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Real Estate और Share Market में पैसा लगाएं तो कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न? पिछले 20 साल के डेटा से समझिए

Property Investment: ज्यादातर भारतीय परिवार अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा प्रॉपर्टी में लगाते हैं, यह सोचकर कि यही सबसे सही निवेश है। लेकिन पिछले 20 साल के डेटा के आधार पर पता चलता है कि यह सही नहीं है। इक्विटी में मिलने वाला रिटर्न काफी ज्यादा होता है।
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भारत

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Gajanand Prajapat

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Updated: 15 Jun 2026, 2:17 PM IST

sensex returns vs property returns

लॉन्ग टर्म के नजरिेये से देखें तो Real Estate में निवेश से Share Market के बराबर रिटर्न नहीं मिलता। (PC : AI)

Real Estate Investment Tips: भारत में बड़ी संख्या में लोग रियल एस्टेट में निवेश करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की साल 2017 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मिडिल क्लास परिवार अपनी कुल संपत्ति का 70 से 80 फिसदी रियल एस्टेट में निवेश कर देते हैं। यह आकंड़ा बहुत ही चौंकाने वाला है। ऐसा इसलिए क्योंकि पुरानी पीढ़ी के पास इक्विटी जैसे ऑप्शन कम थे। लेकिन आज यह स्थिति नहीं है, तो क्या अब भी रियल एस्टेट को संपत्ति निर्माण के लिए चुना जा सकता है?

क्या कहता है पिछले 20 साल का डेटा

ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2025 से पहले के 20 सालों में सेंसेक्स में लगाए 1 करोड़ रुपये करीब 14 करोड़ रुपये बन गए यानी 14.1 फीसदी CAGR रिटर्न प्राप्त हुआ। वहीं, इसी दौरान शहरी रियल एस्टेट में लगाया गया 1 करोड़ रुपया 7.8 फीसदी CAGR के रिटर्न के साथ 4.5 करोड़ रुपये ही बन पाया। वहीं बात करें, मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स की तो वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक इसने करीब 25 गुना रिटर्न दिया।

रेंटल यील्ड भी ज्यादा नहीं

रियल एस्टेट में लगाए गए पैसे पर किराए के रूप में आपको कितना रिटर्न मिल रहा है, इसे रेंटल यील्ड कहते हैं। नोब्रोकर के डेटा के मुताबिक, इसी अवधि के दौरान भारत का आवासीय रियल एस्टेट का रेंटल यील्ड 2 से 4 फीसदी तक ही था, यानी कि यह रिटर्न महंगाई को भी मात नहीं दे सका। इसके साथ ही अधिकांश भारतीय शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें औसतन 6 से 8 फीसदी सालाना तक बढ़ी हैं।

प्रॉपर्टी में होते हैं ये खर्चे

प्रॉपर्टी खरीदते समय स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन चार्ज, ब्रोकरेज चार्ज जैसे कई खर्च अलग से होते हैं, जिनकी और ध्यान नहीं जाता। इसके बाद भी खर्चे रुकते नहीं है। सोसायटी डिपॉजिट, पार्किंग शुल्क, होम लोन, सालाना मेंटेनेंस और हर 8-10 साल में रिनोवेशन जैसे कई खर्चे हो जाते हैं।

लिक्विडिटी कहां है ज्यादा?

शेयर बाजार में निवेश की सबसे बड़ी खास बात यह है कि इसमें निवेश की गई रकम को तुरंत नकदी में बदला जा सकता है। अगर आपको पैसों की जरूरत हो, तो फ्लैट या प्लॉट को तुरंत खरीदार मिलना मुश्किल होता है। इसके बाद खरीदार मिल भी जाए तो फिर से स्टांप ड्यूटी और ब्रोक्रेज जैसे चार्ज लगते हैं।

क्या घर खरीदना पूरी तरह गलत फैसला है?

इस डेटा को देखकर यह लग सकता है कि क्या घर खरीदना गलत फैसला है। ऐसा नहीं है। वास्तव में यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उसे किस काम लेते हैं। यदि पहले से एक घर है, तो दूसरी प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले सोच-समझ लेना चाहिए। वहीं, घर बनाने के लिए खरीदी गई जमीन को इन्वेस्टमेंट की तरह नहीं देखा जाता।