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एक कर्मचारी से हार गया TCS! अब देने होंगे पूरे पैसे, जानिए क्या है मामला

TCS Leave Policy: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में एक कर्मचारी 7 साल से काम कर रहा था। जब उसके पिता आईसीयू में थे और कर्मचारी मुश्किल वक्त से गुजर रहा था, उस समय उससे इस्तीफा ले लिया गया।

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भारत

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Pawan Jayaswal

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Mohammad Hamid

Nov 20, 2025

TCS leave policy

टीसीएस की खराब एचआर पॉलिसी से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। (PC: Bloomberg)

टाटा ग्रुप की आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) अपने एक कर्मचारी से हार गई। मामला मुंबई में बेस्ड एक TCS कर्मचारी का है, जिसके पिता ICU में भर्ती थे और वो उनकी देखरेख करने के लिए छुट्टी पर थे। ऐसे मुश्किल वक्त में जब कंपनी की ये जिम्मेदारी बनती थी कि वो कर्मचारी का ख्याल रखे और सपोर्ट करे, लेकिन कंपनी ने उसी दौरान कर्मचारी पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया।

7 साल से कर रहा था कंपनी में काम

ये कर्मचारी भी कोई नया नहीं था, बल्कि TCS में 7 साल से काम कर रहा था, उससे कंपनी से इस्तीफा देने के लिए तब कहा गया, जब वो अपने सबसे मुश्किल वक्त से गुजर रहा था और उसको सपोर्ट की जरूरत थी, क्योंकि पिता के ICU में होने से वो पहले ही काफी परेशान था। लेकिन कंपनी ने उसका सपोर्ट करने के बजाय उस पर इस्तीफा देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। कर्मचारी ने इस्तीफा दे दिया। मगर उसको झटका तब लगा जब TCS ने ग्रेच्युटी देने से भी मना कर दिया।

ये मामला बढ़ा तो फोरम ऑफर IT एम्पलॉयीज (FITE) इसे मुंबई लेबर ऑफिस में लेकर गई। FITE का तर्क था कि कर्मचारी के पास पर्याप्त लीव बैलेंस होने के बावजूद TCS ने इस्तीफा देने का दबाव बनाया और ग्रेच्युटी देने से भी इनकार कर दिया, इसलिए ये मामला लेबर अथॉरिटी के पास लेकर जाना पड़ा।

लेबर कमिश्नर की ओर से मिला नोटिस

इस शिकायत के बाद TCS मैनेजमेंट को मुंबई लेबर कमिश्नर की ओर से एक नोटिस भेजा गया और कर्मचारी के साथ जो कुछ किया गया उस पर जवाब मांगा। लेबर कमिश्नर ने कंपनी को अनुचित श्रम प्रथाओं को लेकर चेतावनी दी और कर्मचारी की सात साल की सेवा के लिए पूरी ग्रेच्युटी का भुगतान करने का आदेश दिया। ये TCS के लिए शर्मिंदगी वाली बात थी और कर्मचारी की जीत।

मिली पूरी ग्रेच्युटी

लेबर कमिश्नर की फटकार और आदेश के बाद कर्मचारी को पूरी ग्रेच्युटी राशि मिल गई। FITE ने कहा "श्रम कार्यालय/श्रम मंत्रालय को किसी भी कंपनी की आंतरिक नीतियों पर सवाल उठाने और उन्हें चुनौती देने का पूरा अधिकार है, चाहे छंटनी हो, जबरन इस्तीफा देना हो, गलत तरीके से बर्खास्तगी हो या बकाया राशि रोकनी हो। आगे आएं समस्याओं की रिपोर्ट करें। आपके अधिकार तभी सुरक्षित हैं जब आप अपनी आवाज उठाएंगे।

विवादों से रहा है पुराना नाता

TCS का विवादों से पुराना नाता रहा है, कभी वर्क कल्चर को लेकर तो कभी छंटनी को लेकर ये खबरों में बनी रहती है। अभी कुछ दिन पहले ही पुणे स्थित श्रम आयुक्त कार्यालय ने कथित गैरकानूनी छंटनी से जुड़े नैसेंट सूचना प्रौद्योगिकी कर्मचारी सीनेट की ओर से दर्ज मामलों में TCS को तलब किया। जिसमें करीब 2,500 मध्यम से वरिष्ठ कर्मचारियों के जबरन इस्तीफे मांगे गए।

इस साल कई बार की छंटनी

एक दूसरे मामले में फोरम फॉर आईटी एम्प्लॉइज (FITE) ने दावा किया है कि मुंबई के एक वरिष्ठ कर्मचारी को अपनी अप्रूव्ड मेडिकल लीव के दौरान सर्जरी का इंतजार करते हुए इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। ये कर्मचारी TCS में 14 साल से काम कर रहा था। HR ने कर्मचारी से कहा कि वो या तो 10 महीने का सेवरेंस ले या फिर टर्मिनेट कर दिया जाएगा। TCS ने इस साल कई बार छंटनियां की हैं, जिसमें सबसे बड़ी करीब 12,000 कर्मचारियों की छंटनी है, जो इसके ग्लोबल वर्कफोर्स का करीब 2% है।