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रीट परीक्षार्थी जाते-जाते कह गए धन्यवाद बूंदी वालो, क्योंकि यहां हुआ कुछ ऐसा

जिलेभर में की परीक्षार्थियों की आवभगत, रात को रोका, भोजन भी कराया

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रीट परीक्षार्थी जाते-जाते कह गए धन्यवाद बूंदी वालो, क्योंकि यहां हुआ कुछ ऐसा

रीट परीक्षार्थी जाते-जाते कह गए धन्यवाद बूंदी वालो, क्योंकि यहां हुआ कुछ ऐसा

बूंदी. बूंदी शुरुआत से ही पावणों की मेहमान नवाजी में अलग पहचान रखती है। इसका एकबार फिर रीट परीक्षा में परिचय दिया। जब घर-घर रीट परीक्षार्थियों को रुकवाने और भोजन की व्यवस्था की गई। इस बंदोबस्त से प्रदेशभर से परीक्षा देने आए अभ्यर्थी भी अभिभूत हो उठे। जब लौटे तो कहते सुनाई पड़े ‘धन्यवाद बूंदी...’।

रीट परीक्षार्थियों की सेवा बूंदी शहर ही नहीं बल्कि गांव और कस्बों में भी तैयारी की गई थी। सामाजिक संगठन, समाजों, स्वयं सेवी संस्थाओं के साथ-साथ ग्रामीणों ने भी रीट परीक्षार्थियों को शरण दी। परीक्षार्थी शनिवार रात से आने लगे थे जो रविवार की शाम को लौटे। इस बीच सुबह नाश्ता, दोपहर का भोजन सब घर के माहौल में मिला। यही नहीं परीक्षा केंद्रों के आस-पास घरों और दुकानों में परीक्षार्थियों के बैग, मोबाइल फोन आदि को सुरक्षित रखने के लिए भी काउंटर लगे थे। कस्बों और गांवों में कई महिला अभ्यर्थी परीक्षा देने पहुंची, जिनके साथ मासूम बच्चे थे। जिन्हें भी ग्रामीण महिलाओं ने संभाला।
पूरा परिवार जुटा रहा
तालेड़ा में एडवोकेट हरीश गुप्ता का पूरा परिवार रीट परीक्षार्थियों की सेवा करता दिखा। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के बाहर हेल्पडेस्क बनाई। जिसमें एडवोकेट गुप्ता, बेटी अभिलाषा गुप्ता, छोटा भाई हेमंत गुप्ता आदि परीक्षार्थियों की मदद में जुटे रहे। यहां परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों के बैग आदि सुरक्षित रखे, जिनकी रखवाली की और जब लौटने लगे तो एक-एक को संभलाया। तीन सौ पैकेट भोजन के बांटे गए।
45 सौ भोजन पैकेट बांटे
सिलोर आदिनाथ दिगम्बर जैन शीलोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र समिति ने बूंदी में रीट परीक्षार्थियों के लिए 45 सौ भोजन पैकेट नि:शुल्क तैयार कराए। जिन्हें रविवार को अलग-अलग सेंटर पर बांटा गया। भोजन तैयार कराने के लिए रात को ही रसोई शुरू कर दी गई थी। समिति के अध्यक्ष टीकम जैन ने बताया कि संस्था से जुड़े लोग परीक्षार्थियों की सेवा में जुटे रहे। इस दौरान नरेन्द्र जैन, सुनील जैन, सुरेन्द्र जैन, सिंटू जैन, तरुण जैन, मनीष जैन, मुकेश जैन आदि मौजूद थे।
गलियों में खड़े थे, घर में सुला लिया
शहर के बीबनवां रोड पर देर रात आधा दर्जन परीक्षार्थी खड़े थे। परीक्षा केंद्रों के बारे में जानकारी जुटा रहे थे। तभी करीब ही रहते वाले सुरेन्द्र सिंह सोलंकी की नींद खुली और गलियों में घूम रहे युवकों से पूछताछ की। जब उनके रीट परीक्षार्थी होने की बात कही तो उन्हें घर में शरण दी। सुबह सभी को अपने निजी वाहनों से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया।

यों बोले परीक्षार्थी
बूंदी का नाम सुना था, दो दिन रुककर देखा तो जैसा सुना वैसे ही यहां के लोग मिले। हमें घर में रखा, जिसकी कल्पना भी नहीं थी।
सोनू सिंह, जोधपुर
जब जयपुर से निकले तो मन में भय था, कहां रुकेंगे और कैसे पहुंचेंगे। यहां सारी व्यवस्थाएं ऐसी मिली जो घर भी नहीं हो सकती।
सुनिता शर्मा, जयपुर
रीट परीक्षा की तीन साल से तैयारी कर रहा था। भीड़ अधिक होने की बात सुनकर एक बार तो नहीं आने का मन बना लिया था। अब आया तो यहां मेहमानों सा खाना मिला और पेपर भी अच्छा रहा।
मुकेश सैनी, जयपुर
खूब अच्छा अनुभव रहा। रात को रुकने की व्यवस्था होटल में थी। जिन्होंने कोई चार्ज नहीं लिया। भोजन भी नि:शुल्क रहा। सरकार ने आना और जाना भी फ्री कर दिया।
बदरुनिशा, अजमेर


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