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नौकरियों के लिए सुनहरा मौका: अमेरिकी कंपनियां आ सकती हैं भारत, ट्रंप के H-1B वीजा प्रतिबंधों का असर

H-1B Visa Restrictions: ट्रंप के H-1B वीजा प्रतिबंधों ने अमेरिकी कंपनियों को भारत में जीसीसी स्थापित करने के लिए प्रेरित किया है। इससे भारत में AI, साइबर सुरक्षा और नवाचार से जुड़ी नौकरियों के अवसर बढ़ रहे हैं।

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भारत

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MI Zahir

Sep 30, 2025

H-1B Visas (Photo: Patrika)

H-1B Visa Restrictions: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई एच-1बी और एल-1 वीजा नीतियों (H-1B Visa Restrictions)के कारण अमेरिकी कंपनियां (US Companies India) अब अपने महत्वपूर्ण कार्यों को भारत की ओर स्थानांतरित करने पर विचार कर रही हैं। हाल ही में वीजा आवेदन शुल्क को करीब 1.68-4.20 लाख रुपये से बढ़ा कर तकरीन 83.95 लाख रुपये करने और सख्त नियम लागू करने के प्रस्ताव ने कंपनियों को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। इससे भारत में वैश्विक क्षमता केंद्रों (Global Capability Centers) की मांग तेजी से बढ़ रही है, जो उच्च-स्तरीय कार्यों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, और उत्पाद विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

भारत में अपने जीसीसी स्थापित कर रही हैं कंपनियां

भारत, जो दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, में वर्तमान में 1,700 से अधिक जीसीसी हैं, जो वैश्विक स्तर पर आधे से ज्यादा हैं। ये केंद्र पहले केवल तकनीकी सहायता तक सीमित थे, लेकिन अब ये लक्जरी कार डिजाइन और दवा अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में नवाचार का नेतृत्व कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की नीतियों के कारण कंपनियां अब आउटसोर्सिंग के बजाय भारत में अपने जीसीसी स्थापित कर रही हैं, ताकि रणनीतिक कार्यों को आंतरिक रूप से नियंत्रित किया जा सके। डेलॉइट इंडिया के पार्टनर रोहन लोबो के अनुसार, जीसीसी कंपनियों के लिए एक मजबूत इंजन की तरह काम कर रहे हैं, खासकर वित्त और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में।

अमेरिकी कंपनियों की रणनीति में बदलाव

एच-1बी वीजा की लागत में भारी वृद्धि और सीनेट में प्रस्तावित नए नियमों ने अमेरिकी कंपनियों को अपनी प्रतिभा रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, और जेपी मॉर्गन जैसी कंपनियां, जो एच-1बी वीजा की सबसे बड़ी प्रायोजक हैं, अब भारत में अपने कार्यबल को स्थानांतरित करने की योजना बना रही हैं। एएनएसआर के सीईओ ललित आहूजा ने बताया कि कंपनियां तेजी से जीसीसी स्थापित कर रही हैं, जिससे भारत में उच्च-स्तरीय नौकरियों का सृजन हो रहा है। यह बदलाव न केवल लागत बचाने के लिए है, बल्कि भारत की कुशल प्रतिभा और मजबूत नेतृत्व का लाभ उठाने के लिए भी है।

भारत के लिए अवसर और चुनौतियां

हालांकि भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर है, लेकिन कुछ विशेषज्ञ सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। प्रस्तावित HIRE अधिनियम, जो विदेश में आउटसोर्सिंग पर 25% कर लगा सकता है, भारत के लगभग 23.75 लाख करोड़ रुपये के आईटी उद्योग को प्रभावित कर सकता है। फिर भी, नोमुरा के विश्लेषकों का मानना है कि जीसीसी की बढ़ती मांग इस नुकसान की भरपाई कर सकती है। भारत में 2030 तक 2,200 जीसीसी स्थापित होने की उम्मीद है, जिनका बाजार मूल्य करीब 8.40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

भविष्य की संभावनाएं

बहरहाल ट्रंप की नीतियों ने भारत को वैश्विक नवाचार का केंद्र बनाने का मौका दिया है। जीसीसी अब केवल लागत बचत का साधन नहीं, बल्कि रणनीतिक और नवाचार-आधारित कार्यों का केंद्र बन रहे हैं। हालांकि, कुछ कंपनियां मैक्सिको या कनाडा जैसे अन्य देशों की ओर भी देख रही हैं। फिर भी, भारत की तकनीकी विशेषज्ञता और लागत प्रभावी कार्यबल इसे पहली पसंद बनाए रखता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह "सोने की होड़" भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।