेकिन सालों बाद कोई उनके बारे में बात तक नहीं करता, जबकि सच्चा सिनेमा वक्त की कसौटी पर खरा उतरता है। बता दें, जैकी श्रॉफ की हाल ही में नई फिल्म 'द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो' (The Great Grand Superhero) रिलीज हुई है।
Updated on:
25 Aug 2026 02:48 pm
Published on:
25 Aug 2026 02:41 pm
