केशवरायपाटन . उपखण्ड के ङ्क्षसचित क्षेत्र में जिन्सों का उत्पादन रेकॉर्ड तोड़ होता आया है। किसानों की इस पैदावार को उचित मूल्य पर खरीदने वाले नहीं होने से स्थानीय कृषि उपज मंडी में नहीं बेच कर अन्य मंडियों में जाना पड़ रहा है। यहां 12 माह सन्नाटा पसरा रहता है। समर्थन मूल्य खरीद केन्द्र के माध्यम से गेहूं खरीद के काम में मंडी आ रही है। खरीफ व रबी सीजन में किसानों को उपज कोटा व बूंदी मंडियों में बेचना पड़ रहा है। यहां मंडी में उपज की बोलियां लगाने की व्यवस्था नहीं है।राज्य सरकार की ओर से दुकानों पर खरीद का लाइसेंस जारी करने के निर्णय के बाद व्यापारियों ने अपनी दुकानों को मंडी बना रखा है यही स्थिति रही तो आने वाले समय में यहां मंडी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
किसानों का ठहराव नहीं
ङ्क्षसचित क्षेत्र के उपखंड मुख्यालय पर स्थित कृषि उपज मंडी में किसानों का ठहराव नहीं होने के पीछे किसानों को उचित दाम नहीं मिलना प्रमुख कारण है। धान उत्पादक क्षेत्र होने के बाद भी किसानों का धान खरीदने वाले व्यापारी नहीं है। किसानों को बूंदी मंडी में धान बेचने जाना पड़ता है। यहां के अधिकांश व्यापारी अपने दुकानों पर दस से 100 किलो तक जिन्स खरीद लेते हैं। क्षेत्र के किसान गेहूं समर्थन मूल्य खरीद केन्द्र पर बेचते हैं। लहसुन, चना, धनिया व अन्य जिन्सों के खरीदार कम हैं। किसानों ने बताया कि पांच दशक पहले यहां की मंडी की काफी पहचान थी, लेकिन धीरे-धीरे नाममात्र की मंडी बन कर रह गई। मंडी समिति ने इस बारे में रुचि दिखाना छोड़ दिया।
& कृषि उपज मंडी में किसान माल लेकर आते हैं, तब बोली लगा कर खरीद करते हैं। व्यापारियों ने बाहर खरीदने का लाइसेंस बनवा रखा है। सभी अपनी दुकानों पर खरीद इसी वजह से करते हैं। कोटा व बूंदी मंडी में किसानों का रुझान अधिक होने से माल बेचने वहां जाते हैं। सक्षम व्यापारियों का अभाव है, जिससे यहां मंडी में जिन्सों की आवक कम है।
हरिमोहन बैरवा, सचिव,कृषि उपज मंडी समिति केशवरायपाटन