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कभी ‘प्रधान जी’ तो कभी ‘चाचा चौधरी’, रघुबीर यादव ने यूं पूरे किए ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’, निजी जिंदगी में पत्नी ने लगाए धोखा देने के आरोप

Raghubir Yadav Birthday Special: पंचायत सीरीज के प्रधान जी रघुबीर यादव आज अपना 69वां जन्मदिन मना रहा है। 25 जून 1957 को उनका जन्म हुआ था। चलिए इस मौके पर उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ पहलुओं पर नजर डालते हैं।
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Raghubir Yadav Birthday Special

Raghubir Yadav Birthday Special (सोर्स- @IMDb)

Raghubir Yadav Birthday Special: वेब सीरीज 'पंचायत' ने भले ही रघुबीर यादव को नई पीढ़ी के बीच घर-घर पहचान दिलाई हो, लेकिन अभिनय की दुनिया में उनका सफर किसी एक किरदार तक सीमित नहीं रहा। रंगमंच से लेकर सिनेमा और टेलीविजन तक, रघुबीर यादव ने ऐसे कई किरदार निभाए हैं जो भारतीय दर्शकों की यादों का स्थायी हिस्सा बन चुके हैं। आज लोग उन्हें फुलेरा गांव के 'प्रधान जी' के रूप में जानते हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने जिस सफर को तय किया, वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।

फेल होने के डर ने बदल दी जिंदगी

मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले रघुबीर यादव का बचपन साधारण परिवार में बीता। परिवार चाहता था कि वो पढ़-लिखकर सुरक्षित करियर बनाएं। इसी सोच के चलते उन्होंने साइंस विषय चुना, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हो गया कि यह रास्ता उनके लिए नहीं है।

बोर्ड परीक्षा में असफल होने के डर ने उन्हें इतना परेशान कर दिया कि उन्होंने घर छोड़ने का फैसला कर लिया। एक दोस्त के साथ घर से निकलने के बाद उनका सफर उन्हें ललितपुर तक ले गया, जहां एक थिएटर कंपनी का प्रदर्शन चल रहा था। यहीं से उनके जीवन की नई शुरुआत हुई।

ढाई रुपये की नौकरी और भूखे पेट गुजरी रातें

थिएटर कंपनी में उन्हें रोजाना महज ढाई रुपये मेहनताना मिलता था। कई बार यह रकम भी पूरी नहीं मिलती थी। उन्हीं पैसों से आटा और टमाटर खरीदकर रोटी और चटनी बनती थी। कई ऐसी रातें भी आईं जब खाना किसी और ने खा लिया और उन्हें भूखे पेट सोना पड़ा।

हालांकि रघुबीर यादव कभी इन परिस्थितियों को संघर्ष नहीं मानते। उनका कहना है कि वही दिन उनके जीवन की सबसे बड़ी पाठशाला थे। थिएटर के दौरान उन्होंने अभिनय, संगीत, भाषा और संवाद अदायगी की बारीकियां सीखीं। इसी दौर में उन्होंने उर्दू सीखी और अपनी आवाज व उच्चारण पर काम किया।

रिश्तेदार के एक ताने ने 20 साल तक घर से रखा दूर

घर छोड़ने के कुछ महीने बाद वो वापस लौटे भी, लेकिन एक रिश्तेदार की टिप्पणी ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उस घटना के बाद उन्होंने दोबारा गांव छोड़ दिया और लगभग दो दशकों तक अपने घर नहीं लौटे।

जब उनकी फिल्म मैसी साहिब को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और उन्हें पुरस्कार प्राप्त हुए, तब जाकर वह सम्मान के साथ अपने गांव वापस लौट सके।

रंगमंच से लेकर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार तक

रघुबीर यादव केवल अभिनेता ही नहीं बल्कि गायक, संगीतकार और रंगकर्मी भी हैं। उन्होंने 70 से ज्यादा नाटकों में अभिनय किया है। उनकी कई फिल्में भारत की ओर से ऑस्कर के लिए आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में भेजी गईं। फिल्म मैसी साहिब में उनके शानदार अभिनय ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले।

ये हैं रघुबीर यादव के 11 सबसे यादगार किरदार

मुंगेरीलाल

'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' का भोला-भाला आम आदमी, जो सपनों में अपनी अधूरी इच्छाएं पूरी करता था। ये किरदार आज भी भारतीय टीवी इतिहास के सबसे लोकप्रिय किरदारों में गिना जाता है।

चाचा चौधरी

कॉमिक्स के मशहूर किरदार को पर्दे पर जीवंत करना आसान नहीं था, लेकिन रघुबीर यादव ने अपनी अदाकारी से इसे बच्चों का पसंदीदा बना दिया।

फ्रांसिस मैसी – मैसी साहिब

ब्रिटिश काल के एक क्लर्क की भूमिका में उन्होंने ऐसी छाप छोड़ी कि दुनिया भर के समीक्षकों ने उनकी तारीफ की।

चिलम – सलाम बॉम्बे

सड़क पर जिंदगी जीने वाले एक नशेड़ी युवक का किरदार उनकी अभिनय क्षमता का शानदार उदाहरण माना जाता है।

भूरा – लगान

आम ग्रामीण व्यक्ति के किरदार में उन्होंने हास्य और भावनाओं का अनोखा मिश्रण पेश किया।

बुद्धिया – पीपली लाइव

किसानों की बदहाली पर बनी इस फिल्म में उनका अभिनय बेहद प्रभावशाली रहा। फिल्म का लोकप्रिय गीत 'महंगाई डायन' भी उन्होंने ही गाया था।

करीम – फिराक

गुजरात दंगों की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में उनका गंभीर अभिनय दर्शकों को लंबे समय तक याद रहा।

एडॉल्फ हिटलर – गांधी टू हिटलर

विश्व इतिहास के सबसे चर्चित तानाशाह का किरदार निभाना बड़ी चुनौती थी, जिसे उन्होंने प्रभावशाली ढंग से निभाया।

लोकनाथ – न्यूटन

चुनावी प्रक्रिया के बीच व्यावहारिक सोच रखने वाले अधिकारी के रूप में उनका किरदार बेहद पसंद किया गया।

सुधाकर शर्मा – सुई धागा

कम स्क्रीन टाइम के बावजूद उन्होंने अपने अभिनय से फिल्म में गहरी छाप छोड़ी।

प्रधान पति – पंचायत

फुलेरा गांव के सहज, मजाकिया और व्यवहारिक प्रधान पति के रूप में उन्होंने जो लोकप्रियता हासिल की, उसने उन्हें नई पीढ़ी का चहेता अभिनेता बना दिया।

निजी जिंदगी भी रही सुर्खियों में

रघुबीर यादव की निजी जिंदगी भी कई बार चर्चा में रही। उनकी पहली पत्नी पूर्णिमा खरगा ने कुछ साल पहले उन पर विवाहेतर संबंधों के आरोप लगाए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तलाक के दौरान दोनों के बीच कानूनी विवाद भी सामने आए। हालांकि अभिनेता ने हमेशा अपने काम को प्राथमिकता दी और विवादों से दूरी बनाए रखी।

संघर्ष से सफलता तक की मिसाल

रघुबीर यादव की कहानी सिर्फ एक अभिनेता की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि ये उस व्यक्ति की कहानी है जिसने असफलता के डर को अपनी ताकत बना लिया। ढाई रुपये रोज कमाने वाला लड़का आज भारतीय अभिनय जगत के सबसे सम्मानित कलाकारों में गिना जाता है। यही वजह है कि चाहे मुंगेरीलाल हों, चाचा चौधरी हों या फिर पंचायत के प्रधान जी, हर किरदार में रघुबीर यादव की सादगी और अभिनय की गहराई साफ दिखाई देती है।

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