
@47.4...उफ अब तो जला रही गर्मी, तमतमाया सूरज सड़के बनी गर्म तवा
बूंदी. उफ इतनी गर्मी ऐसा लगता है जैसे आसमान से आग बरस रही है, सुबह के दस बजे ही सडक़े तपने लगी है। कहीं आना जाना मुश्किल हो रहा है,अप्रैल महीने से ही छोटीकाशी तपने लगी थी अब जब जून शुरू हुआ तो यह गर्मी जानलेवा बन गई। बढ़ती गर्मी को लेकर लोग परेशान हो रहें है।
इन दिनो पर्यटन नगरी का पारा 50 के पार पहुंच गया। गर्मी से बिल बिलाते लोगों की चिंता स्वभाविक भी है। गर्मी के बढ़ते पारे ने सभी का जीना मुहाल कर दिया है। मौसम विभाग का कहना है मौसम के मिजाज में अभी और परिवर्तन होगा।
लेकिन नौपता की शुरूआत से लेकर अब तक रिकोर्ड तोड़ पारा ने सभी के पसीने छूड़ा दिए। पिछले पांच सालो पर नजर डाले तो तापमान हर साल उछाल पर है। सूर्यदेव की तीखे तेवरों से लोगो को फिलहाल कोई राहत मिलती नजर नही आ रही।
वहीं गर्मी का असर मजदूर व गरीब वर्ग पर अधिक देखने को मिल रहा है। गर्मी से मुकाबले के लिए संपन्न वर्ग के पास कूलर और एसी है। वह वातानुकूलित गाडिय़ों में सफर कर रहा है। तो कहीं हिल स्टेशन पर छुट्टियां मनाने चला जाता है। लेकिन गरीब क्या करें? वह कैसे अपनी हिफाजत करें? दैनिक मजदूरों का कामकाज के लिए बाहर निकलना बेहद तकलीफ भरा हो गया है।
पानी की तलाश में शहर ही नही ग्रामीण ईलाकों में लोग मीलों भटक रहे हैं। नदियां और अन्य जलाशय सूख रहे हैं। गरीबों के लिए न शीतल पेय है, न प्राकृतिक वातानुकूलन के साधन। पेड़ों की सुलभ छांव को हमने विकास के नाम पर निगल लिया है। शहरों में रिक्शे वाले या मजदूरों के सुस्ताने के ठांव अब दिखाई नहीं देते।
पर्यावरण दिवस पर तेज गर्मी लोगो को एक बार फिर सीख दे रही है। ग्लोबल वार्मिग के खतरे से आगाह करते हुए लोगो को खुद से संकल्प लेते हुए हरियाली से दोस्ती करनी होगी।
Published on:
05 Jun 2018 08:28 pm
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