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Consumer Court: बैंक को ATM की गलती पड़ी भारी, 10000 की जगह देने पड़े 3 लाख रुपये, जानिए पूरी खबर

Failed ATM Withdrawal: ATM से 10,000 रुपये न मिलने पर 9 साल बाद उपभोक्ता आयोग ने बैंक को 3.28 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

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Failed ATM Withdrawal After 9 years of not getting Rs 10,000 from ATM

सूरत का एटीएम गड़बड़ी मामला। फोटो: एआइ

गुजरात के सूरत से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 10 हजार रुपये की ATM गड़बड़ी बैंक के लिए लाखों का नुकसान बन गई। यह मामला साल 2017 का है, जब एक ग्राहक ने ATM से पैसे निकालने की कोशिश की लेकिन मशीन ने पैसे नहीं दिए। सबसे हैरानी की बात यह रही कि बिना कैश दिए ही खाते से 10,000 रुपये डेबिट हो गए। करीब नौ साल की लंबी लड़ाई के बाद अब उपभोक्ता आयोग ने बैंक को ग्राहक को 3.28 लाख रुपये से ज्यादा का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

9 साल तक चलता रहा विवाद

यह घटना 18 फरवरी 2017 की है, जब ग्राहक ने SBI के ATM से 10,000 रुपये निकालने की कोशिश की। मशीन ने न तो कैश दिया और न ही रसीद निकाली, लेकिन कुछ ही सेकंड में पैसे खाते से कट गए। ग्राहक ने 21 फरवरी को बैंक में शिकायत दर्ज कराई और कई महीनों तक ईमेल और शिकायतें करता रहा। उसने CCTV फुटेज पाने के लिए RTI भी डाली, लेकिन उसे कहीं से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आखिरकार, दिसंबर 2017 में उसने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।

बैंक की दलील को किया खारिज

सुनवाई के दौरान BOB ने कहा कि ATM SBI का था, इसलिए जिम्मेदारी उसकी नहीं है। हालांकि उपभोक्ता आयोग ने इस तर्क को खारिज कर दिया। आयोग ने साफ कहा कि ATM किस बैंक का है, इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। ग्राहक का पैसा Bank of Baroda के खाते से कटा था, इसलिए जिम्मेदारी भी उसी बैंक की है। आयोग ने यह भी कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के एटीएम से निकासी संबंधी 2019 के नियमों के अनुसार, ऐसे मामलों में 5 दिनों के भीतर पैसा वापस होना चाहिए, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ।

9% ब्याज दर से किया भुगतान

उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में बैंक को मूल राशि 10,000 रुपये 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया। इसके अलावा 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से देरी का जुर्माना भी लगाया गया। 26 फरवरी 2026 तक यह देरी 3,288 दिनों तक पहुंच गई, जिससे कुल मुआवजा 3,28,800 रुपये हो गया। साथ ही मानसिक परेशानी के लिए 3,000 रुपये और कानूनी खर्च के लिए 2,000 रुपये अलग से देने का निर्देश दिया गया।

यह फैसला बैंकिंग सिस्टम में जवाबदेही और ग्राहक अधिकारों की अहमियत को मजबूत करता है।