
लोगों के खर्चे बढ़ रहे हैं। (PC: AI)
Spending Tip: ऑनलाइन फूड ऑर्डर, क्विक कॉमर्स, कैब बुकिंग और ओटीटी प्लेटफॉर्म जैसी सुविधाएं अब रोजमर्रा की जरूरत बन चुकी हैं। ये सेवाएं समय बचाती हैं और जिंदगी आसान बनाती हैं। लेकिन इन सुविधाओं की ऐसी कीमत है जो अक्सर हमारी नजरों से छिपी रहती है। समस्या सुविधा लेने में नहीं, बल्कि उसके लगातार बढ़ते खर्च को नजरअंदाज करने में है। अगर लोगों से पूछा जाए कि वे फालतू चीजों पर कितना खर्च करते हैं, तो ज्यादातर लोग बड़े डिनर, शॉपिंग या वीकेंड ट्रिप का नाम लेंगे। बहुत कम लोग उस 249 रुपए के लंच या 199 रुपए के उस सब्सक्रिप्शन को याद नहीं रखते, जो रात में अपने-आप रिन्यू हो गया।
इसी तरह लोग एकसाथ ओटीटी, म्यूजिक, क्लाउड स्टोरेज, गेमिंग या फिटनेस ऐप्स जैसे कई सब्सक्रिप्शन लेते हैं। हर एक का शुल्क छोटा है, लेकिन जब ये हर महीने अपने-आप रिन्यू होते हैं, तब कुल खर्च काफी बड़ा हो जाता है। इसे कॉस्ट क्रीप कहा जाता है। यानी छोटे-छोटे खर्च और बार-बार खरीदारी धीरे-धीरे बचत कम करता है, बजट बढ़ाता है।
उदाहरण के लिए फूड डिलीवरी को लें। यह आमतौर पर एक बड़ा बिल नहीं होता, बल्कि महीने भर में 8-12 छोटे-छोटे ऑर्डर होते हैं। हर ऑर्डर पर 40 से 80 रुपए तक फीस लगती है। सुविधा सेवाओं में डिलीवरी चार्ज, प्लेटफॉर्म फीस, टैक्स, टिप, प्रीमियम शुल्क भी जुड़ते हैं। पिछले कुछ वर्षों में फूड डिलीवरी ऐप्स की प्लेटफॉर्म फीस लगातार बढ़ी है। 2023 में यह फीस 2 रुपए थी, मार्च 2026 तक 17.58 रुपए तक पहुंच गई है। अगर हफ्ते में तीन बार ऑर्डर तो प्लेटफॉर्म फीस के रूप में ही 150-250 रुपए हर महीने अतिरिक्त खर्च हो सकता है। यदि महीने में 12 ऑर्डर किए तो बढ़ी हुई प्लेटफॉर्म फीस व डिलीवरी चार्ज मिलाकर 900 रुपये एक्स्ट्रा खर्च होंगे।
Published on:
20 Apr 2026 10:55 am
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