बुरहानपुर के किसान विदेश में केला निर्यात की करेंगे तैयारी

रंग, स्वाद, साइज और रेंज पर ध्यान देंगे, अब तक भारत में निर्यात में चौथे नंबर पर
- निमाड़ में सबसे अधिक बुरहानपुर में उत्पादन है केले का
- केला विशेषज्ञ ने बताई केला उत्पादन की विधि

By: ranjeet pardeshi

Published: 18 Feb 2020, 06:01 AM IST

बुरहानपुर. केला उत्पादक किसान अब विदेश में भी अपना केला निर्यात के लिए बेहतर तैयारी कर सकेंगे। अब तक यूरोपियन देशों में पिछडऩे का मुख्य कारण केले का रंग, स्वाद, साइज और रेंज पर ध्यान न देना था। भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र के संचालक ने केला उत्पादन की पूरी विधि बताई। कहा कि दुनिया में हमारे यहां का केला सबसे ज्यादा मीठा है, लेकिन हम रंग, साइज में पिछड़ रहे। इसलिए भारत विदेश में केला निर्यात में चौथे नंबर है। केवल ५ प्रतिशत केला हम बाहर भिजवा रहे हैं, बाकी ९५ प्रतिशत खपत केवल भारत में हो रही है।
रविवार को कृषि उपज मंडी के केला नीलामी सभागृह में आयोजित किसान पाठशाला में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संचालक व विक्रय व निर्यात में विशेषज्ञ सगर कोपरडीकर ने कहा कि दुनिया में कही भी घूमो यूरोपियन देशों में अच्छा दाम मिलता है। सबसे बड़ा मार्केट खाड़ी देशों का है। दुनिया में जितना उत्पादन हो रहा है। उसकी ४० प्रतिशत खपत केवल भारत में ही है। जबकि भारत का उत्पादित केला की ९५ प्रतिशत खपत यही पर है। विदेशों में सबसे अधिक खपत करने वाले देशों में फिलिपिंस, इक्वोलेन, वियतनामा फिर चौथे पर इंडिया है क्वांटिटी के हिसाब से। हमारे यहां कंटेनर से केल जाता है और यह देश सीधे शिप से भरते हंै।
गुणवत्ता के कारण हम पीछे
सागर कोपरडीकर ने कहा कि हमारे यहां लागत कम है, खर्च कम है, फिर भी निर्यात में हम पीछे हैं। हमारे यहां एक किलो केला पकाने के लिए ३ रुपए २० पैसा, फिलिपिंस में १९ रुपए १२ पैसा में लग रहा है। सबसे सस्ता कौन है हम है, एक्सपोर्ट की संभावना हमारी होना चाहिए फिर भी हम पीछे हैं। क्योंकि हम गुणवत्ता में बहुत पीछे हैं। हमारा कंटेनर १२ लाख का बिकता है, फिलिपिंस का २२ लाख में जाता है। क्योंकि हमारे केले में दाग रहता है, उनके केले में नाखून बराबर भी दाग नहीं होता। हमारे लिए एक्सपोर्ट एक सपना है लेकिन यह सपना जीना चालू कर दिया तो आपके पास एक एक्सपोर्टर आता है तो घरेलू के १०० व्यापरियों की नजर आप पर आ जाती है। बुरहानपुर मंडी भाव ८ रुपए और एक्सपोर्टर १२ निकालता हैं। कोपरडीकर ने कहा कि भारत वर्ष में बदलाव आया है। खर्च की केपेसिटी बढ़ गई है। पैसे ज्यादा देने को तïैयार है लेकिन क्वालिटी वाला चाहिए। एक्सपोर्ट क्वालिटी की तरफ जाए तो आपकी चीज भी बिकना शुरू हो जाएगी।
यह बताए खेती के गुर
बलराम किसान पाठशाला के बलराम जाट ने बताया कि बुरहानपुर में ५० साल से केले का उत्पादन हो रहा है। लेकिन यहां कभी साइज, रेंज पर ध्यान नहीं दिया। इसके पीछे केला लगाने की विधि गलत है। सही तरह से केला लगाने की विधि बताई। बुरहानपुर में केले की खेती नाली वाली पद्धति से ७० किसान खेती कर रहे हैं। बताया कि बेड वाली खेती करने का तरीका बताया। ७ बाय पांच फीट का बेड बनाकर पेड़ लगाना है। हर छह माह में एक नई फसल मिलती है किसानों को। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ एवं प्रगतिशील किसान संगठन के शिवकुमारसिंह कुशवाह ने कहा कि इससे हम सब किसानों का खर्च निश्चित आधा होगा और आर्थिक लाभ भी बढ़ेगा। प्रगतिशील किसान संगठन के अध्यक्ष रघुनाथ पाटिल, सतीश पटेल, मुकेश बंगाल, सुभाष पाटिल, प्रकाश पाटिल, दीपक पाटिल, कमलेश पाटील आदि मौजूद थे।
केला फसल स्थिति एक नजर में.........
२४ हजार हेक्टेयर केला फसल का क्षेत्रफल निमाड़ में
१४ हजार हेक्टेयर बुरहानपुर में
७० हजार लोग केला फसल से जुड़े हुए
१० टन केला रोजाना की खपत
बीयू१७०१ : जानकारी देते केला विशेषज्ञ सागर कोपरडीकर।
बीयू१७०२ : किसान पाठशाला में मौजूद किसान।

ranjeet pardeshi Bureau Incharge
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