
लोगों के मन में इनकम टैक्स से जुड़े कई भ्रम रहते हैं। (PC: Freepik)
New Tax Regime: नई कर व्यवस्था के सेक्शन 115BAC के तहत, कोई व्यक्ति "Income from House Property" शीर्षक के तहत आय की गणना करते समय किराए पर दी गई संपत्ति के नेट सालाना मूल्य पर 30% की स्टैंडर्ड कटौती का क्लेम जारी रख सकता है। इतना ही नहीं, हाउस टैक्स यानी चुकाया गया नगरपालिका टैक्स भी कुल किराए से घटाया जा सकता है, चाहे टैक्स व्यवस्था कोई भी हो, नई या पुरानी। नई टैक्स व्यवस्था में कोई और कटौती (सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन का ब्याज) शामिल नहीं है, लेकिन किराए पर दी गई संपत्ति शामिल है। हालांकि, इसकी भी कुछ सीमाएं हैं।
शेयर बाजार में जब आप ट्रेडिंग करते हैं और डेरिवेटिव ट्रेडिंग यानी फ्यूचर एंड ऑप्शंस में पैसे लगाते हैं और अगर आपको इसमें नुकसान होता है, तो इसको सेक्शन 43(5) के तहत नॉन-स्पेकुलेटिव बिजनेस लॉस में रखा जाता है। इसको उसी असेसमेंट ईयर में किसी भी दूसरी नॉन-स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम से सेट ऑफ किया जा सकता है। इसमें कैश सेगमेंट ट्रेडिंग से होने वाला प्रॉफिट भी शामिल है। वो बिजनेस लॉस जो उसी साल सेटऑफ नहीं हुआ, उसको 8 असेसमेंट ईयर में कैरी फॉरवर्ड या आगे बढ़ाया जा सकता है। उदाहण के तौर पर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 5 लाख F&O लॉस हुआ, उसी साल 2 लाख कैश गेन से सेट ऑफ किया। बचा 3 लाख, तो इसे अगले 8 साल (वित्त वर्ष 2025-26 से 2032-33 तक) कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं।
प्रिजम्प्टिव स्कीम में कोई "मैक्सिमम लिमिट फॉर बिजनेस एक्सपेंस" नहीं है। 50% ग्रॉस रिसीट्स को प्रिज़्यूम्ड एक्सपेंस माना जाता है। मतलब ग्रॉस इनकम का आधा हिस्सा ऑटोमैटिक एक्सपेंस में गिना जाता है। इसको ऐसे समझिए - मान लीजिए कि आप कोई फ्रीलांसर या सेल्फ एंप्लॉयड आर्किटेक्ट हैं। इनकम टैक्स के सेक्शन 44ADA के मुताबिक, अगर ग्रॉस रिसीट एक वित्त वर्ष में 50 लाख रुपये से अधिक नहीं है, तो वह अनुमानित कराधान योजना या Presumptive Taxation को चुन सकता है। हालांकि, इसमें अगर कैश 5% से ज्यादा नहीं है, तो वहां 75 लाख रुपये की बढ़ी हुई सीमा लागू होती है। जैसा कि पहले बताया गया है, इस योजना के तहत, ग्रॉस रिसीट का 50% टैक्सेबल माना जाता है और अनुमानित हिस्से से आगे बिजनेस या प्रोफेशनल खर्चों के लिए कोई कटौती नहीं की जाती है। इसके लिए कोई एक्सपेंस प्रूफ देने की जरूरत नहीं होती है।
मान लीजिए आपने अपनी बहन को कैश के रूप में 20 लाख रुपये दिए, तो सवाल यह है कि क्या इसे ITR में दिखाना होगा और क्या ये AIS में दिखाई देगा। तो देखिए- एक भाई-बहन द्वारा दूसरे भाई-बहन को दिया गया उपहार धारा 56(2)(x) अधिनियम के तहत पूरी तरह से टैक्स फ्री है। क्योंकि "बहन" रिश्तेदार मानी जाती है। हालांकि, पारदर्शिता के लिए आपकी बहन को ITR में “Exempt Income” कैटेगरी के तहत इसको दिखाना चाहिए। बैंकिंग से किए गए ऊंची कीमत के लेन-देन, बैंकों की रिपोर्टिंग सीमा के आधार पर, प्राप्तकर्ता के वार्षिक सूचना विवरण (AIS)/वित्तीय लेन-देन विवरण (SFT) में दिखाई दे सकते हैं। इसलिए, रिकॉर्ड्स संभाल कर रखने से अगर AIS दिखाई दे, तो उसका मिलान करने में मदद मिलती है।
Published on:
07 Nov 2025 10:43 am
बड़ी खबरें
View Allकारोबार
ट्रेंडिंग
