
आज 500 रुपये वाले नोट सबसे ज्यादा चलन में हैं। छोटे मूल्य के नोट उपलब्ध नहीं होना गंभीर समस्या बन गई है। (Photo: AI generated)
पिछली बार 2000 रुपये का नोट आपके हाथ कब लगा था? सौ रुपये से कम मूल्य के नोट या सिक्कों का लेन-देन पिछली बार आपने कब किया था? दिमाग पर जोर डालना पड़ रहा है न! स्वाभाविक ही है, क्योंकि 2000 के नोट चलन में सबसे कम हैं। इनकी कुल संख्या 273 लाख ही है।
2000 रुपये का नोट चलन में कम हो, इससे आम लोगों को कोई परेशानी नहीं लगती है। लेकिन, छोटे मूल्य के नोट-सिक्कों की कमी एक समस्या बन चुकी है। बैंक वाले भी इसे गंभीर समस्या बता रहे हैं। हाल ही में ऑल इंडिया रिजर्व बैंक एम्पलॉयी असोसिएशन (एआईआरबीईए) ने इसे ऐसी समस्या बताया जो गांव-शहर, दोनों जगह लोगो को परेशान कर रही है।
असोसिएशन ने रिजर्व बैंक में करेंसी मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के डिप्टी गवर्नर को चिट्ठी लिखी और कहा कि इस समस्या का समाधान बैंक और एटीएम से भी नहीं हो रहा है। एटीएम में छोटे नोट होते नहीं हैं। एटीएम की संख्या भी घटती जा रही है। 2022-23 में नए एटीएम लगाने की दर मात्र 2.2 प्रतिशत रही, जो 2021-22 में 6.1 प्रतिशत थी।
संगठन ने समस्या के समाधान के लिए पंचायतों की मदद से मेले आयोजित कर सिक्के बांटने का सुझाव दिया और कहा कि आरबीआई बैंकों में छोटे नोटों व सिक्कों की सप्लाई बढ़ाए।
सप्लाई का संकट कितना बड़ा है, इस टेबल से समझा जा सकता है। छोटे मूल्य वाले नोट हैं ही कम। दो से 50 रुपये तक के नोटों की कुल संख्या से ज्यादा 500 रुपये के नोट चलन में हैं।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की 2024-25 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक बाजार में सबसे ज्यादा 40.9 प्रतिशत नोट 500 रुपये के हैं। इसके बाद 10 रुपये (16.4 प्रतिशत), 100 रुपये (14.7 प्रतिशत) और 20 रुपये (8.9 प्रतिशत) के नोटों की उपलब्धता है। 24 अप्रैल, 2026 को खत्म हुए सप्ताह का आंकड़ा इस टेबल में देखिए।
| कितने के नोट (₹) | कितने नोट (संख्या, लाख में) | मूल्य (₹ करोड़) |
| 2 और 5 | 1,10,216 | 4,232 |
| 10 | 2,77,762 | 27,776 |
| 20 | 1,41,505 | 28,301 |
| 50 | 1,10,139 | 55,070 |
| 100 | 2,77,845 | 2,77,845 |
| 200 | 1,07,424 | 2,14,849 |
| 500 | 7,18,482 | 35,92,410 |
| 2000 | 273 | 5,460 |
| कुल | 17,43,646 | 42,05,942 |
| कितने रुपये वाले सिक्के (₹) | कितने सिक्के (लाख में) | सिक्कों का कुल मूल्य (₹ करोड़) |
| छोटे सिक्के | 1,47,880 | 739 |
| 1 | 5,50,367 | 5,504 |
| 2 | 3,75,823 | 7,516 |
| 5 | 2,32,279 | 11,614 |
| 10 | 1,02,539 | 10,254 |
| 20 | 26,937 | 5,387 |
| कुल | 14,35,826 | 41,014 |
सरकार समस्या के हल के लिए मुख्य रूप से तीन कदम उठाने पर काम कर रही है:
1. छोटे नोट या सिक्कों के लिए डिस्पेंसर मशीन लगाना,
2. हाइब्रिड एटीएम लगाना, जिनसे बड़े नोट के बदले छोटे नोट या सिक्के निकाले जा सकें,
3. रिजर्व बैंक के द्वारा छोटे नोटों की छपाई बढ़वाना।
'मिंट' अखबार ने खबर दी है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने जून तक देश में जगह-जगह मशीनें लगाने का फैसला किया है। शुरुआत में ऐसी 60 मशीनें बाजारों और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर लगेंगी। इन मशीनों से लोग 10-20-50 रुपये के नोट और 1-2-5-10 रुपये के सिक्के निकाल सकेंगे।
यूपीआई ऐप के जरिए क्यूआर कोड स्कैन कर मशीन से नोट या सिक्का निकाल सकेंगे। लोगों को ये मशीनें काम की लगीं तब इनकी संख्या और बढ़ाई जाएगी। आगे चल कर कुछ और बैंक भी ऐसी मशीनें लगाएंगे।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने मुंबई और दिल्ली में दो एटीएम लगाए हैं, जिनसे लोग यूपीआई के जरिए छोटे नोट निकाल सकते हैं।
यूपीआई के काफी इस्तेमाल के बावजूद एटीएम का इस्तेमाल कम नहीं हुआ है। एटीएम सोल्यूशंस कंपनी सीएमएस इन्फो सिस्टम्स के मुताबिक 2024 में औसतन हर भारतीय ने हर महीने एटीएम से 5586 रुपये की निकासी की थी। 2025 में यह बढ़ कर 5835 रुपये हो गई।
जानकार मानते हैं कि ग्राहक अगर पैसे निकालने बैंक जाता है तो हर निकासी बैंक को 90-100 रुपये की पड़ती है, जबकि एटीएम से निकासी पर यह खर्च करीब 15 रुपये ही बैठता है। फिर भी, ऑनलाइन पेमेंट बढ़ता देख बैंक एटीएम लगाने में भी सुस्ती दिखाने लगे हैं।
भारत में लोग करीब 75 करोड़ स्मार्टफोन और 22 करोड़ फीचर फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या सवा अरब को पार कर गई है। यूपीआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। फिर भी छोटे नोट और सिक्कों के दर्शन दुर्लभ हो रहे हैं तो इसकी वजह इनकी कम उपलब्धता ही है।
| ट्रांजैक्शन | UPI (यूपीआई) | ATM (एटीएम निकासी) | बैंक ट्रांजैक्शन (IMPS/NEFT) |
| वॉल्यूम (संख्या) | 22.64 बिलियन | 0.65 बिलियन (अनुमानित) | 0.55 बिलियन (IMPS) |
| मूल्य (वैल्यू) | ₹29.53 लाख करोड़ | ₹2.8 लाख करोड़ | ₹5.8 लाख करोड़ (IMPS) |
| औसत ट्रांजैक्शन | ₹1,304 (छोटे भुगतान हेतु) | ₹4,000 - ₹5,000 | ₹10,000+ (बड़े भुगतान) |
| वृद्धि दर (YoY) | 24% (सबसे तेज) | स्थिर / गिरावट की ओर | 15% (स्थिर वृद्धि) |
| महीना | UPI पर बैंकों की संख्या | वॉल्यूम (मिलियन में) | मूल्य (करोड़ में) |
| मार्च-2026 | 705 | 22,641.11 | 29,52,542.05 |
| फरवरी-2026 | 694 | 20,394.18 | 26,84,229.29 |
| जनवरी-2026 | 691 | 21,703.44 | 28,33,481.22 |
| दिसंबर-2025 | 685 | 21,634.67 | 27,96,712.73 |
| नवंबर-2025 | 684 | 20,466.98 | 26,31,632.63 |
| अक्टूबर-2025 | 683 | 20,700.92 | 27,27,790.68 |
| सितंबर-2025 | 686 | 19,633.43 | 24,89,736.54 |
| अगस्त-2025 | 688 | 20,008.31 | 24,85,472.91 |
| जुलाई-2025 | 684 | 19,467.95 | 25,08,498.09 |
| जून-2025 | 675 | 18,395.01 | 24,03,930.69 |
| मई-2025 | 673 | 18,677.46 | 25,14,297.01 |
| अप्रैल-2025 | 668 | 17,893.42 | 23,94,925.87 |
Updated on:
29 Apr 2026 07:20 pm
Published on:
29 Apr 2026 06:45 pm
