
कई लोग सिर्फ रेंटल इनकम के लिए घर खरीदते हैं। (PC: AI)
Real Estate News: देश में मकानों की कीमतें 3-4 साल में करीब 20-30% तक बढ़ चुकी हैं। इस दौरान किराए में सालाना बढ़ोतरी औसतन 10 से 15% तक हुई है। शहरों में रेंटल इनकम अब सिर्फ खर्च निकालने का साधन नहीं रही, बल्कि एक स्टेबल कैश फ्लो एसेट बनती जा रही है। रेंटल इनकम की एफडी से तुलना करें, तो 40 लाख की एफडी पर 7% ब्याज मिलने पर कुल कमाई 2,80,000 रुपए होगी। वहीं, 40 लाख के फ्लैट पर किराए से यदि साल की 2 लाख भी कमाई माने, तो भी हर साल नुकसान करीब 80,000 रुपए का होता है। यह नुकसान तब होगा जब प्रॉपर्टी की कीमत में कोई इजाफा न हुआ हो। लेकिन कोविड के बाद देश में प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और इसमें सालाना 10 से 12 फीसदी का इजाफा हो रहा है। लोग रेंटल इनकम के लिए खूब सेकेंड होम खरीद रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या रेंट कमाने के लिए रियल एस्टेट में निवेश करना सही है?
रेंटल यील्ड का मतलब है आपने प्रॉपर्टी में जितना पैसा लगाया, उसके मुकाबले साल भर में कितना किराया मिल रहा है। अगर फ्लैट की कीमत 40 लाख रुपए है और सालाना किराया 2 लाख रुपए है, तो रेंटल यील्ड 5% होगा।
भारत में औसत रेंटल यील्ड 2-4% है, लेकिन महानगरों में यह औसत से बेहतर रहती है। रेजिडेंशिल प्रॉपर्टी की तुलना में कमर्शियल प्रॉपर्टी में बेहतर रेंटल यील्ड होता है। कमर्शियल में सालाना रिटर्न 6-9% तक हो सकता है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि रेंटल इनकम बैंक एफडी से भी कम रिटर्न देती है। पर लंबी अवधि में प्रॉपर्टी की कीमत तेजी से बढ़ती है। 5-6 साल पहले 30-40 लाख का 2 बीएचके फ्लैट आज 70- 80 लाख तक पहुंच चुका है।
हां, लेकिन सही लोकेशन और सही प्रोजेक्ट में। यह भी देखें कि आपको फौरन उस फंड की जरूरत न पड़े, जिसे प्रॉपर्टी में लगाने वाले हैं। प्रॉपर्टी चुनने में इन बातों का भी रखें ध्यान:
15 मिनट का नियम : मुख्य बाजार, स्कूल, बड़े हॉस्पिटल और पार्क आदि प्रॉपर्टी से 15-20 मिनट की दूरी पर हों, तो अच्छा किराया मिलता है।
कनेक्टिविटी : अगर एक्सप्रेसवे, मेट्रो लाइन, एयरपोर्ट वाले एरिया में प्रॉपर्टी हो, तो रेंटल वैल्यू बढ़ जाती है। कई जगहों पर यह 3-5 साल में 20-40 फीसदी बढ़ जाती है।
वैकेंसी रिस्क : फ्लैट या शॉप खाली होने पर 2 महीने के भीतर किराए पर चढ़ जाता है, तो वह एरिया या प्रोजेक्ट सही है।
ओसी स्टेटस : यह जरूर देखें कि प्रोजेक्ट को ऑक्यूपेशनल सिर्टिफिकेट (ओसी) मिला है या नहीं? कई बार किसी प्रोजेक्ट में कुछ टावरों को ओसी मिल जाती है। अगर यह सर्टिफिकेट मिल गया है, तो निवेश कर सकते हैं। क्योंकि ऐसी प्रॉपर्टी में बिजली-पानी की सुविधा स्थायी होती है।
मेंटेनेंस चार्ज
कई बार ज्यादा मेंटेनेंस चार्ज से भी किराएदार दूर भागते हैं। ऐसे में उस प्रोजेक्ट को सेलेक्ट करने में भलाई है, जिसका मेंटेनेंस चार्ज 2-3 रुपए प्रति वर्ग फीट हो।
पार्क-पार्किंग
सोसाइटी में ओपन एरिया, पार्क और पार्किंग की सुविधा न हो तो लोग बचते हैं। बिना पार्किंग वाले घर कई बार किराए पर नहीं उठते हैं।
लिफ्ट
सोसाइटी में हर 25-30 फ्लैट पर एक लिफ्ट का होना बेहतर है।
Published on:
29 Dec 2025 01:19 pm
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