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सड़को और शहरों के बाद अब ‘BOLLYWOOD’ का नाम बदलना चाहते हैं पीएम मोदी के ये राजनेता

भारतीय जनता पार्टी के जनरल सेक्रेटरी कैलाश विजयवर्गीय ने मांग की है कि हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री को बॉलीवुड ना कहा जाए।
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Amit Kumar Singh

Jun 02, 2018

kailash vijayvargiya

kailash vijayvargiya

देश में सरकारों द्वारा सड़क से लेकर शहरों तक के नाम बदले जाते हैं।लेकिन अब बॉलीवुड इंडस्ट्री के नाम में बदलाव की बात की जा रही है। भारतीय जनता पार्टी के जनरल सेक्रेटरी कैलाश विजयवर्गीय ने मांग की है कि हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री को 'बॉलीवुड' ना कहा जाए। इसके लिए उन्होंने सूचना प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर को चिट्ठी भी लिखी है और फिल्म इंडस्ट्री के लिए 'बॉलीवुड' नाम पर रोक लगाने की मांग की है।

सुभाष घई का जिक्र
विजयवर्गीय ने इसको लेकर अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा है ''भारत के जाने-माने फिल्मकार सुभाष घई से भाजपा मुख्यालय में मुलाकात हुई। उन्होंने जानकारी दी कि मुंबई फिल्म जगत को बॉलीवुड कहना हॉलीवुड का नकल करना है। बीबीसी ने एक बार हिन्दी फिल्मों को हॉलीवुड की नकल बताते हुए बॉलीवुड कहा था। बीबीसी के हिन्दी फिल्मों के मजाक उड़ाने को ही हम लोगों ने अपना लिया।''

शुरू किया कैम्पेन
आपको बता दें कि विजयवर्गीय ने निर्माता सुभाष घई के साथ मिलकर सोशल मीडिया पर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को बॉलीवुड कहे जाने के खिलाफ एक कैंपेन भी शुरू कर दिया है. वे अपनी अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया अकांउट पर जमकर प्रचार प्रसार कर रहे हैं।

बॉलीवुड कहने पर रोक लगे
कैलाश विजयवर्गीय ने आगे कहा है, 'अब समय आ गया है कि हम बॉलीवुड कहना बंद करें और भारतीय फिल्म जगत को सम्मान दिलावाएं। दादा साहब फाल्के, सत्यजीत रे से लेकर अब तक भारतीय फिल्म जगत को कई फिल्मकारों ने समृद्ध बनाया है। फिल्म जगत से जुड़े सभी लोगों को बॉलीवुड कहने पर रोक लगाने की जरूरत है। मीडिया में भी बॉलीवुड कहने पर रोक लगनी चाहिए। यह भारतीयों के आत्मसम्मान का विषय है। हमारी फिल्मों की समृद्ध परम्परा के सम्मान का प्रश्न भी है।'

नाम में भारतीय भाषाओं को मिले जगह
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि बॉलीवुड, टॉलीवुड या ऐसे दूसरे नामों से बेहतर है कि हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री, भोजपुरी फिल्म इडंस्ट्री या तमिल फिल्म इंडस्ट्री ही कहा जाए।उन्होंने कहा, ''भारतीय फिल्मों की पुरानी कहानियों को छोड़ कर छोटे बजट की नई-नई फिल्मों ने बेहतर प्रदर्शन नए-नए कलाकारों को आगे बढ़ने का मौका दिया है। ऐसे में हमें अपनी मौलिकता को बढावा देने के लिए बॉलीवुड, टॉलीवडु, कॉलीवुड, मॉलीवुड से जैसे गुलामी के प्रतीक शब्दों से निजात पानी होगी। हम ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए, जिससे भारत की सभी भाषाओं और बोलियों की फिल्मों को प्रतिष्ठा मिले।

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