
बुलंदशहर। सीएम योगी के आदेश के बाद भी मजबूर मजदूरों का पैदल और साइकिल से लंबे सफर का क्रम आज भी जारी है। कोई साईकल से झारखंड के लिए निकला है तो कोई जम्मू से एमपी के लिए पैदल ही सड़क नाप रहा है। ऐसी ही झकझोर देने वाली तस्वीरें यूपी के बुलंदशहर से सामने आई हैं, जो सिस्टम के दावों को तो आईना दिखा ही रही हैं। साथ यह बताने के लिए भी काफी हैं कि हाकिम और हुक्मरान अंतिम कतार में खड़े बेबस आदमी के लिए कितना फ़िक्रमंद हैं।
पैदल और साइकिल से अपनी मंजिल की तरफ जाते प्रवासी मजदूरों में से किसी को झारखंड जाना है तो किसी को एमपी। सीएम योगी के आदेश की बात करें तो जिला बार्डरों पर आने वाले मजदूरों को बॉर्डर पर रोक कर खाना पानी की व्यवस्था कराई जाएगी और थर्मल स्क्रीनिंग के बाद प्रवासी मजदूरों को आश्रय स्थल पर रखा जाएगा। आश्रय स्थलों पर कुछ दिन बिताने के बाद मजदूरों को रोडवेज की बसों से उनके गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा। लेकिन यूपी के बुलंदशहर में ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है।
यहां बॉर्डर क्रॉस कर मजदूर अपनी मंजिल की तरफ निकल रहे हैं। हालांकि नोएडा बुलंदशहर बार्डर पर 11 बजे के बाद कुछ सख्ती जरूर देखने को मिली और मजदूरों को रोककर रोडवेज़ की बसों से आश्रय स्थलों की ओर ले जाया गया।साइकिल सवार मजदूर को अपनी एक साथी के साथ झारखंड जाना है। मजदूर का दावा है कि शासन प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं गई। हालांकि उन्हें रास्ते में कुछ खाने के लिए सामग्री जरूर मिली। वरुण कौल नामक व्यक्ति को आठ मजदूरों के साथ एमपी जाना गया। कौल 20 दिन पहले जम्मू से पैदल एमपी के लिए निकले थे। सरकारी मदद नहीं मिलने कौल और उनके साथी मजदूरों के मन मे शासन प्रशासन के प्रति टीस है।
वहीं रेहड़ी खींचते मजदूर का नाम दामोदर है। रेहड़ी पर दामोदर की पत्नी और तीन बेटे बैठे हुए हैं। रेहड़ी पर कई बैग भी रखे हुए दिखे। दामोदर धूप और लू की परवाह किये बगैर रेहड़ी पर सवार परिवार को अपनी मंजिल की तरफ दौड़ा रहा है, ताकि समय रहते वह अपने घर पहुंच जाए। आपको बता दें दामोदर की रेहड़ी की स्पीड जैसे ही कम होती है दामोदर का बड़ा बेटा रेहड़ी से उतरकर रेहड़ी में धक्का लगाना शुरू कर देता है। ताकि मेहनतकश पिता की परेशानी को किसी हद तक कम किया जा सके। वहीं रेहड़ी खींचते खींचते जब दामोदर का शरीर जवाब दे देता है तब दामोदर रेहडी को सड़क किनारे लगा पेड़ की छाव में परिवार के साथ आराम कर लेता है। यह सिलसिला पिछले 24 घण्टे से चल रहा है लेकिन मंजिल है की पास आती नहीं।
किसान दामोदर ने बताया कि वह परिवार के साथ नोएडा के गिझोर में बेलदारी का काम करता है। लॉक डाउन में खाने खर्चे की कमी पड़ी तो वह परिवार को लेकर दातागंज से आगे गढ़ियारग्नि के लिए निकल पड़ा। लालकुंआ गाज़ियाबाद में पुलिस ने रोका और सुबह तीन बजे जाने के लिए बोला। सुबह से चलते चलते बुलंदशहर तक पहुंच पाया हूँ। रास्ते मे खाना बनाया और एक जगह खाना मिल भी गया। बकौल दामोदर जब थक जाता हूँ तो बेटा भी कुछ देर के लिए ठेला खींच लेता है।
Updated on:
17 May 2020 04:30 pm
Published on:
17 May 2020 04:19 pm
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