
चांदी की कीमतों मे बड़ी गिरावट दिख सकती है। (PC: AI)
Silver Rate Today: चांदी की कीमतें अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 14 फीसदी टूट गई हैं। हालांकि, साल 2025 में चांदी ने अपने निवेशकों को 180 फीसदी का बंपर रिटर्न दिया है। सप्लाई से जुड़ी बाधाओं और डिमांड बढ़ने से चांदी की कीमतों में यह जबरदस्त तेजी आई। सैमसंग द्वारा लिथियम-आयन बैटरी से सॉलिड-स्टेट बैटरी की ओर बढ़ने की घोषणा के बाद चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ी, जिससे चांदी के दामों में तेज उछाल आया। इसके अलावा, पेरू और चाड से निर्यात आपूर्ति में बाधा (अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव के कारण) और 1 जनवरी 2026 से चीन द्वारा चांदी के निर्यात पर लगाया गया कथित ‘शैडो बैन' ने कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया। हालांकि, बीते हफ्ते चांदी में मुनाफावसूली दिखी और अब कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, चांदी की मौजूदा कीमतें खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी हैं और इससे इसकी औद्योगिक मांग प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी उद्योग की लागत एक निश्चित सीमा से ज्यादा बढ़ जाती है, तो वह विकल्प तलाशने लगता है। फोटोवोल्टिक सेल और सोलर पैनल इंडस्ट्री पहले ही चांदी की जगह तांबे (कॉपर) की ओर शिफ्ट हो चुके हैं। वहीं, बैटरी सेक्टर में भी चांदी की जगह कॉपर बाइंडिंग तकनीक अपनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतें या तो 82.670 डॉलर प्रति औंस पर अपने शिखर पर पहुंच चुकी हैं या फिर संस्थागत निवेशकों की शॉर्ट कवरिंग के कारण कुछ समय और बढ़ सकती हैं। ऐसे में फरवरी 2026 तक चांदी 100 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकती है या उसके करीब पहुंच सकती है। इसके बाद कीमतों में गिरावट आ सकती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, FY27 (वित्त वर्ष 2026-27) में चांदी पर मंदी का दबाव रहने की संभावना है और कीमतों में 60% तक की गिरावट आ सकती है।
पेस 360 के चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट अमित गोयल के अनुसार, कोई भी उद्योग तब तक किसी कच्चे माल को सहन कर सकता है, जब तक वह उसके व्यवसाय के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो। जैसे ही लागत असहनीय हो जाती है, उद्योग विकल्प तलाशने लगता है। चांदी की कीमतों में तेज उछाल के चलते इसकी कुछ औद्योगिक मांग पहले ही प्रभावित हो चुकी है। सोलर और फोटोवोल्टिक इंडस्ट्री चांदी की जगह तांबे को अपनाने में सफल रही है।
सॉलिड-स्टेट बैटरियों में भी चांदी की कॉइल बाइंडिंग से कॉपर कॉइल बाइंडिंग की ओर शिफ्ट होने की कोशिशें जारी हैं। इजरायल, ताइवान, ऑस्ट्रेलिया और चीन की कई कंपनियां इस दिशा में सक्रिय हैं। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क की हालिया चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। गोयल के अनुसार, चांदी की कीमतें या तो टॉप आउट कर चुकी हैं या फिर शॉर्ट कवरिंग के कारण कुछ समय के लिए और बढ़ सकती हैं और फरवरी 2026 तक 100 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकती हैं या उसके आसपास रह सकती हैं
चांदी की कीमतें अपना इतिहास दोहरा सकती हैं। लाइव मिंट की एक रिपोर्ट में या वेल्थ के डायरेक्टर अनुज गुप्ता के हवाले से बताया गया कि चांदी में तेज तेजी के बाद भारी गिरावट आती है। यह चांदी का इतिहास रहा है। ऐसा 1980 में हुआ था, जब हंट ब्रदर्स ने कथित तौर पर वैश्विक चांदी भंडार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा जमा कर लिया था। इसके बाद एक्सचेंजों ने मार्जिन मनी बढ़ा दी, जिससे लिक्विडिटी संकट पैदा हुआ और चांदी की कीमतें करीब 49.50 डॉलर से गिरकर 11 डॉलर प्रति औंस तक आ गई थीं। इसी तरह 2011 में भी चांदी लगभग 48 डॉलर प्रति औंस के स्तर से 75% तक टूट गई थी।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कोई कच्चा माल इंडस्ट्री को कंट्रोल नहीं कर सकता, बल्कि इंडस्ट्री ही कच्चा माल और उसकी कीमत तय करती है। इसलिए रिटेल निवेशकों को नई पोजीशन लेने या पुरानी पोजीशन बनाए रखने से बचना चाहिए। यह राहत रैली अल्पकालिक हो सकती है और कीमतें फरवरी 2026 तक करीब 100 डॉलर प्रति औंस के आसपास टॉप आउट कर सकती है। गोयल के अनुसार, FY27 के अंत तक, अगर चांदी 100 डॉलर के आसपास टॉप करती है, तो COMEX पर इसकी कीमत करीब 40 डॉलर प्रति औंस रह सकती है। हालांकि, अगर चांदी 82.670 डॉलर के स्तर पर ही टॉप आउट कर चुकी है, तो FY27 के अंत तक इसके 35 डॉलर प्रति औंस तक फिसलने की भी संभावना है।
Published on:
03 Jan 2026 02:59 pm
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