
बूंदी. मई की शुरुआत के साथ ही सूरज के तीखे तेवर ने लोगो को बेहाल कर दिया है। नौ तपा से पहले ही हाड़ोती तवे सी तप रही है। अंगारे बरसाती गर्मी के साथ उमस ने लोगों को परेशान कर दिया है। लोग अब रोहिणी के रौद्र रूप को लेकर घबरा रहें है।
25 मई से रोहिणी की शुरुआत होगी। लेकिन इस बीच भीषण गर्मी के अलावा बारिश के भी योग हैं। यानी रोहिणी गलेगी। ऐसे में लोगो के लिए यह राहत की खबर है। मौसम विशेषज्ञ भी नवतपा के दौरान बारिश की संभावनाएं जता रहे हैं। 25 मई को सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा। इसी के साथ रोहिणी की शुरुआत होगी। 8 जून को रोहिणी समाप्त होगी।
जब सूर्य पृथ्वी के सबसे निकट आ जाता है,तो इस कारण भीषण गर्मी पड़ती है। इस बार सूर्य 25 मई को रोहिणी नक्षत्र में दोपहर 14.21 बजे पर प्रवेश कर जाएगा, जो 8 जून तक रहेगा। जिस समय में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में होते हैं उस समय चन्द्र नौ नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं, यही कारण है कि इसे नौ तपा कहा जाता है। रोहिणी के दौरान अगर बारिश होती है, तो इसे आम भाषा में रोहिणी का गलना कहा जाता है। मान्यता है कि यदि रोहिणी नक्षत्र में बारिश हो जाती है तो आने वाले बारिश के मौसम में वर्षा बहुत कम होती है।
इस वर्ष रोहिणी का निवास वैश्य के घर में है। व्यापारिक वस्तुए और खाद्य पदार्थो में उतार चढ़ाव रहेगें। अराजकता नैतिकता, तथा महंगाई से आमजीवन अस्त व्यस्त रहेगा। राहिणी का फल संधी में है ओर वाहन अश्व बना है, ऐसे में गरीबो के लिए और खेल ओर संगीत से जुडे लोगो के लिए लाभदायक रहेगा।
प्राकृतिक आपदाओं की संभावना-
ज्योतिषाचार्य अमित शास्त्री ने बताया कि 1 मई से मंगल और केतु का संयोग बने होने और इन दोनों के साथ होने से प्राकृतिक आपदाओं की स्थितियां बनती हैं, जिससे भीषण गर्मी, आंधी-तूफान के साथ तेज हवा, आगजनी, दुर्घटनाएं व राजनीतिक उथल-पुथल की स्थितियां रहेगी। इस समय में भारतीय सीमाओं पर विरोधी गतिविधियां भी बढ़ेगी।
खान-पान का रखें खास ख्याल-
नौतपे के शुरूआती तीन दिनों में इन दिनों में पहनावे और खान-पान का खास ख्याल रखाना चाहिए। सूती कपड़े पहनें, अन्यथा त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं। खाने-पीने पर भी विशेष ध्यान रखें। यह समय सूर्य का पापाक्रांत समय होता है। इस दौरान पेट से संबंधी बीमारियों के होने की आशंका अधिक होती है। हल्का भोजन लें और पानी ज्यादा से ज्यादा पीएं। नौ-तपे के आखिरी तीन दिन वर्षा ऋतु की स्थिति स्पष्ट होगी। मौसम के हिसाब से होने वाली व्याधियों से बचने की जरूरत है।
ऐसे समझे रोहिणी नक्षत्र को-
रोहिणी नक्षत्र इस समय सूर्य की गर्मी प्राप्त करता है। यानि तपता है। राहिणी 27 नक्षत्रों में से 4 नंबर का नक्षत्र है। रोहिणी के स्वामी ग्रह चंद्र है ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार सूर्य में रोहिणी का प्रवेश काल 13-14 का दिन का होता है। यह नक्षत्र पृथ्वी से जल को खींचता है ओर वर्षा की व्यवस्था करता है। तेज गर्मी के कारण जलाशयों से पानी वाष्प बनकर उड़ता है बाद में बारिश होती है।
Published on:
21 May 2018 11:53 am
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