
सेबी ने निवेशकों को ओपिनियन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स से दूर रहने की चेतावनी दी है
SEBI Warnings for Opinion Trading Platform: बाजार नियामक सेबी ने ‘ओपिनियन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स’ को लेकर चेतावनी जारी की है और निवेशकों से इन प्लेटफॉर्म्स से दूर रहने को कहा है। सेबी अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि ये प्लेटफॉर्म न तो सेबी के अधीन आते हैं और न ही इनके लिए निवेशकों को कोई सुरक्षा मिलती है। उन्होंने कहा कि इन प्लेटफॉर्म्स पर किया गया निवेश न तो सुरक्षित होता है और न ही यह कानूनी माना जाता है। ऐसे प्लेटफॉर्म न तो सेबी (SEBI) से रजिस्टर्ड हैं और न ही किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के अंतर्गत आते हैं। सेबी ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि इन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसा कोई ट्रेड किया जाता है जिसे सिक्योरिटीज (शेयर आदि) की तरह माना जाए, तो वह पूरी तरह अवैध होगा। फिलहाल भारत में ऐसे प्लेटफॉर्म्स के लिए कोई स्पष्ट कानूनी ढांचा नहीं है। अमरीका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ऐसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट किया जाता है।
Opinion Trading Platform: ये ऐसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म होते हैं, जहां लोग किसी घटना के होने या न होने (यस-नो) के अनुमान पर पैसे लगाते हैं। मुनाफा इस बात पर निर्भर करता है कि आपने सही अनुमान लगाया या नहीं। इन प्लेटफॉर्म्स पर उपयोग किए जाने वाले शब्द जैसे प्रॉफिट, स्टॉप लॉस, ट्रेडिंग आदि शब्द से लोग भ्रमित हो सकते हैं कि ये असली निवेश प्लेटफॉर्म हैं। ये प्लेटफॉर्म्स यूजर्स को क्रिकेट मैच, चुनाव नतीजों और बिटकॉइन जैसी घटनाओं पर दांव लगाने का अवसर देते हैं जो सट्टेबाजी के दायरे में आता है, लेकिन इसे 'इंवेस्टमेंट' के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इनमें प्रोबो, एमपीएल ओपिनियो, ट्रेडेक्स, ट्रैगो जैसी कंपनियां आती हैं। इन कंपनियों में अब तक 4,200 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश हुआ है। इन प्लेटफॉर्म्स पर हर साल 50,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेनदेन होता है और यूजर्स की संख्या 5 करोड़ से अधिक हो चुकी है।
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि अब सभी वित्तीय सेवाओं के लिए एक समान केवाइसी (KYC) प्रक्रिया तैयार की जा रही है, जिससे निवेशकों को बार-बार अलग-अलग पहचान प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। सेबी अब वित्त मंत्रालय और अन्य नियामकों के साथ मिलकर सेंट्रल केवाईसी सिस्टम को पीएमएलए (मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून) के अनुसार इंटरऑपरेबल बनाने पर काम कर रहा है। इसका मतलब है कि एक बार केवाइसी कराने के बाद वही पहचान सभी जगह, बैंक, म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) , स्टॉक ब्रोकर और इंश्योरेंस कंपनियों में मान्य होगी। मौजूदा केआरए सिस्टम (केवाइसी रजिस्ट्रेशन एजेंसियों) और नए सेंट्रल सिस्टम को आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे निवेश प्रक्रिया और भी आसान होगी।
Published on:
02 May 2025 08:35 am
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