
कच्चा तेल 110 डॉलर के ऊपर है। (PC: AI)
Crude Oil Price: तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन फिर भी नई ड्रिलिंग शुरू नहीं हो रही। सुनने में अजीब लगता है, पर सच्चाई यही है। तेल निकालना कोई नल खोलने जैसा आसान काम नहीं है। मामला जितना आसान दिखता है, उससे कहीं ज्यादा उलझा हुआ है। पिछले कुछ महीनों से तेल कंपनियां लगभग पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं। स्टोरेज भरे पड़े हैं, रिफाइनरी पहले से ही ओवरलोड हैं। ऐसे में नया तेल निकालकर रखा भी कहां जाएगा? ऊपर से नई ड्रिलिंग में सालों लग जाते हैं। आज कुआं खोदा, तो हो सकता है 10 साल बाद तेल निकले। तब तक अगर कीमत गिर गई, तो सारा खेल बिगड़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत टूटने के बाद तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी पूरी तरह खुला नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है- क्या अब कंपनियां बड़े पैमाने पर ड्रिलिंग शुरू करेंगी? जवाब है इतनी जल्दी नहीं।
तेल कंपनियां अब एक ही इलाके पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। ईरान से जुड़े तनाव ने दिखा दिया कि अगर कारोबार एक जगह फंसा, तो पूरी सप्लाई खतरे में पड़ सकती है। इसलिए अब कंपनियां दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में निवेश के मौके तलाश रही हैं।
अमेरिका में नई रिफाइनरी दशकों से नहीं बनी। पर्यावरण नियम और बढ़ती लागत ने काम मुश्किल कर दिया है। दूसरी तरफ, शेल ऑयल के आसान भंडार भी अब कम होते जा रहे हैं। यानी सस्ता और जल्दी मिलने वाला तेल खत्म होने की कगार पर है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले सालों में दुनिया को जितना तेल चाहिए, उतना उत्पादन नहीं हो पाएगा। 2025 से 2040 के बीच बड़ी कंपनियों के उत्पादन में करीब 40% तक गिरावट आ सकती है।
जहां एक तरफ मिडिल ईस्ट में तनाव है, वहीं लैटिन अमेरिका नए मौके दे रहा है। ब्राजील, गुयाना और अर्जेंटीना जैसे देश इस साल रोजाना लाखों बैरल अतिरिक्त तेल देने की स्थिति में हैं।
वहीं, वेनेजुएला भी धीरे-धीरे वापसी की राह पर है, हालांकि वहां चुनौतियां अभी भी कम नहीं हैं।
तेल की खोज में हमेशा जोखिम रहता है। कई बार कुआं खोदने के बाद भी कुछ नहीं मिलता। ऊपर से कंपनियों को डर है कि अगर कीमतें फिर गिर गईं, तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
तेल महंगा होता है, तो लोग विकल्प ढूंढने लगते हैं। यही वजह है कि दुनिया धीरे-धीरे सोलर और दूसरी रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ बढ़ रही है। फिलहाल कंपनियां नई ड्रिलिंग के बजाय पुराने कुओं से ज्यादा उत्पादन निकालने पर ध्यान दे सकती हैं। तेल का खेल अब सिर्फ कीमत का नहीं, बल्कि रणनीति और धैर्य का है।
Updated on:
05 May 2026 04:29 pm
Published on:
05 May 2026 04:27 pm
