
बैंकों में आज हड़ताल है। (PC: AI)
Bank Employees Strike: अगर आपको आज शुक्रवार, 11 सितंबर को बैंक ब्रांच में जाकर कोई जरूरी काम निपटाना है, तो एक बार रुककर यह खबर जरूर पढ़ लें। देशभर में बैंक कर्मचारियों की 24 घंटे की हड़ताल का असर कई शाखाओं के कामकाज पर पड़ सकता है। खासकर सरकारी बैंकों में ग्राहकों को परेशानी होने की संभावना है। हड़ताल का असर मुख्य रूप से उन कामों पर पड़ सकता है जिनके लिए ग्राहक को बैंक शाखा जाना पड़ता है। मसलन, कैश जमा करना या निकालना, पासबुक अपडेट, चेक से जुड़े काम, लॉकर, KYC, पेंशन से जुड़े दस्तावेज और कुछ लोन संबंधी काम अटक सकते हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बैंकिंग पूरी तरह ठप हो जाएगी। UPI, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य तौर पर चलती रहने की उम्मीद है। ATM भी खुले रहेंगे, लेकिन किसी इलाके में नकदी खत्म होने पर स्थिति अलग हो सकती है।
यह हड़ताल बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर है। United Forum of Bank Unions (UFBU) ने देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। UFBU नौ बैंक कर्मचारी और अधिकारी यूनियनों का संयुक्त संगठन है। यूनियनों ने 23 अगस्त 2026 को हुई बैठक में आगे के आंदोलन का कार्यक्रम तय किया था। उनका कहना है कि कई अहम मांगों पर लंबे समय से बात चल रही है, लेकिन समाधान नहीं निकला है।
इसमें सबसे प्रमुख मांग है सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करना। इसके अलावा Performance Linked Incentive यानी PLI की व्यवस्था और पेंशन से जुड़े मुद्दे भी यूनियनों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं।
बैंक कर्मचारी लंबे समय से चाहते हैं कि सभी शनिवार को छुट्टी घोषित की जाए। यानी बैंकिंग व्यवस्था सोमवार से शुक्रवार तक पांच दिन चले। बैंक यूनियनों के मुताबिक मार्च 2024 में इस व्यवस्था को लेकर समझौता हुआ था। इसके तहत कर्मचारियों को सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना करीब 40 मिनट अतिरिक्त काम करना था, ताकि काम के घंटों में संतुलन बनाया जा सके। इसके बाद प्रस्ताव को मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजा गया था। लेकिन यूनियनों का कहना है कि अभी तक इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। यही बात अब कर्मचारियों के बीच नाराजगी बढ़ा रही है। उनका कहना है कि समझौते के बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ा।
बैंक कर्मचारियों की दूसरी बड़ी आपत्ती PLI सिस्टम को लेकर है। यूनियनों का आरोप है कि वित्तीय सेवा विभाग की ओर से तय की गई पीएलआई व्यवस्था एकतरफा और भेदभावपूर्ण है। उनका सवाल है कि अलग-अलग कर्मचारियों के समूहों के लिए प्रोत्साहन राशि तय करने का आधार क्या है। यूनियनों के मुताबिक कुल कर्मचारियों के सिर्फ 5% हिस्से को मिलने वाला प्रोत्साहन बाकी 95% कर्मचारियों को दिए जाने वाले संयुक्त प्रोत्साहन से भी काफी ज्यादा हो सकता है। अधिकारी वर्ग के Scale IV और उससे ऊपर के कर्मचारियों पर लागू पीएलआई को लेकर भी यूनियनों ने सवाल उठाए हैं।
उनकी मांग है कि पीएलआई को संबंधित बैंक के कुल प्रदर्शन से जोड़ा जाए और कर्मचारियों तथा अधिकारियों के लिए एक समान व्यवस्था हो। यह व्यवस्था Scale VII तक लागू करने की मांग की जा रही है।
हड़ताल का सबसे सीधा असर शाखाओं में होने वाले काम पर पड़ने की आशंका है। अगर किसी बैंक के कर्मचारी बड़ी संख्या में हड़ताल में शामिल होते हैं तो इन सेवाओं में देरी हो सकती है:
बैक ऑफिस और चेक क्लियरिंग से जुड़ा काम भी कुछ जगह प्रभावित हो सकता है। इसलिए जिन ग्राहकों को बैंक से कोई जरूरी दस्तावेज या शाखा की मंजूरी लेनी है, उन्हें देरी का सामना करना पड़ सकता है।
यह सवाल सबसे ज्यादा ग्राहकों के मन में है। राहत की बात यह है कि UPI, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाओं के चलते रहने की उम्मीद है। ग्राहक ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं, UPI से भुगतान कर सकते हैं और मोबाइल या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए सामान्य बैंकिंग काम कर सकते हैं। एटीएम सेवाएं भी आम तौर पर उपलब्ध रहेंगी। लेकिन यहां एक पेंच है। अगर किसी इलाके में एटीएम में कैश भरने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो नकदी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
11 सितंबर की हड़ताल के बाद बैंक कर्मचारियों का आंदोलन खत्म नहीं होने वाला है। UFBU ने 28 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल का भी ऐलान किया है। इन तारीखों की खास बात यह है कि ये बैंकों के छमाही क्लोजिंग के आसपास पड़ती हैं। इस दौरान बैंकों में मिलान, रिपोर्टिंग और अकाउंट क्लोजिंग से जुड़े काम बढ़ जाते हैं। ऐसे में सितंबर के आखिरी दिनों में होने वाली हड़ताल का असर बैंकिंग व्यवस्था पर ज्यादा पड़ सकता है।
Updated on:
11 Sept 2026 10:58 am
Published on:
11 Sept 2026 10:58 am
