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HRA Tax Benefit: 1 अप्रैल से नया टैक्स सिस्टम होगा लागू, अब बतानी होगी मकान मालिक से रिश्तेदारी नहीं तो लग सकती है भारी पेनल्टी

HRA rules: 1 अप्रैल 2026 से एचआरए क्लेम के लिए मकान मालिक से रिश्ते की जानकारी देना जरूरी होगा। नए नियम पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी टैक्स क्लेम रोकने के लिए लागू किए जा रहे हैं।

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HRA Tax Benefit new tax system from April 1st disclose your relationship with landlord face heavy penalty

1 अप्रैल से नया आयकर लागू होगा। फोटो: एआइ

टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। अब सरकार एक और अहम कदम उठाने जा रही है, जिसमें किराए से जुड़े टैक्स लाभ के नियमों में बदलाव किया जा रहा है। सबसे बड़ा बदलाव हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) के नियमों में होगा। एचआरए के नियमों में यह बदलाव 1 अप्रैल से लागू होगा।

पिछले बजट में पेश किया गया आयकर अधिनियम 2025 को 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जा रहा है। यह पुराने आयकर अधिनियम 1961 के स्थान पर लागू किया जाएगा।

नए नियम में क्या-क्या बताना होगा?

नए ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, टैक्सपेयर्स को फॉर्म 12BB के साथ अब फॉर्म 124 में यह स्पष्ट बताना होगा कि वे जिस व्यक्ति को किराया दे रहे हैं, उससे उनका क्या रिश्ता है। खासकर अगर किराया परिवार के किसी सदस्य जैसे माता पिता, जीवनसाथी या भाई बहन को दिया जा रहा है, तो यह जानकारी देना जरूरी होगा।

यह नियम उन सभी पर लागू होगा जो सालाना 1 लाख रुपये से अधिक किराया देते हैं। ऐसे मामलों में मकान मालिक का PAN देना भी अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे टैक्स विभाग आसानी से जानकारी का मिलान कर सके। यदि मकान मालिक का पैन नंबर उपलब्ध नहीं है तो मकान मालिक को एक स्व-घोषणा (self-declaration) पत्र देना जरूरी है, जिसमें यह बताया हो कि उसके पास पैन नहीं है।

क्या परिवार के सदस्यों को किराया दिया जा सकता है?

आयकर नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार के सदस्यों को किराया देता है, तो वह एचआरए का दावा कर सकता है। लेकिन यह स्थिति वास्तविक होनी चाहिए यानी कि सभी मनी ट्रांजेक्शन और डोक्यूमेंट असली होने चाहिए। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि परिवार के सदस्य अपने आयकर रिटर्न में किराए से प्राप्त आय का उल्लेख करें।

क्यों लाए गए है यह नियम?

इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाना और फर्जी एचआरए क्लेम को रोकना है। विशेषज्ञों के अनुसार, पहले कई मामलों में नकली मकान मालिक दिखाकर या किराया बढ़ाकर टैक्स बचाने की कोशिश की जाती थी। अब मकान मालिक का PAN और रिश्ते की जानकारी देने से Income Tax Department के पास क्रॉस वेरिफिकेशन का मजबूत आधार होगा। इससे यह तय किया जा सकेगा कि किराए की आय सही तरीके से रिपोर्ट की जा रही है।

लग सकती है 200% की भारी पेनल्टी

अगर कोई टैक्सपेयर मकान मालिक से अपने रिश्ते की सही जानकारी नहीं देता या जरूरी दस्तावेज जमा नहीं करता, तो उसका एचआरए क्लेम खारिज किया जा सकता है। इससे टैक्स देनदारी बढ़ जाएगी। इतना ही नहीं, Section 270A Income Tax Act के तहत गलत जानकारी देने पर 50 प्रतिशत से लेकर 200 प्रतिशत तक पेनल्टी भी लग सकती है। इसलिए टैक्सपेयर्स को किराए की रसीद, रेंट एग्रीमेंट, बैंक ट्रांजैक्शन प्रूफ और मकान मालिक का PAN जैसे दस्तावेज तैयार रखने चाहिए।