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आदिवासी विभाग में नियम विरुद्ध लाखों रुपए की सामान खरीदी

- सूचना के अधिकार में सामने आया सच- कांग्रेस ने प्रेसवार्ता लेकर उठाया मामला
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In the Tribal Department, the purchase of goods worth millions of rupees

In the Tribal Department, the purchase of goods worth millions of rupees

बुरहानपुर. आदिवासी विकास विभाग के छात्रावासों और आश्रमों में नियम विरुद्ध खरीदी का मामला सामने आया है। यह लगभग ५० लाख से अधिक की खरीदी की जा चुकी है। पूरा मामला सूचना के अधिकार में सामने आया। जहां शनिवार को कांग्रेस ने प्रेसवार्ता लेकर इसे उजागर किया। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि इस मुद्दे को लेकर आंदोलन किया जाएगा।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष अजय रघुवंशी ने कहा कि बच्चों के उत्थान के लिए चलाए जा रहे छात्रावासों में मनमानी कर अधीक्षकों ने लाखों रुपए की सामग्री नियम विरुद्ध खरीद ली है। यह भ्रष्टाचार कलेक्टर द्वारा जांच के आदेश देने के बाद जब टीम ने जांच की तो वित्तीय अनियमितताएं सूचना के अधिकार में सामने आईं। बड़ी बात तो यह भी है कि संबंधित अधीक्षकों के विरुद्ध इस मामले को लेकर संबधित अलग-अलग थानों में एफआईआर की मांग भी की गई है। लेकिन इसके बाद घबराए अधीक्षक शिकायतकर्ता के विरुद्ध लामबंद हो गए और एसपी के पास पहुंच गए और यह आरोप लगाया कि हम पर मानसिक रूप से प्रताडि़त किया जा रहा है।
यहां सामने आया मामला
जिला कांग्रेस अध्यक्ष अजय रघुवंशी ने बताया कि दाहिंदा-शेखपुरा कन्या छात्रावास में लघु उद्योग निगम के नाम से फर्जी आदेश बनाकर खंडवा के हजारीलाल जोहरमल से सामान खरीदा गया। यहां पर पलंग जिसकी राशि आदेश में ३०७५ प्रति नग बताया है। जबकि इसका बिल ३१०७ रुपए प्रति नग के हिसाब से निकला है। स्टूडेंट्स डेस्क बेंच १०१७ प्रति नग बताकर २०९० रुपए प्रति नग के हिसाब से खरीदा गया। इसी प्रकार रैक का २८२५ रुपए प्रति नग से आदेश दिया और ५०८५ के हिसाब से बिल दिया गया। दवाटिया कन्या आश्रम में भी १५-१६ और १७-१८ में नियम विरुद्ध तरीके से लघु उद्योग निगम का आदेश निकालकर यहां पर पलंग ३०७५ का बताकर इसका बिल ३१०७ रुपए में पलंग खरीद लिए गए। वहीं दाहिंदा आश्रम में भी सामग्री क्रय की गई एवं सीवल में भी गलत तरीके से आदेश बनाकर सामग्री क्रय की गई। जिससे शासन के वेट टैक्स में लाखों रुपए चूना लगाया गया। इन चारों मामलों में नेपानगर, खकनार और निंबोला थाने में शिकायत कर अधीक्षक के विरुद्ध एफआईआर की मांग की गई। रघुवंशी ने बताया कि इन मामलों को लेकर २ जनवरी १८ में कांग्रेस नेता श्याम बन्नातवाला ने जनसुनवाई में भी कलेक्टर के पास भ्रष्टाचार होने की शिकायत की। लेकिन वहां पर भी विभाग द्वारा झूठी जानकारी देकर यह कह गया कि हमारे द्वारा जो ऋुटियां थी उसे सही कर ली गई है, जबकि भ्रष्टाचार सही नहीं हो सकता।
इन छात्रावासों में जांच करने पर यह पाया गया
जब तत्कालीन कलेक्टर द्वारा छात्रावासों की लगातार शिकायत आई तो जांच दल बनाया गया। जिन्होंने कई अनियमितताएं उजागर की। इसके प्रतिवेदन की कॉपी सूचना के अधिकार में सामने आई। आदिवासी बालक छात्रावास अंबाड़ा में गैस, आरओ वाटर कूलर, डाइनिंग टेबल, स्टूल, पलंग, गद्दे, थाली गिलास खरीदे गए। किसी भी क्रय सामग्री का कार्यालय छात्रावास में लिखित आदेश नहीं दिया गया। न ही सामग्री के ऑनलाइन ऑडर किए गए। यहां तक २० हजार के ऊपर के क्रय सामग्री के कोटेशन भी नहीं मंगवाए गए। सीधे की मौखिक आदेश पर चेक से भुगतान किया गया, जो कि नियम विरुद्ध है। सभी सामान क्वालिटी इंटरप्राइजेस खंडवा और हजारीलाल जवाहरलाल जैन से क्रय किया गया।
बालक आदिवासी आश्रम शाला पांगरी में जांच करने पर स्टॉक पंजी में प्रविष्टियां अपूर्ण पाईगई। सामग्री क्रय करने का क्रय आदेश तक प्राप्त नहीं किया। यहां तक फ्रिज खरीदी में भी भ्रष्टाचार कर लिया गया। प्रस्तुत रिपोर्ट में अफसरों ने यह भी बताया कि सामग्री के भौतिक सत्यापन के दौरान फ्रिज ३ मार्च१७ को खरीदना बताया, जबकि फ्रिज पुराना लग रहा था।
आदिवासी आश्रम कन्या चांदनी में जांच करने पर यहां साढ़े तीन लाख रुपए की खरीदी मौखिक आदेश पर कर ली गई, जो की नियम विरुद्ध है। इस राशि में गैस कनेक्शन, भट्टी, वाटर कूलर, खेल एवं किचन सामग्री खरीदी गई। गैस कनेक्शन को छोड़कर किसी भी सामग्री का कोटेशन तक नहीं बुलाए गए।
- मामला पुराना है, इसकी शिकायत अभी हमारे पास नहीं आई है। लेकिन ऐसा हैं, तो इसकी जांच कर कार्रवाई करेंगे। - सतेंद्रसिंह कलेक्टर