
पेमेंट सिस्टम में भी एआई एजेंट की एंट्री हो गई है। (PC: AI)
AI Agent: कई बार ऐसा होता है कि हम किसी शेयर, गोल्ड या किसी प्रोडक्ट की कीमत गिरने का इंतजार करते रहते हैं। लेकिन जैसे ही सही मौका आता है, हम उसे मिस कर देते हैं। अब यह परेशानी काफी हद तक खत्म हो सकती है। एआई आपकी ओर से तय शर्तें पूरी होते ही खुद पेमेंट कर प्रोडक्ट खरीद देगा। मौजूदा दौर मे हर सेक्टर में एआई एजेंट्स की भूमिका बढ़ रही है। ऐसे में पेमेंट सिस्टम कैसे पीछे रह सकता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि क्या यह सेफ है? जैसे-जैसे पेमेंट सिस्टम डिजिटल हुआ है, फ्रॉड के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में पैसों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
पेमेंट सिस्टम में एआई एजेंट के इस्तेमाल पर सुरक्षा को लेकर चर्चा इसलिए हो रही हैं, क्योंकि कई कंपनियां ऐसी सर्विसेस लॉन्च कर रही हैं। हाल ही में फिनटेक कंपनी पाइन लैब्स ने एजेंट-टू-एजेंट पेमेंट सर्विस लॉन्च की है। इसका नाम पाइन लैब्स पेमेंट प्रोटोकॉल (P3P) रखा गया है। यह तकनीक एआई एजेंट को इस काबिल बनाती है कि वह पहले से मिली अनुमति के आधार पर खुद UPI भुगतान पूरा कर सके।
मान लीजिए आपने अपने AI एजेंट को निर्देश दिया कि अगर सोने का भाव 1,50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे आ जाए तो 5000 रुपये का गोल्ड खरीद लिया जाए। आपको एक बार UPI मैंडेट को मंजूरी देनी होगी। इसके बाद AI लगातार कीमतों पर नजर रखेगा। जैसे ही आपकी तय शर्त पूरी होगी, एजेंट खुद खरीदारी कर देगा। आपको बाद में सिर्फ इसकी सूचना मिलेगी। हर बार अलग से अनुमति देने की जरूरत नहीं होगी।
यह सुविधा फिलहाल डिजिटल गोल्ड सेविंग्स प्लेटफॉर्म गुल्लक पर शुरू हो चुकी है। गुल्लक के को-फाउंडर मंथन शाह का कहना है कि इससे बचत और निवेश का तरीका बदल सकता है। उनके मुताबिक, यह लोगों को मैनुअल सेविंग्स से ऑटोमेटेड वेल्थ क्रिएशन की तरफ ले जाएगा।
साइबर एक्सपर्ट प्रियंका सांखला ने पत्रिका डॉट कॉम को बताया कि पेमेंट सिस्टम में एआई एजेंट का इस्तेमाल आने वाले समय में तेजी से बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि अगर कंपनियां सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम नहीं करती हैं, तो कई तरह की समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। जैसे- ऑटोनोमस एरर्स। इसमें AI की गलत जानकारी (हैलुसिनेशन) या लॉजिक में खामी की वजह से गलती से बड़ी मात्रा में खरीदारी हो सकती है या गलत रकम का भुगतान हो सकता है। अगर AI की वजह से कोई धोखाधड़ी होती है या सिस्टम में गड़बड़ी आती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह कानूनी और प्रक्रियागत रूप से अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। वहीं, दुर्भावनापूर्ण AI एजेंट बड़े पैमाने पर ठगी को अंजाम दे सकते हैं या डीपफेक जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके सामान्य सुरक्षा उपायों को भी चकमा दे सकते हैं।
अब तक एआई कई काम कर सकता था। ईमेल लिखना, जानकारी जुटाना, ऑफर ढूंढ़ना या डेटा का विश्लेषण करना उसके लिए आसान था। लेकिन पेमेंट के समय इंसानी दखल जरूरी रहता था, क्योंकि UPI ट्रांजैक्शन पूरा करने के लिए MPIN या अन्य ऑथेंटिकेशन की जरूरत पड़ती थी। यहीं पर अधिकतर AI आधारित खरीदारी रुक जाती थी। AI चेकआउट तक पहुंच जाता था, लेकिन पेमेंट स्क्रीन आने के बाद प्रक्रिया अधूरी रह जाती थी। P3P ने इसी समस्या का समाधान करने का दावा किया है।
पाइन लैब्स का कहना है कि यह नया सिस्टम यूपीआई के मौजूदा वन टाइम मैंडेट और रिजर्व पे फ्रेमर्क पर बेस्ड है। यानी ग्राहक पहले से एक सीमा और नियम तय कर सकता है। इसके बाद AI एजेंट उन्हीं नियमों के भीतर काम करेगा। एक बार अनुमति मिलने के बाद एजेंट प्रोडक्ट ढूंढ सकता है, विकल्प चुन सकता है, कीमतों की तुलना कर सकता है और जरूरत पड़ने पर पेमेंट भी कर सकता है।
यह तकनीक सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं रहने वाली। इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर विजय सेल्स भी इस सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई ग्राहक किसी स्मार्टफोन या टीवी को एक खास कीमत पर खरीदना चाहता है, तो AI एजेंट उस प्रोडक्ट की कीमत पर नजर रखेगा। जैसे ही कीमत ग्राहक के लक्ष्य तक पहुंचेगी, खरीदारी अपने आप पूरी हो सकती है। विजय सेल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर करण गुप्ता का कहना है कि यह ग्राहकों के लिए ऐसे निजी शॉपर की तरह काम करेगा जो कभी कोई अच्छी डील नहीं छोड़ता।
आने वाले समय में यह तकनीक रिटेल, फिनटेक, ट्रैवल और कई अन्य सेक्टर्स में इस्तेमाल हो सकती है। फ्लैश सेल शुरू होते ही प्रोडक्ट बुक करना, स्टॉक खत्म होने से पहले एडवांस पेमेंट करना या सही कीमत पर निवेश शुरू करना जैसे कई काम किये जा सकेंगे।
पैसों से जुड़ा मामला होने के कारण सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल है। पाइन लैब्स का कहना है कि इसके लिए Grantex नाम का सिस्टम सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी संभालता है। इसमें AI एजेंट की पहचान सत्यापित की जाती है, खर्च की सीमा पहले से तय की जा सकती है और हर ट्रांजैक्शन का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है। सबसे अहम बात यह है कि ग्राहक जब चाहे मैंडेट को बदल सकता है या पूरी तरह रद्द भी कर सकता है।
Published on:
13 Jun 2026 12:42 pm
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