
सोना अपने उच्च स्तर से 20% टूट चुका है। (PC: AI)
Gold Buying Strategy: कुछ महीने पहले तक लोगों में सोना और चांदी खरीदने की होड़ लगी हुई थी। हर तरफ यही चर्चा थी कि कीमतें और ऊपर जाएंगी। लेकिन बाजार का मिजाज बदला तो दोनों की चमक भी फीकी पड़ गई। अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ मुनाफावसूली है या लंबी गिरावट की शुरुआत? 29 जनवरी को सोना 1,75,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। अब इसका भाव करीब 1,41,800 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया है। यानी करीब 20 फीसदी की गिरावट। चांदी में तो और भी बड़ी मंदी देखने को मिली। इसका भाव 3,96,000 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 2,19,500 रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गया, जो लगभग 45 फीसदी की गिरावट है।
कीमतों में गिरावट का असर निवेशकों के रुख पर भी साफ दिखाई दिया। जनवरी में गोल्ड ETF में 24,000 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड शुद्ध निवेश आया था। लेकिन मई तक तस्वीर पूरी तरह बदल गई और 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज हुई। जून में हालात कुछ सुधरे और फिर से 3,400 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। चांदी के ETF का हाल इससे भी कमजोर रहा। फरवरी से मई तक लगातार चार महीने निवेशकों ने पैसा निकाला। जून में जाकर इसमें सुधार देखने को मिला।
2024 और 2025 में भू-राजनीतिक तनाव के दौरान सोना और चांदी को सुरक्षित निवेश माना गया। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा तो दोनों धातुओं की कीमतें तेजी से चढ़ीं। लेकिन जैसे-जैसे तेल महंगा हुआ, महंगाई बढ़ने की चिंता गहराई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की आशंका बढ़ी, बाजार का रुख बदल गया। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स मजबूत होने लगे। यही दोनों बातें सोना और चांदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गईं। क्योंकि सोना-चांदी ऐसे एसेट्स हैं, जिन पर ब्याज नहीं मिलता। जब ट्रेजरी बॉन्ड ज्यादा ब्याज देने लगते हैं, तो निवेशकों का झुकाव उनकी ओर बढ़ जाता है। जैसे ही अमेरिकी फेड ने सख्त रुख अपनाया और वास्तविक ब्याज दरें बढ़ीं, निवेशकों ने तेजी से सोना-चांदी में मुनाफावसूली शुरू कर दी। चांदी में ज्यादा गिरावट इसलिए आई, क्योंकि यह इन्वेस्टमेंट के साथ ही उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती है। इस बार इसमें दोनों तरफ से दबाव आया।
ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा गिरावट के बाद काफी हद तक बाजार सामान्य हो चुका है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अब कीमतें तुरंत तेज रफ्तार पकड़ लेंगी। फरवरी से जुलाई के बीच बड़ी गिरावट के बावजूद सोना अभी भी एक साल पहले की तुलना में ऊंचे स्तर पर है। तीन और पांच साल के नजरिए से भी इसका रिटर्न मजबूत बना हुआ है। चांदी में तेजी ज्यादा थी, इसलिए उसमें गिरावट भी ज्यादा देखने को मिली।
एक्सपर्ट मानते हैं कि सोने के पक्ष में कई मजबूत कारण आज भी मौजूद हैं। दुनिया के केंद्रीय बैंक लगातार सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं। एशियाई देशों में मांग बनी हुई है और अमेरिका के बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताएं भी खत्म नहीं हुई हैं। अगर आगे चलकर अमेरिकी फेड ब्याज दरों में नरमी दिखाता है और वास्तविक ब्याज दरें घटती हैं, तो सोना फिर से मजबूती पकड़ सकता है। अगली तेजी केवल युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव से नहीं, बल्कि केंद्रीय बैंकों की खरीद, ब्याज दरों और महंगाई की दिशा से तय होगी।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में सोना-चांदी में पहले जैसी सीधी और तेज छलांग शायद देखने को न मिले। अब बाजार की चाल ज्यादा हद तक मौद्रिक नीति और वास्तविक मांग पर निर्भर करेगी। येस सिक्योरिटीज के विश्लेषक हितेश जैन का मानना है कि अगले 3 से 5 वर्षों में सोना रिस्की एसेट्स और इंडस्ट्रियल कमोडिटी की तुलना में कमजोर परफॉर्म कर सकता है। उनका कहना है कि आगे पूंजी की मांग बढ़ने से वास्तविक ब्याज दरें ऊंची रह सकती हैं और यह सोने के लिए अनुकूल स्थिति नहीं होगी।
सोने और चांदी के इतिहास पर नजर डालें तो बड़ी गिरावट के बाद रिकवरी में अक्सर लंबा समय लगा है। 1980 में रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद सोने को उस स्तर पर लौटने में 10 साल लगे। साल 2012 के उच्च स्तर को दोबारा हासिल करने में 7 साल का समय लगा। 2008 की वैश्विक वित्तीय मंदी में चांदी करीब 50 फीसदी टूट गई थी। इसके बाद 2011 में यह 49.5 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची, लेकिन फिर लंबी गिरावट के दौर से गुजरने के बाद 2025 में जाकर पूरी तरह संभल सकी।
| शिखर (पीक) की तारीख | निचले स्तर की तारीख | शिखर से गिरावट | रिकवरी की तारीख | गिरावट से रिकवरी तक लगा समय |
|---|---|---|---|---|
| 18 जनवरी 1980 | 23 जनवरी 1982 | -56% | 9 नवंबर 1989 | 9 वर्ष, 11 महीने |
| 5 फरवरी 1996 | 15 जुलाई 1999 | -30% | 24 मई 2002 | 6 वर्ष, 4 महीने |
| 26 नवंबर 2012 | 22 जुलाई 2015 | -30% | 25 जून 2019 | 6 वर्ष, 7 महीने |
सेबी सर्टिफाइड निवेश सलाहकार डॉ रवि के अनुसार, सोना और चांदी को जल्दी अमीर बनने का जरिया नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो में जोखिम कम करने वाले निवेश के रूप में देखना चाहिए। उनका कहना है कि तेजी देखकर खरीदना और गिरावट में घबराकर बेच देना सबसे बड़ी गलती होती है। सोने में धीरे-धीरे और नियमित निवेश बेहतर रणनीति है। वहीं, चांदी अधिक उतार-चढ़ाव वाली धातु है, इसलिए इसमें सीमित हिस्सेदारी रखना समझदारी होगी। अगर कोई निवेशक सीधे ETF नहीं चुनना चाहता तो मल्टी एसेट फंड या गोल्ड-सिल्वर कॉम्बो फंड भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं।
Updated on:
27 Jul 2026 04:52 pm
Published on:
27 Jul 2026 04:52 pm
