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राजस्थान में धार्मिक महत्व की इस नदी का अस्तित्व खतरे में, दूषित पानी से श्रद्धालु इस तरह करने लगे हैं स्नान

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बूंदी

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Abdul Bari

Oct 23, 2018

 धार्मिक महत्व की इस नदी का अस्तित्व खतरे में

राजस्थान में धार्मिक महत्व की इस नदी का अस्तित्व खतरे में, दूषित पानी से श्रद्धालु इस तरह करने लगे हैं स्नान

बूंदी/केशवरायपाटन.
जनजन की आस्था की प्रतीक चर्मण्यवती (चम्बल नदी) का अस्तित्व अब संकट में पड़ता जा रहा है। शुद्ध जल वाली चम्बल का पानी अब मटमैला, दूषित व कीड़ायुक्त हो गया है। चम्बल में स्नान का धार्मिक महत्व है। देश व प्रदेश के विभिन्न भागों से यहां श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। अब चम्बल का पानी देखकर कई श्रद्धालु तो पानी के छीटें लगा कर ही स्नान की औपचारिता कर लेते हैं। केशव घाट से राजराजेश्वर महादेव मंदिर तक व ब्रह्म घाट तक गंदगी व काई जमा है। यहां नाक व मुंह बंद कर डुबकी लगानी पड़ती है। नियमित स्नान करने वालों की संख्या भी दिनों दिन कम होती जा रही है। यहां पहले सुबह से शाम तक चम्बल में डुबकी लगाने वाले से घाट भरे रहते थे। अब कम ही लोग नजर आते हैं।

गायब हो गए जलीय जीव
चम्बल नदी में पांच दशक पहले जलीय जीव जन्तुओं की भरमार थी। हजारों की संख्या में मछलियां, कछुआ, चातल थे। यहां का पानी कांच की तरह दमकता था। लेकिन समय के साथ चम्बल दूषित होती गई है। काफी मछलियों को तो कोटा से आने वाले मछुवारों ने समाप्त कर दिया और कछुओं व चातल की प्रजाति लुप्त हो गई है।


प्रदूषण के लिए आमजन भी जिम्मेदार
चम्बल नदी को दूषित करने में आमजन भी पीछे नहीं है। कस्बे व आसपास के गांवों के लोग यहां फूल मालाएं, कपड़े व अन्य सामग्री विसर्जित कर देते हैं। यह सामान किनारों पर तैरता रहता है। लगातार पानी में रहने से यह सड़ांध मारने लग जाता है।

इनका कहना है..
चम्बल नदी से समय-समय पर खांजी व गंदगी निकाली जाती है। पानी ठहरा होने से यहां गंदगी जमा हो जाती है। इस बारे में नगर पालिका बोर्ड की बैठक में चर्चा कर राज्य सरकार को चम्बल शुद्धिकरण के बारे में लिखा जाएगा।
मनोज मालव, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका