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नैनवां. न बिजली का इंतजार करना पड़ता और न ही नलकूपों से सिंचाई करनी पड़ती है। बटन दबाते ही फसलों की प्यास बुझाने के लिए फव्वारे छूटने लगते है। इसके संचालन पर कोई खर्च नहीं आता है। खेत में ही निकल रहे नाले पर बनाए फार्मपोण्ड से सिंचाई का पानी मिल जाता है और सौलर प्लांट की ऊर्जा से खेतों तक पानी पहुंचा रहा है। कृषि विभाग की योजनाओं के प्रति सकरात्मक समझ ही नैनवां उपखंड के रालड़ी गांव के किसान राजूलाल बैरवा के परिवार के लिए वरदान बन गई। बरसात कम होने से जहां आसपास के सभी जल्रसोत सूखे रह जाने से खेत पड़त पड़े हैं, वही राजूलाल का पचास बीघा के फार्म हाउस पर सरसों, चना व गेहूं की फसल लहलहा रही है।
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सफलता की कहानी
राजूलाल ने बताया कि पहले जिस वर्ष बरसात कम होती तो खेत पड़त रह जाते थे। पानी के जुगाड के लिए आधा दर्जन स्थानों पर नलकूप भी खुदवाए, लेकिन एक में भी पानी नहीं आया। सात वर्ष पहले जिले में आए सहायक कृषि अधिकारी गजानन्द यादव की सलाह पर खेत के पास से निकल रहे नाले पर 50 गुणा 50 वर्गमीटर का फार्मपोण्ड निर्माण कराया। बिजली की समस्या का भी खेत पर सौर ऊर्जा का प्लांट सेे समाधान हो गया। फार्मपोण्ड पर 12 लाख की लागत आई, जिसमें से साढ़े सात लाख का अनुदान मिला। सौलर प्लांट पर पांच लाख का खर्च आया जिसमें 8 6 प्रतिशत अनुदान मिल गया। बूंद-बूंद सिंचाई संयत्र पर भी 90 प्रतिशत अनुदान मिला। अब थोडी सी बरसात में ही फार्म पोण्ड लबालब हो जाता है। जिससे पूरे पचास बीघा भूमि की सिंचाई हो जाती है। उपज के सुरक्षित भण्डारण के लिए भण्डार कक्ष निर्माण कर रखा है। ईंट, सीमेंट व पत्थर की जगह भण्डार निर्माण के लिए बांस की फांसों का उपयोग किया।
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कृषि अधिकारी नैनवां के सहायक प्रहलाद सिंह ने बताया कि विभाग की योजनाओं के प्रति सकारात्मक सोच ने राजूलाल को प्रगतिशील किसान बना दिया। क्षेत्र के अन्य किसान भी ऐसी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
Published on:
01 Jan 2018 04:52 pm
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