
Adani Group के शेयरों में तेजी देखी जा रही है। (PC: AI)
Gautam Adani Court Case: अमेरिकी कोर्ट के फैसले से अडानी ग्रुप के शेयरों को मंगलवार को तेजी देखने को मिली। गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रहे आपराधिक मामले को खारिज करने की मंजूरी मिलने के बाद अडानी ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में 3% तक की तेजी देखने को मिली। बाजार में इस फैसले को निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा गया।
अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 3% चढ़कर 3,080 रुपये पर पहुंच गया। अडानी पावर में करीब 2% की तेजी दिखी और शेयर 214 रुपये पर पहुंचा। अडानी पोर्ट्स का शेयर 1% से ज्यादा बढ़कर 1,704 रुपये पर पहुंच गया। वहीं, अडानी ग्रीन एनर्जी में 3% से ज्यादा की तेजी आई और शेयर 1,416 रुपये पर पहुंच गया। अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस और अडानी टोटल गैस में भी करीब 3% तक की बढ़त देखने को मिली।
ब्रुकलिन की अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गाराउफिस ने अमेरिकी संघीय अभियोजकों की उस मांग को मंजूरी दे दी, जिसमें गौतम अडानी के खिलाफ आपराधिक मामला खत्म करने की अपील की गई थी। कोर्ट ने इस फैसले से पहले यह भी जांचा कि आखिर न्याय विभाग ने केस वापस लेने का फैसला क्यों किया। खास तौर पर नवंबर 2024 में अडानी की ओर से अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा को लेकर सवाल उठे थे। कोर्ट यह देखना चाहता था कि कहीं इस निवेश प्रस्ताव का केस खत्म करने के फैसले पर कोई असर तो नहीं पड़ा।
जज गाराउफिस ने कहा कि उन्हें इस बात का भरोसा है कि अमेरिका में निवेश करने की अडानी की घोषणा ने न्याय विभाग के फैसले को प्रभावित नहीं किया। हालांकि, जज ने न्याय विभाग के प्रिंसिपल एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल ट्रेंट मैककॉट्टर की भूमिका पर सवाल जरूर उठाए। उन्होंने कहा कि मैककॉट्टर ने अडानी के वकीलों के साथ मिलकर केस खत्म करने पर चर्चा की, लेकिन इस मामले की जांच करने वाले अभियोजकों और एजेंटों की राय नहीं ली।
कोर्ट के फैसले के बाद गौतम अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वह इसे विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं।
गौतम अडानी पर साल 2024 में अमेरिका में आरोप लगाए गए थे। अमेरिकी अभियोजन पक्ष का आरोप था कि अडानी ने भारत में सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने की योजना पर सहमति जताई थी। इसका मकसद अडानी ग्रुप की एक कंपनी को सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी दिलाना बताया गया था। इसके अलावा, अडानी पर अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों के बारे में कथित तौर पर गुमराह करने का भी आरोप लगाया गया था।
अडानी ग्रुप ने शुरुआत से ही इन आरोपों को खारिज किया है। अमेरिकी न्याय विभाग के अधिकारी मैककॉट्टर ने 4 जुलाई को दाखिल एक दस्तावेज में कहा था कि यह मामला मुख्य रूप से विदेशी घटनाओं से जुड़ा था, इसे साबित करना मुश्किल था और यह न्याय विभाग की मौजूदा प्राथमिकताओं से मेल नहीं खाता था।
अमेरिका में अडानी से जुड़े अन्य मामले भी सामने आए हैं। अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन यानी SEC की ओर से लाए गए सिविल मामले के समाधान के तहत गौतम अडानी ने 60 लाख डॉलर और उनके भतीजे सागर अडानी ने 1.2 करोड़ डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा, अडानी एंटरप्राइजेज ने ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले को निपटाने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को 27.5 करोड़ डॉलर का भुगतान करने पर भी सहमति जताई है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)
Updated on:
11 Aug 2026 12:05 pm
Published on:
11 Aug 2026 12:05 pm
