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‘नाम की महिमा से ही काम हो जाता है’, Shekhar Suman ने राजा और 165 रानियों की कहानी सुनाकर साधा सियासी निशाना

Shekhar Suman latest statement: शेखर सुमन ने अपने बयान में कहा कि नाम की महिमा से ही काम हो जाता है, इस कहावत के माध्यम से उन्होंने राजशाही और सियासत की परतों को बखूबी उजागर किया।
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'नाम की महिमा से ही काम हो जाता है', Shekhar Suman ने राजा और 165 रानियों की कहानी सुनाकर साधा सियासी निशाना

Shekhar Suman (IMDb)

Shekhar Suman latest statement: एक्टर और टेलीविजन पर्सनैलिटी शेखर सुमन एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज को लेकर सुर्खियों में हैं। राजनीति और सत्ता के समीकरणों पर बात करते हुए उन्होंने एक व्यंग्यात्मक कहानी सुनाई, जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। अपने बयान में उन्होंने किसी व्यक्ति और दल पर सीधा आरोप लगाए बिना एक किस्से के जरिए मौजूदा राजनीतिक माहौल पर तंज कसा।

सांसदों और नेताओं की टूट-फूट और दल बदल

शेखर सुमन ने बताया कि अक्सर ये कहा जाता है कि सांसदों और नेताओं की टूट-फूट और दल बदल से कुछ राजनीतिक दलों का कोई लेना-देना नहीं होता। इसी मुद्दे में उन्होंने एक पुराने किस्से का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक राजा की 165 रानियां थीं। एक दिन दरबार में एक संदेशवाहक आया और राजा को सूचना दी कि उनकी 165वीं रानी ने पुत्र को जन्म दिया है। ये सुनकर राजा हैरान रह गया और बोला कि ये कैसे संभव है, क्योंकि वो कई सालों से उस रानी के पास गया ही नहीं था।

इसके बाद शेखर सुमन ने कहानी का पंच सुनाते हुए कहा कि दरबारी ने जवाब दिया, "महाराज, आपके नाम की महिमा ही इतनी है कि कई बार आपको जाने की जरूरत नहीं पड़ती, आपके नाम से ही काम हो जाता है।" इस व्यंग्यात्मक कमेंट के जरिए उन्होंने ये संकेत देने की कोशिश की कि कई बार राजनीतिक घटनाओं का श्रेय और जिम्मेदारी बिना प्रत्यक्ष भूमिका के भी किसी नाम से जोड़ दी जाती है।

शेखर सुमन ने बयान में खास पार्टी और नेता का नाम नहीं लिया

बता दें, शेखर सुमन ने अपने बयान में किसी खास पार्टी और नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी इस कहानी को मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे तीखा राजनीतिक व्यंग्य बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि हास्य के माध्यम से गंभीर मुद्दों पर चर्चा करना शेखर की पुरानी शैली रही है।

इससे पहले भी शेखर सुमन राजनीति में अपने छोटे से सफर का जिक्र कर चुके हैं। उनका कहना रहा है कि वो सकारात्मक बदलाव की सोच के साथ सार्वजनिक जीवन में आए थे, लेकिन समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि व्यवस्था में टिके रहना आसान नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि राजनीति केवल चुनाव और राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं होती, बल्कि हर क्षेत्र में पावर का बैलेंस और ग्रुप किसी-न-किसी रूप में मौजूद रहती है।