
बिना बजट बनाए खरीदारी करना सही नहीं है। (PC: AI)
दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार है। इस बार 20 अक्टूबर को मनाए जाने वाले दशहरे पर आप अपनी कुछ ऐसी आदतों को भी छोड़ने का संकल्प ले सकते हैं, जो आपकी आर्थिक तरक्की में रुकावट बन रही हैं। वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि मजबूत आर्थिक स्थिति बनाने के लिए सिर्फ कमाई बढ़ाना काफी नहीं है। खर्च पर लगाम लगाना, नियमित बचत करना और सोच-समझकर निवेश करना भी उतना ही जरूरी है।
दशहरे पर लोगों को अपनी उन आर्थिक आदतों पर ध्यान देना चाहिए, जो लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकती हैं। इनमें बिना बजट खर्च करना, बचत और निवेश टालना, जरूरत के हिसाब से बीमा नहीं लेना, गैरजरूरी कर्ज लेना, जोखिम भरी ट्रेडिंग करना और सोशल मीडिया पर मिलने वाली निवेश सलाह पर आंख मूंदकर भरोसा करना शामिल है। आइए जानते हैं ऐसी छह आदतों के बारे में, जिन्हें इस त्योहार से बदलने की शुरुआत की जा सकती है।
त्योहारों के दौरान ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार में तरह-तरह के डिस्काउंट, कूपन और क्रेडिट कार्ड ऑफर मिलते हैं। कई बार लोग सिर्फ छूट देखकर ऐसी चीजें भी खरीद लेते हैं, जिनकी उन्हें जरूरत नहीं होती। नतीजा यह होता है कि महीने का बजट बिगड़ जाता है।
क्या करें: त्योहार की खरीदारी शुरू करने से पहले बजट तय करें। जरूरी सामान को प्राथमिकता दें और केवल ऑफर देखकर खरीदारी करने से बचें। याद रखें, 30% की छूट तभी फायदेमंद है, जब आप उस सामान को खरीदने की योजना पहले से बना चुके हों।
कई लोग सोचते हैं कि इस महीने त्योहार है, अगले महीने से बचत शुरू करेंगे। फिर कोई दूसरा खर्च सामने आ जाता है और बचत की योजना आगे खिसक जाती है। धीरे-धीरे यही आदत लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों को पीछे धकेल देती है।
क्या करें: वेतन या कमाई मिलते ही एक तय रकम बचत और निवेश के लिए अलग कर दें। बाकी पैसे से अपने खर्च पूरे करें। निवेश बढ़ाने से पहले इमरजेंसी फंड बनाना भी जरूरी है, ताकि नौकरी जाने या अचानक खर्च आने पर कर्ज न लेना पड़े।
परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए बीमा जरूरी है। महंगाई के दौर में अस्पताल का खर्च काफी ज्यादा हो सकता है। पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस नहीं होने पर एक मेडिकल इमरजेंसी सालों की बचत पर भारी पड़ सकती है। इसी तरह, परिवार में कमाने वाले व्यक्ति के साथ कोई अनहोनी हो जाए, तो लाइफ इंश्योरेंस परिवार को आर्थिक सहारा दे सकता है।
क्या करें: अपनी और परिवार की जरूरत के हिसाब से हेल्थ इंश्योरेंस की कवरेज की समीक्षा करें। अगर परिवार आपकी कमाई पर निर्भर है, तो लाइफ इंश्योरेंस की जरूरत भी समझें। पॉलिसी लेते समय उसकी शर्तें ध्यान से पढ़ें।
त्योहार पर महंगा फोन, टीवी, गाड़ी या दूसरे सामान खरीदने के लिए लोन लेना कई बार भारी पड़ सकता है। खासकर तब, जब खरीदारी के लिए क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने की क्षमता न हो। क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर पूरा नहीं चुकाने पर ब्याज और दूसरे शुल्क तेजी से बढ़ सकते हैं। इससे हर महीने की आमदनी का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में चला जाता है और बचत करना मुश्किल हो जाता है। लगातार कर्ज का बोझ क्रेडिट स्कोर पर भी असर डाल सकता है।
क्या करें: वही सामान खरीदें, जिसका खर्च आप आराम से उठा सकते हैं। केवल दिखावे या दूसरों की बराबरी करने के लिए कर्ज न लें। अगर खरीदारी के लिए लोन जरूरी लग रहा है, तो पहले सोचें कि क्या उस खर्च को कुछ महीने टाला जा सकता है।
शेयर बाजार में कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का लालच कई निवेशकों को जोखिम भरे फैसले लेने के लिए प्रेरित करता है। बार-बार शेयर खरीदना-बेचना या बिना जानकारी के सट्टे जैसे दांव लगाना नुकसान का कारण बन सकता है। बाजार में तेजी देखकर निवेश करना और गिरावट आते ही घबराकर शेयर बेच देना भी लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकता है। हर निवेश में जोखिम होता है और कम समय में ज्यादा रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है।
क्या करें: निवेश अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि के हिसाब से करें। जरूरत पड़ने पर रजिस्टर्ड वित्तीय सलाहकार की मदद लें। किसी भी निवेश में पैसा लगाने से पहले उसके जोखिम को समझना जरूरी है।
सोशल मीडिया पर शेयर बाजार और निवेश से जुड़े वीडियो और पोस्ट बड़ी संख्या में मौजूद हैं। इनमें से कुछ में कम समय में पैसा दोगुना करने या किसी शेयर से मोटा मुनाफा मिलने के दावे किए जाते हैं। लेकिन हर सलाह सही या भरोसेमंद नहीं होती। बिना जांच-पड़ताल के ऐसे दावों पर पैसा लगाने से नुकसान हो सकता है। कई बार निवेश से जुड़ी अधूरी जानकारी लोगों को गलत फैसला लेने के लिए भी उकसाती है।
क्या करें: किसी शेयर या निवेश योजना के बारे में जानकारी मिलने पर उसकी स्वतंत्र रूप से जांच करें। कंपनी के आधिकारिक दस्तावेज और भरोसेमंद स्रोत देखें। जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से बात करें। सिर्फ वायरल वीडियो या किसी अनजान व्यक्ति के दावे के आधार पर निवेश न करें।
आर्थिक मजबूती रातोंरात नहीं आती। इसके लिए लगातार सही फैसले लेना जरूरी है। त्योहारों पर खर्च करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन बचत और भविष्य की जरूरतों को नजरअंदाज करना समझदारी नहीं है।
Updated on:
17 Oct 2026 04:28 pm
Published on:
17 Oct 2026 04:22 pm
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