
मनोज बाजपेयी छोड़ना चाहते हैं एक्टिंग?
Manoj Bajpayee leaving acting career: बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन और संजीदा अभिनेताओं में शुमार मनोज बाजपेयी आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपनी बेमिसाल अदाकारी के दम पर सिनेमा जगत में एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जहां पहुंचने का सपना हर उभरता हुआ कलाकार देखता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि करोड़ों दिलों पर राज करने वाले और कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके मनोज बाजपेयी अब अंदर से जीवन की मोह-माया से ऊपर उठ चुके हैं? हाल ही में रणवीर इलाहाबादिया के मशहूर पॉडकास्ट शो में पहुंचे मनोज बाजपेयी ने अपनी निजी जिंदगी, करियर और सफलता के पीछे छिपे दुखों को लेकर कई ऐसे हैरान करने वाले खुलासे किए हैं, जिसने उनके फैंस को बेहद भावुक कर दिया है।
मनोज बाजपेयी ने एक इंटरव्यू में अपने दिल की बात शेयर की। इस दौरान उन्होंने बताया कि वह अब एक्टिंग को किसी मजबूरी की तरह नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा, "मैं आपको पूरी सच्चाई बताऊं, तो पिछले 10 साल से मेरे मन में बीच-बीच में यह ख्याल आता है कि मैं सब कुछ छोड़-छाड़ कर बैठ जाऊं। लेकिन तभी अचानक कोई ऐसा बेहतरीन किरदार मेरे सामने आ जाता है, जिसे निभाने का लालच मैं छोड़ नहीं पाता और फिर कैमरे के सामने चला जाता हूं। मैं सिर्फ घर चलाने या पैसे कमाने के लिए एक्टिंग नहीं करना चाहता।"
इसी बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी एक दबी हुई इच्छा भी जाहिर की। मनोज ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैं आपके शो में पहली बार यह स्वीकार कर रहा हूं कि आजकल मेरा मन बिल्कुल मसालेदार कमर्शियल फिल्में करने का हो रहा है। मेरा मन है कि मैं ऐसी 'नॉनसेंस' कॉमेडी फिल्में करूं, जिनमें गानों पर नाचूं और सुबह घर से बिना किसी तैयारी या कैरेक्टर रिसर्च के निकलूं और शाम को बिना कुछ सोचे काम खत्म करके वापस आ जाऊं।"
मनोज बाजपेयी ने बेहद भावुक अंदाज में स्वीकार किया कि आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसके लिए उन्होंने अपनी जिंदगी की सबसे कीमती चीज यानी अपने माता-पिता का साथ कुर्बान किया है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, "जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो पाता हूं कि इस दौलत-शोहरत को कमाने के फेर में मैंने बहुत कुछ खो दिया। मैं अपने पेरेंट्स के साथ कभी वक्त ही नहीं बिता पाया। शुरुआत में मैं बोर्डिंग स्कूल में रहा, फिर एक्टर बनने का सपना लेकर दिल्ली आ गया, जहां अंग्रेजी सीखने और रोटी का जुगाड़ करने में ही वक्त निकल गया। उस दौर में मां-बाप से सिर्फ कभी-कभार चिट्ठियों के जरिए ही बात हो पाती थी।"
उन्होंने आगे कहा, "जब सब कुछ हासिल हो जाता है, तब समझ आता है कि क्या इन भौतिक चीजों के लिए इतनी बड़ी कुर्बानी देना वाकई सही था? जब मेरे माता-पिता गुजरे, तब हम बस एक-दूसरे को ठीक से समझने की शुरुआत ही कर रहे थे। काश! मुझे अपने पिता के साथ थोड़ा और वक्त मिल जाता और मां के साथ जो कुछ मनमुटाव थे, उन्हें मैं बैठकर सुलझा पाता।"
मनोज ने जीवन के कड़वे सच पर बात करते हुए कहा कि जब माता-पिता चले जाते हैं, तब पुश्तैनी घर की दीवारें और उन पर टंगी तस्वीरें सिर्फ पुरानी यादें बनकर रह जाती हैं। उन्होंने दार्शनिक अंदाज में कहा, "अब मैं जब भी अपने गांव के घर जाता हूं, तो वहां ज्यादा देर नहीं ठहर पाता क्योंकि वहां अब खालीपन के अलावा कुछ नहीं है। सच तो यही है कि हम सभी लोग हर दिन अपनी मौत और अपनी अंतिम यात्रा की तरफ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं, इस सच को कोई बदल नहीं सकता।"
Updated on:
3 Jun 2026, 1:19 PM IST
Published on:
3 Jun 2026, 1:19 PM IST
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