
बूंदी. अन्नपूर्णा रसोई की दाल और सब्जि दोनो दिनों दिन पतले होते जा रहें है। दरअसल गरीब और बेसहाराओं की जगह अच्छे खासे सम्पन्न घरों के लोग, ड्राइवर और शहर से बाहर से आए सामान्य यात्री भी इस रसोई की कतार में खड़े देखे जा सकते है। यही वजह है कि खाने की मात्रा में तो कमी नही आ रही लेकिन गुणवत्ता पर असर जरूर पड़ रहा है।
बता दें कि गरीब एवं जरूरतमंद लोगो को सस्ती दर पर पौष्टिक खाना उपलब्ध कराए जाने के उद्वेश्य से राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा योजना आमजन की गलत मंशा के चलते औपचारिक बन कर रह गई। आमजन की गलत मंशा से तात्पर्य सामान्य और शहर के लोग महज लालच में रसोई तक पहुंचने लगे है। दरअसल गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति के हक पर सीधे तौर पर सेंध लगने का मामला बढ़ गया।
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यहां पर यह बताना जरूरी है कि शहर में पिछले पांच माह पूर्व जब अन्नपूर्णा रसोई आई तो आमजन में इसको लेकर एक कौतूहल सा माहौल रहा। टेस्टी भोजन नाश्ता के बाद मानो यहां कतार सी लगने लगी है। आलम यह है कि प्रतिदिन करीब 4500 व्यक्ति इस रसोई में भोजन करते है। जिसके चलते खाने में अब गुणवत्ता की कमी देखने को मिल रही है।
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शहर में करीब ऐसी पांच गाडिय़ा संचालित है। जो कॉलेज रोड, अस्पताल, धानमंडी, रानी जी की बावड़ी खड़ी हेाती हैै। पूर्व में तय मीनू के अनुसार इसमें भी कई तरह की वैरायटी शुमार थी लेकिन अब मांग बढऩे के बाद साप्ताहिक रूप से भोजन तय किया गया है।
इनके लिए है सुविधा-
शहरी क्षेत्रों में श्रमिकों, रिक्शा वालों, ठेल, ऑटो,कर्मचारियों,विद्यार्थियों, कामकाजी महिलाओं व बुजुर्गों एवं अन्य असहायों, को यह सुविधा मुहैया करवाई गई है।
- गुणवत्ता में कमी-
मजदुर कैलाश चंद ने बताया की योजना अच्छी है लेकिन गरीबो के अलावा अन्य लोग भी भोजन करने के लिए आ रहें है जिससे अब भोजन में गुणवत्ता की कमी आ रही है।
बिगडने लगी स्थिति-
शुरू में भोजन अच्छा मिलता था लेकिन अब इसकी गुणवत्ता में असर पडऩे लगा है। लंबी कतार में भोजन का इंतजार करना पड़ता है।
एक नजर-
- शहर में 7 नवम्बर को लागु की गई योजना-
- प्रति दिन 45 सौ व्यक्ति कर रहें है भोजन
- प्रति व्यक्ति पांच रूपए कूपन
- खाना कोटा से बनकर आता है।
-अन्नपूर्ण रसोई प्रति वेन में तीन कर्मचारी कार्यरत- जिसमें हैल्पर,ड्राइवर,होस्ट
Published on:
22 Mar 2018 03:05 pm
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