
नए गोल्ड की खरीद घट सकती है। (PC: Freepik)
Gold Price Hike Impact: सरकार द्वारा गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करने के बाद ज्वेलरी बाजार में असर दिखने लगा है। ज्वेलरी इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे सोने के दामों में तेजी आएगी। इससे बाजार में नए सोने की खरीद घटेगी और लोग अपने पास रखे पुराने सोने को ऊंची कीमत पर बेचकर लाभ कमाना चाहेंगे। वहीं, पुरानी ज्लेवरी से नई ज्वेलरी बनवाने का ट्रेंड भी जोर पकड़ेगा। बता दें कि भारतीयों के पास घरों में करीब 25,000 टन सोना पड़ा हुआ है।
भारत अपनी सोने की डिमांड को पूरा करने के लिए हर साल 700 से 800 टन सोने का आयात करता है। इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बाद से ही सोने-चांदी के दामों में 7 फीसदी तक का उछाल आया है। इसके बाद भीमा ज्वेलर्स के चेयरमैन बी गोविंदन ने कहा कि ऊंची कीमतों के कारण सोने की वॉल्यूम बिक्री में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। उनका कहना है कि ग्राहक अब नई ज्वेलरी खरीदने के बजाय पुराने गोल्ड को बेचकर नकदी जुटाने पर ध्यान दे सकते हैं।
आईआईएफएल कैपिटल के आउटलुक 2026 के अनुसार भारतीय घरों में पहले से ही 25,000 टन सोना रखा हुआ है। जोस अलुक्कास के चेयरमैन वर्गीज अलुक्कास का कहना है कि ड्यूटी हाइक के बाद ग्राहकों में पुराना सोना बेचकर नकदी जुटाने की होड़ मच सकती है। अगर इस स्टॉक का एक छोटा हिस्सा भी फॉर्मल एक्सचेंज और रिसाइकलिंग के जरिए बाजार में आता है तो ताजा इम्पोर्ट पर दबाव काफी हद तक कम हो सकता है।
ज्वेलरी इंडस्ट्री के कारोबारियों का कहना है कि 14 कैरेट और 9 कैरेट की ज्वेलरी को बढ़ावा देकर गोल्ड इंपोर्ट में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। गोल्ड बार और कॉइन में निवेश को कम करके भी इंपोर्ट को घटाया जा सकता है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के चेयरमैन सुरेंद्र मेहता ने कहा कि ऊंची ड्यूटी के कारण गोल्ड स्मगलिंग बढ़ सकती है। उनके अनुसार पिछली बार जब ड्यूटी अधिक थी, तब करीब 100 से 120 टन सोना ग्रे रूट से भारत पहुंचता था। उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई के दबाव के बीच लोग अपने आभूषण गिरवी रखकर गोल्ड लोन लेने की तरफ भी बढ़ सकते हैं।
Updated on:
14 May 2026 01:02 pm
Published on:
14 May 2026 01:01 pm
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