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बाघों के प्राकृतिक कॉरिडोर में टाइगर रिजर्व के बीच हाइवे बना बाधक

बूंदी के निकट रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बीच में से होकर गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग-52 पर वन्यजीवों के लिए सुरक्षित अंडरपास या ओवरब्रिज नहीं होने से प्राकृतिक बाघ कॉरिडोर बाधित हो गया है।

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बूंदी

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pankaj joshi

Aug 31, 2025

बाघों के प्राकृतिक कॉरिडोर में टाइगर रिजर्व के बीच हाइवे बना बाधक

युवा बाघिन आरवीटी-8

बूंदी. गुढ़ानाथावतान. बूंदी के निकट रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बीच में से होकर गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग-52 पर वन्यजीवों के लिए सुरक्षित अंडरपास या ओवरब्रिज नहीं होने से प्राकृतिक बाघ कॉरिडोर बाधित हो गया है। युवा बाघिन आरवीटी-8 करीब एक सप्ताह से टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से निकलकर कालदां बफर जोन में जाने के लिए सड़क पार नहीं कर पा रही है। बाघिन का मूवमेंट लगातार सड़क किनारे व शहर के पास होने से वन विभाग नियमित निगरानी में जुटा हुआ है। बाघिन पिछले दो दिन से गढ़ पैलेस में रानी जी के महल के आस-पास बनी रही। बाघिन अपनी टेरेटरी की तलाश में है तथा एक माह से लगातार मूवमेंट कर रही है। बाघिन का मूवमेंट विगत 20 दिनों से बूंदी शहर के पास के बफर जोन के जंगलों में बना हुआ है।

बनने थे 5 अंडरपास, एक भी नहीं बना
राष्ट्रीय राजमार्ग-52 के निर्माण के दौरान रामगढ़ विषधारी वन्यजीव अभयारण्य व कालदां वन क्षेत्र को जोड़ने वाले 3 किलोमीटर वन क्षेत्र में तालाब गांव से फुलसागर रोड़ तक 5 अंडरपास प्रस्तावित किए गए थे, लेकिन विभागीय सामंजस्य के अभाव में नहीं बन पाए। टाइगर रिजर्व बनने के बाद बाघों सहित अन्य वन्यजीवों की संख्या बढ़ने से इस व्यस्त राजमार्ग पर वन्यजीवों की आवाजाही बाधित हो गई है।

नियमित मॉनिटरिंग
बाघिन की शहर व हाइवे किनारे मौजूदगी से वन विभाग सतर्क होकर 24 घण्टे मोनिटरिंग में जुटा हुआ है। किसी भी विपरीत परिस्थिति के लिए बाघिन को ट्रेंकुलाइज करने या अन्य चिकित्सकीय सहायता के लिए पशु चिकित्सकों की टीम को भी अलर्ट मोड़ पर रखा गया है। हालांकि उम्मीद है कि बाघिन बारिश रुकने के साथ ही रात्रि के समय वापस रामगढ़ की तरफ लौट जाएगी या रोड पार कर कालदां के जंगलों में अपनी टेरेटरी बनाने के लिए निकल सकती है।

इनका कहना है
बाघिन का मूवमेंट टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बूंदी के निकट पहाड़ी पर है और टीमें नियमित निगरानी कर रही हैं। बाघिन के लिए यह नया इलाका है, जिससे आबादी के निकट भी आ सकती है इसलिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
देवेंद्र सिंह भाटी, उपवन संरक्षक एवं उपक्षेत्र निदेशक (कोर एवं बफर जोन) रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व, बूंदी