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महात्मा गांधी की हत्या में RSS का था रोल? संजय दत्त ने पोस्टर जारी करते हुए पूछे ‘आखिरी सवाल’

Sanjay Dutt Shares Akhiri Sawaal Posters: बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त ने हाल ही में अपनी अपकमिंग फिल्म आखिरी सवाल के कुछ पोस्टर्स शेयर किए हैं जिनमें उन्होंने कुछ गंभीर सवाल पूछे।

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Sanjay Dutt Shares Akhiri Sawaal Posters

Sanjay Dutt Shares Akhiri Sawaal Posters (सोर्स- एक्स)

Sanjay Dutt Shares Akhiri Sawaal Posters: बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त एक बार फिर अपनी नई फिल्म 'आखिरी सवाल' को लेकर चर्चा में आ गए हैं। इस फिल्म के हाल ही में जारी पोस्टर्स ने रिलीज से पहले ही सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। पोस्टर्स में देश के कुछ ऐतिहासिक और संवेदनशील घटनाक्रमों से जुड़े सवाल उठाए गए हैं, जिनमें महात्मा गांधी की हत्या, बाबरी मस्जिद डिमोलिशन और 'द इमरजेंसी' जैसे विषय शामिल हैं।

संजय दत्त ने जारी किए फिल्म के पोस्टर्स (Sanjay Dutt Shares Akhiri Sawaal Posters)

फिल्म के पोस्टर्स सामने आने के बाद दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। इन पोस्टर्स में ऐसे सवाल उठाए गए हैं, जो लंबे समय से सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं। यही वजह है कि फिल्म रिलीज से पहले ही चर्चा के केंद्र में आ गई है।

इतिहास से जुड़े सवालों पर आधारित कहानी

फिल्म ‘आखिरी सवाल’ की कहानी एक युवा शोधार्थी और उसके प्रोफेसर के बीच वैचारिक टकराव के इर्द-गिर्द घूमती है। इस कहानी में गुरु-शिष्य के रिश्ते के साथ-साथ पीढ़ियों के बीच सोच के अंतर को भी दर्शाया गया है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, यह टकराव एक बड़े सामाजिक और वैचारिक विमर्श का रूप ले लेता है।

इस फिल्म में संजय दत्त प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी के किरदार में नजर आएंगे, जबकि युवा अभिनेता Namashi Chakraborty एक छात्र विक्की की भूमिका निभा रहे हैं। दोनों के बीच का संघर्ष फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाता है और दर्शकों को कई गंभीर सवालों से रूबरू कराता है।

संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की कोशिश (Sanjay Dutt Shares Akhiri Sawaal Posters)

फिल्म के पोस्टर्स में देश के इतिहास से जुड़े ऐसे सवाल उठाए गए हैं, जो दशकों से चर्चा का विषय बने हुए हैं। खासतौर पर महात्मा गांधी की हत्या के बाद लगाए गए प्रतिबंध, बाबरी मस्जिद से जुड़ा विवाद और 1975 की इमरजेंसी जैसे मुद्दों को फिल्म की पृष्ठभूमि में शामिल किया गया है। यही वजह है कि फिल्म को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी दिलचस्पी बढ़ गई है।

निर्देशक और टीम भी चर्चा में

फिल्म का निर्देशन अभिजीत मोहन वरांग ने किया है, जिन्होंने इससे पहले मराठी फिल्म 'पिकासो' से निर्देशन की दुनिया में पहचान बनाई थी। इस फिल्म को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली थी।

फिल्म के निर्माण में निखिल नंदा, पुनीत नंदा और दूसरे निर्माताओं ने सहयोग किया है। वहीं फिल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले और संवाद उत्कर्ष निथानी ने लिखे हैं। संगीत की जिम्मेदारी मोंटी शर्मा ने संभाली है, जबकि गीतों के बोल कुमार विश्वास ने लिखे हैं।

रिलीज से पहले बढ़ी उत्सुकता

फिल्म का टीजर सामने आने के बाद दर्शकों के बीच इसकी कहानी को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है। खासतौर पर इतिहास से जुड़े सवालों को नए नजरिए से पेश करने की कोशिश दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच सकती है।

अब सभी की नजरें फिल्म की रिलीज पर टिकी हैं, क्योंकि ये फिल्म न सिर्फ मनोरंजन बल्कि विचार-विमर्श का भी एक बड़ा विषय बन सकती है।