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IDFC First Bank घोटाले में चौंकाने वाला खुलासा, पूर्व कर्मचारी की Wife और साले से जुड़े हैं फ्रॉड के तार

IDFC First Bank घोटाले में हरियाणा के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने खुलासा किया है कि बैंक के एक पूर्व कर्मचारी की वाइफ और साले की कंपनी के खाते में 300 करोड़ रुपये ट्रांसफर किये गए थे।

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भारत

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Pawan Jayaswal

Feb 25, 2026

IDFC First Bank fraud

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला (PC: AI)

IDFC First Bank के 590 करोड़ रुपये के घोटाले में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। लगभग 300 करोड़ रुपये बैंक के एक पूर्व कर्मचारी की पत्नी और साले की कंपनी के खाते में ट्रांसफर किये गए। हरियाणा के राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने यह खुलासा किया है। इस मामले में बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि और पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार को गिरफ्तार किया गया है। अभय की पत्नी स्वाति सिंगला और उनके भाई अभिषेक सिंगला को भी हिरासत में लिया गया है। संबंधित कंपनी स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स मुख्य रूप से स्वाति के स्वामित्व में है। स्वाति के पास कंपनी की 75 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं, अभिषेक के पास शेष 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

SV & ACB डायरेक्टर जनरल ए एस चावला ने कहा, “यह वही प्राइवेट कंपनी है, जिसके खातों में अधिकतर रकम लगभग 300 करोड़ रुपये ट्रांसफर किये गए थे। बाद में इस पैसे को आगे दूसरे खातों में भेज दिया गया। इस राशि का अधिकांश हिस्सा हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों का था। इसमें कुछ चंडीगढ़ प्रशासन के विभागों की रकम भी शामिल हो सकती है, हालांकि उसकी मात्रा कम है।”

FDs में जमा थे हरियाणा सरकार के पैसे

अधिकारियों के अनुसार, हरियाणा सरकार के लगभग 590 करोड़ रुपये आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ ब्रांच में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा थे। चावला ने आगे कहा, “आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की ब्रांच चंडीगढ़ में है और जिस एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में पैसा ट्रांसफर किया गया, उसकी ब्रांच मोहाली में है।”

हरियाणा सरकार ने की थी जांच

चावला ने बताया, “प्रारंभिक जांच हरियाणा सरकार के एक विभाग द्वारा की गई थी। इसी दौरान बैंक को इस धोखाधड़ी की जानकारी मिली। बैंक शिकायत दर्ज कराना चाहता था और उसने चंडीगढ़ और मुंबई पुलिस से संपर्क किया। लेकिन चूंकि पैसा हरियाणा सरकार का था, इसलिए हमने यहां मामला दर्ज करने का निर्णय लिया। हमने चंडीगढ़ और मुंबई के अधिकारियों से चर्चा की और पंचकूला में FIR दर्ज की, क्योंकि धोखाधड़ी संभवतः हरियाणा में हुई, जहां संबंधित विभाग स्थित हैं।”

इसके बाद IPS अधिकारी गंगा राम पुनिया की निगरानी में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। चावला ने कहा, “SIT ने तेजी से कार्रवाई की और तकनीकी साक्ष्य जुटाने के बाद 24 घंटे के भीतर मुख्य आरोपियों रिभव ऋषि और अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया। दोनों ने लगभग छह महीने पहले IDFC First Bank छोड़ दिया था।”

बैंक ने कर दिया पैसा वापस

उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि बैंक ने पहले ही हरियाणा सरकार को पैसा वापस कर दिया है। उन्होंने कहा, “इससे साबित होता है कि हरियाणा के लोगों की मेहनत की कमाई सुरक्षित है।” चावला ने कहा कि जांच लंबे समय तक चल सकती है। उन्होंने कहा, “इस मामले में बड़ी रकम और कई विभाग शामिल हैं। जांच व्यापक और विस्तृत होगी।”

मंगलवार को जारी एक बयान में IDFC First Bank ने कहा, “प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने जाली दस्तावेज और भुगतान निर्देशों को मंजूरी देने में धोखाधड़ी की।” बैंक ने आगे कहा, “जांच जारी रहने के बावजूद, बैंक ने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों द्वारा क्लेम की गई पूरी मूल राशि और ब्याज कुल 583 करोड़ रुपये तुरंत चुका दिए हैं।”