जिला अस्पताल में नहीं है नेत्र रोग विशेषज्ञ, जाना पड़ता है दूसरे शहर

जिला अस्पताल में नहीं है नेत्र रोग विशेषज्ञ, जाना पड़ता है दूसरे शहर

Rahul Singh | Publish: Jan, 15 2019 01:25:33 AM (IST) Burhanpur, Burhanpur, Madhya Pradesh, India

सहित पर्याप्त संसाधन के अभाव में नहीं हो पा रही आंखों की जांच

बुरहानपुर. जिले की करीब 8 लाख की आबादी वाले जिले के अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञों सहित पर्याप्त संसाधन भी नहीं हैं। इस कारण नेत्र रोग व मोतियाबिंद जांच शिविर तक नहीं लग पा रहे हैं और मृत्यु के बाद नेत्रदान नहीं हो पा रहा है। आंख संबंधी जांच के लिए निजी डॉक्टरों को मोटी फीस देनी पड़ रही है या जलगांव, इंदौर जाना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ भी नहीं है। हर हफ्ते दूसरे शहरों से विशेषज्ञ यहां आकर मरीजों को लूट रहे हैें।
लालबाग रोड स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी नेत्र अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर्स नहीं होने से ऑपरेशन बंद हो गए हैं। पहले यहां पर बड़ी संख्या में मोतियाबिंद के ऑपरेशन नि:शुल्क होते थें। गंभीर मरीजों की जांच जिले में होती है, शासकीय अस्पताल में पदस्थ रहे नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रिटायर्ड होने के बाद अब तक यहां पर नए डॉक्टर्स नियुक्त नहीं हो पाए हैं। जिला अस्पताल में नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ सालों से नहीं है। इसका फायदा दूसरे शहर के डॉक्टर मोटी फीस व महंगी दवाओं के रुप में महानगरों के डॉक्टर उठा रहे हैं। शहर में निजी डॉक्टर चैंबर चल रहे हैं। शहर की मेडिकल स्टोर्स संचालक दूसरे शहरों से विभिन्न रोग विशेषज्ञों को सप्ताह में एक दिन बुलाते हैं लेकिन ऐसे बाहरी विशेषज्ञों में से ज्यादातर का सीएमएचओ दफ्तर में डिग्री संबंधी कोई रिकार्ड नहीं है। ऐसे में किसी प्रकार की अनहोनी होने पर किसी की जिम्मेदारी तय करने, क्षतिपूर्ति या कार्रवाई में भी पेंच फंसना तय है।
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर्स के पद खाली
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर्स के पद मंजूर हैं लेकिन इसमें से कई पद वर्षाे से खाली हैं। जिसमें शिशु रोग विशेषज्ञ, अस्थि रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट विशेषज्ञ, पैथोलॉजिस्ट, नाक-कान, गला लोग विशेषज्ञ, दंत रोग व क्षय रोग, नेत्र रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद खाली हैं। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रो में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी डॉक्टर्स और स्टॅाफ के पद रिक्त पड़े हुए हैं। नेपानगर, शाहपुर, खकनार और धुलकोट सहित अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रो पर भी विशेषज्ञों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन सभी पद खाली हैं। इस कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रैफर सेंटर बने हुए हैं।
साल भर मेें होने लगा क्षतिग्रस्त
करोड़ों की लागत से बना वर्षों की गारंटी वाला जिला अस्पताल का चमचमाता परिसर बमुश्किल एक साल में ही क्षतिग्रस्त होने लगा है। यहां-वहां से कभी छत तो कभी दरवाजे दरकने लगे है। हाल ही में इसके मुख्य प्रवेश के उपर छत का एक बड़ा हिस्सा टूट कर आ गिरा। ऐसे में इसकी वर्षों की गारंटी पर सवालिया निशान लगने लगे है।
कर्मचारी की नियुक्ति पर मचा बवाल
जिला अस्पताल के रोगी कल्याण समिति के कर्मचारियों ने एक बाहरी व्यक्ति को चालक के पद पर नियुक्त किए जाने का विरोध जताया। इस मामले को लेकर वे सीविल सर्जन डॉ.शकिल एहमद के सामने कर्मचारियों ने वेतन संबंधी समस्या रखते हुए इन नई नियुक्त पर आक्रोश जताया। नियुक्ति के बाद अकरम नामक इस व्यक्ति का नाम भी बोर्ड पर चढ़ा दिया गया। इस मामले में सीविल सर्जन डॉ.शकिल ने अनभिज्ञता जाहिर की। विरोध करने वाले कर्मचारियों का कहना हैकि हमें एक तरफतो बीते दो माह से वेतन नहीं दिया जा रहा हैऔर दूसरी ओर नई नियुक्ति की जा रही है। फिलहाल रोगी कल्याण समिति के तहत १० कर्मचारी पदस्थ है और ६ ठेका पर काम कर रहे है। सीविल सर्जन ने मामले की जांच करने का भरोसा दिलाया है।

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