
Karni Sena Threat Amid Yadav Ji Ki Lovestory Row (सोर्स- एक्स)
Karni Sena Threat Amid Yadav Ji Ki Lovestory Row: उत्तर प्रदेश के संभल से एक बार फिर फिल्मों को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। हिंदूवादी संगठन क्षत्रीय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत ने उन फिल्म निर्माताओं को खुली चेतावनी दी है, जिन पर सनातन धर्म और समुदायों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया जा रहा है।
शनिवार रात चामुंडा मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मीडिया से बातचीत में शेखावत ने कहा कि अब सहनशीलता की सीमा खत्म हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ फिल्में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर धार्मिक प्रतीकों और समाज की परंपराओं को गलत तरीके से पेश कर रही हैं।
विवाद की जड़ में हाल ही में चर्चा में आई फिल्म 'यादव जी की लवस्टोरी' है, जो 27 फरवरी को रिलीज होने वाली है। फिल्म की कहानी को लेकर कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई है। आरोप है कि इसमें समुदाय विशेष की छवि को गलत ढंग से दिखाया गया है।
इस मामले में 18 फरवरी को संभल में फिल्म के निर्माता, निर्देशक और मुख्य कलाकारों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। कुछ भाजपा नेताओं ने भी फिल्म पर रोक लगाने की मांग की है। हालांकि, फिल्म निर्माताओं की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इसी कड़ी में हाल में रिलीज के लिए तैयार नेटफ्लिक्स सीरीज 'घूसखोर पंडित' भी विवादों में रही। याचिका दायर कर इसके शीर्षक को आपत्तिजनक बताया गया था। बाद में ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स ने अदालत को जानकारी दी कि फिल्म का नाम बदला जाएगा और प्रचार सामग्री वापस ली जाएगी।
बताया जाता है कि इस फिल्म में अभिनेता मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में हैं। शीर्षक बदलने के फैसले के बाद अदालत ने मामले को बंद कर दिया।
राज शेखावत ने सख्त लहजे में कहा कि अगर फिल्म निर्माता धार्मिक आस्थाओं का सम्मान नहीं करेंगे तो संगठन के कार्यकर्ता मुंबई जाकर उनके घरों तक पहुंचेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को तैयार रहने का निर्देश भी दिया।
शेखावत का दावा है कि पहले क्षत्रिय और ब्राह्मण समाज को निशाना बनाया गया और अब यादव समुदाय की भावनाओं को आहत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्मों से युवाओं को गलत संदेश जाता है और सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है।
करणी सेना प्रमुख ने 8 मार्च को दिल्ली में एक बड़े आंदोलन की घोषणा भी की है। उन्होंने बताया कि नए यूजीसी नियमों के विरोध में ‘स्वर्ण समाज समिति’ का गठन किया गया है और विभिन्न सांसदों से समर्थन जुटाया जा रहा है।
फिल्मों को लेकर बढ़ते विरोध ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि रचनात्मक स्वतंत्रता और धार्मिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। जहां एक ओर फिल्म निर्माता इसे अभिव्यक्ति का अधिकार बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई संगठन इसे आस्था पर चोट मान रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाता है।
Updated on:
22 Feb 2026 06:18 pm
Published on:
22 Feb 2026 06:16 pm
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