
Rajesh Mehta ने कम उम्र से ही ज्वैलरी बिजनेस जॉइन कर लिया था। (PC: AI)
Rajesh Exports: सेबी ने एक ऐसा मामला उजागर किया है, जो भारतीय कॉरपोरेट जगत के इतिहास की सबसे बड़ी धोखाधड़ियों में से एक बन सकता है। यह कंपनी राजेश एक्सपोर्ट है, जो गोल्ड और ज्वैलरी कारोबार से जुड़ी है। यह कंपनी सोने को रिफाइन करती है, जूलरी डिजाइन करती है और उसे बेचती है। बाजार नियामक SEBI ने कंपनी और उसके एमडी राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी करते हुए वित्तीय रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियों, फंड के संदिग्ध इस्तेमाल और कॉरपोरेट गवर्नेंस में गंभीर खामियों की बात कही है। सेबी का आरोप है कि कंपनी ने कई सालों तक अपने वित्तीय आंकड़ों को ऐसे पेश किया, जिनसे कारोबार की तस्वीर वास्तविकता से कहीं बड़ी दिखाई गई। नियामक को शुरुआती जांच में ऐसे कई लेनदेन मिले हैं, जिनकी प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जवाब : राजेश मेहता का नाम भारत के गोल्ड और ज्वैलरी कारोबार के बड़े उद्योगपतियों में लिया जाता है। उनका जन्म 20 जून 1964 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने सेंट जोसेफ स्कूल से अपनी शुरुआती पढ़ाई की। इसके बाद वे आगे हायर एजुकेशन लेने के बजाय कम उम्र में ही अपने पिता के ज्वैलरी कारोबार से जुड़ गए। 1980 के दशक की शुरुआत में उन्होंने अपने भाई प्रशांत मेहता के साथ मिलकर चांदी के आभूषणों का कारोबार शुरू किया था। दिलचस्प बात यह है कि इस कारोबार की शुरुआत केवल 1,200 रुपये उधार लेकर की गई थी। धीरे-धीरे यह कारोबार दक्षिण भारत के बड़े थोक ज्वैलरी व्यवसायों में शामिल हो गया। बाद में गुजरात और मुंबई जैसे बाजारों में भी कंपनी ने अपनी मजबूत मौजूदगी बनाई। फोर्ब्स के आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर 2019 में राजेश मेहता की अनुमानित संपत्ति 1.57 अरब डॉलर थी।
जवाब: साल 1995 में राजेश एक्सपोर्ट्स ने शेयर बाजार में कदम रखा और IPO के जरिए 10 करोड़ रुपये जुटाए। इसके बाद कंपनी ने गोल्ड रिफाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल कारोबार में तेजी से विस्तार किया। कंपनी को वैश्विक पहचान 2015 में मिली, जब उसने स्विट्जरलैंड की मशहूर कीमती मेटल रिफाइनरी Valcambi का करीब 40 करोड़ डॉलर में अधिग्रहण किया। यह डील उस समय काफी चर्चा में रही थी और इससे कंपनी की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी मजबूत हुई।
जवाब: सेबी का कहना है कि कंपनी के रोजमर्रा के संचालन और वित्तीय फैसलों में राजेश मेहता की प्रमुख भूमिका थी। इसी आधार पर नियामक ने उन्हें अगले आदेश तक राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में सीधे या परोक्ष रूप से खरीद-फरोख्त करने से रोक दिया है।
जवाब: सेबी के 109 पन्नों के अंतरिम आदेश के मुताबिक वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच राजेश एक्सपोर्ट्स ने करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के समेकित राजस्व (कंसोलिडेटेड रेवेन्यू) को गलत तरीके से दर्शाया हो सकता है। नियामक का कहना है कि यह रकम कंपनी द्वारा दिखाए गए कुल राजस्व का लगभग 99.8 फीसदी हिस्सा है। अगर यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह भारतीय कॉरपोरेट इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय विसंगति मामलों में से एक हो सकता है। सेबी का यह भी कहना है कि कंपनी के फंड को प्रमोटर समूह से जुड़ी संस्थाओं के जरिए घुमाया गया और कई मामलों में पर्याप्त जानकारी या दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
जवाब: नियामक के अनुसार कंपनी को कई बार नोटिस और समन भेजे गए। उससे वित्तीय रिकॉर्ड, फंड के इस्तेमाल का उद्देश्य और लाभार्थियों की जानकारी मांगी गई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। SEBI ने कंपनी के वैधानिक ऑडिटरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आदेश में कहा गया है कि ऑडिटरों ने जांच के दौरान जरूरी दस्तावेज देने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में वे रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करा सके। नियामक का मानना है कि लगातार सहयोग न करना अपने आप में गंभीर संकेत है और इससे महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने की आशंका मजबूत होती है।
जवाब: सेबी की कार्रवाई के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में करीब 5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। इसका असर LIC पर भी पड़ा, जिसके शेयर एक फीसदी से ज्यादा फिसल गए। मार्च 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के अनुसार, LIC के पास राजेश एक्सपोर्ट्स में 10.80 फीसदी हिस्सेदारी है। सितंबर 2023 से लेकर अब तक LIC ने अपनी हिस्सेदारी में कोई बदलाव नहीं किया है।
जवाब: पिछले कुछ वर्षों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी कम की है। मार्च 2023 में जहां FII की हिस्सेदारी 17.60 फीसदी थी, वहीं मार्च 2026 तक यह घटकर 14.26 फीसदी रह गई।
जवाब: राजेश एक्सपोर्ट्स ने सेबी के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। कंपनी का कहना है कि उसके द्वारा घोषित राजस्व आंकड़े सही हैं और नियामक का आदेश केवल अंतरिम है। कंपनी ने संकेत दिया है कि वह आगे अपना पक्ष विस्तार से रखेगी।
Updated on:
4 Jun 2026, 6:36 PM IST
Published on:
4 Jun 2026, 6:36 PM IST
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