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school- केंद्रीय विद्यालय में इस साल नहीं दिया जाएगा पहली और 11वीं में प्रवेश

एक साल में दूसरा स्कूल बंद होने की कगार परप्रशासन एवं जनप्रतिनिधि नहीं कर रहे पहलकेंद्रीय विद्यालय भवन जर्जर, पालक चिंतित
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Kendriya Vidyalaya

बुरहानपुर. केंद्रीय विद्यालय नेपानगर में सत्र 2020-21 में कक्षा पहली और 11वीं में छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। गुरुवार को स्कूल परिसर के नोटिस बोर्ड पर उक्त सूचना चस्पा होने के बाद नगर में हड़कंप मच गया। स्कूल भवन की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण केंद्रीय विद्यालय संगठन के उपायुक्त सोमित श्रीवास्तव के आदेश पर प्राचार्य एके सिंह ने जानकारी दी है। पालक इसको लेकर चिंता में पड़ गए हैं। बता दें कि नगर में शासकीय स्कूल बंद होने का यह दूसरा मामला है। इसके पहले नेपा लिमिटेड की ओर संचालित उमा शाला को भी पिछले सत्र से बंद किया जा चुका है।

जानकारी के अनुसार भवन कई जगहों से जर्जर हो चुका है। पिछले कई वर्षों से इसकी मरम्मत नहीं हो पाई है। इसके चलते भवन की स्थिति अब उपयोग के योग्य नहीं है। पिछले कु छ दिनों से जर्जर भवन में ही कक्षाएं लगाई जा रही थीं, लेकिन इससे बच्चों के साथ-साथ स्टॉफ की सुरक्षा को भी खतरा हो रहा है। इसको देखते हुए संगठन ने कलेक्टर को पत्र लिखकर उक्त मामले की सूचना दी। संगठन की ओर से कई दिनों से मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन से पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन अधिकारियों की रुचि नहीं होने से कार्य को गति नहीं मिल पाई है।

संगठन की मांगों पर भी नहीं दिया ध्यान
नगर में नवीन विद्यालय भवन बनाने की स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन अब तक निर्माण स्थल का चयन नहीं हो पाया है। उचित जगह नहीं मिल पाने के कारण कई बार संगठन के पदाधिकारी भूमि देखकर वापस लौट चुके हैं।
स्कूल का पुराना भवन लंबे समय से जर्जर हो चुका है। नेपा लिमिटेड के द्वारा इसकी रिपेयरिंग नहीं कराए जाने से दो साल पहले 55 लाख और इस साल 1 करोड़ 14 लाख का एस्टीमेट दिया। उक्त राशि नहीं दिए जाने के अभाव में प्रवेश बंद किए जा रहे हैं।

संगठन ने अंतिम शर्त यह भी रखी है कि जिस जगह पर स्कूल संचालित हो रहा है, उस भूमि को 99 साल की लीज पर संगठन को दिए जाने पर संगठन खुद ही उसकी मरम्मत का खर्च उठा सकता है, लेकिन नेपा लिमिटेड ने मात्र वर्ष 2032 तक लीज दिए जाने के दस्तावेज पहुंचाए गए, जिसे सगंठन ने वापस कर दिया है। जब तक नया भवन का निर्माण नहीं होता। तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में भवन दिए जाना चाहिए। संगठन कम कमरे होने पर दो पारी में भी स्कूल चलाने के लिए तैयार है।

आगे क्या
संगठन हर साल 1-1 कर कक्षाओं को बंद करेगा। ऐसा करने से स्कूल में बच्चों की संख्या भी कम होती जाएगी। एक समय बाद संख्या बेहद कम हो जाएगी। ऐसे में स्कूल चलाने के लिए भी बच्चे नहीं बचेंगे। इसे रोकने के लिए प्रशासन को संगठन को स्थाई भूमि दिलाने के लिए रुची दिखानी होगी। वर्तमान भवन की मरम्मत करने या फिर कुछ दिनों के लिए भवन की व्यवस्था करनी होगी। इससे स्कूल को यहां पर संचालित किया जा सके।

जनप्रतिनिधि बोले जानकारी लेते हैं
आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है। इस संबंध में अब तक कोई सूचना नही मिली है। कलेक्टर से चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
विधायक सुमित्रा कास्डेकर

कलेक्टर बोले हमारा हस्तक्षेप नहीं
केंद्रीय विद्यालय के मामले में हमारा कोई हस्तक्षेप नहीं है। ज्यादा से ज्यादा हम इसको लेकर संगठन से पत्राचार ही कर सकते हैं। नगर में भवन की भी व्यवस्था नहीं है।
- राजेश कौल, कलेक्टर

उपायुक्त बोले स्थानीय प्रशासन को करनी होगी पहल
स्थानीय प्रशासन को उचित कार्रवाई के लिए पहल करनी होगी। अधिकारियों के मार्गदर्शन में जगह मिल जाए तो कक्षाओं में प्रवेश लिए जा सकते हैं। भवन जर्जर होने की स्थिति में शिक्षा से ज्यादा सुरक्षा जरूरी है। ऐसे में यहां कक्षाएं संचालित नहीं हो पाएंगी।
- सोमित श्रीवास्तव, उपायुक्त केंद्रीय विद्यालय संगठन भोपाल